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Hindi News उत्तर प्रदेशअतीक-अशरफ की हत्‍या से पहले दस लाख से की थी पार्टी, जानिए कहां से मिली जिगाना पिस्‍टल; किसने बनाया प्‍लान 

अतीक-अशरफ की हत्‍या से पहले दस लाख से की थी पार्टी, जानिए कहां से मिली जिगाना पिस्‍टल; किसने बनाया प्‍लान 

इस हत्याकांड की सबसे अहम कड़ी तुर्किये की पिस्टल है, जिससे अतीक अहमद की कनपटी पर गोली मारी गई थी। कुख्यात शूटर जितेंद्र गोगीं ने यह सनी सिंह को दी थी। जितेंद्र ने सनी को दस लाख रुपये भी दिए थे।

अतीक-अशरफ की हत्‍या से पहले दस लाख से की थी पार्टी, जानिए कहां से मिली जिगाना पिस्‍टल; किसने बनाया प्‍लान 
Ajay Singhवरिष्ठ संवाददाता,प्रयागराजSat, 15 Jul 2023 09:42 AM
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Atiq-Ashraf Murder: अतीक-अशरफ हत्याकांड में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। अब अदालत में केस डायरी और आरोप पत्र का अवलोकन शुरू हो गया है। आरोप पत्र में पुलिस ने तीनों आरोपितों बांदा के लवलेश तिवारी, हमीरपुर के सनी सिंह और कासगंज के अरुण मौर्या की हत्या के पूर्व की गतिविधि का भी विस्तार से उल्लेख किया है।

इस हत्याकांड की सबसे अहम कड़ी तुर्किये की पिस्टल है, जिससे अतीक अहमद की कनपटी पर गोली मारी गई थी। जिगाना पिस्टल मेरठ के बदमाश कुख्यात शूटर जितेंद्र गोगीं ने सनी सिंह को दी थी। जांच में पता चला है कि पिस्टल देने के साथ ही जितेंद्र ने सनी को दस लाख रुपये भी दिए थे। सनी को साथियों का इंतजाम कर टिल्लू ताजपुरिया की हत्या करनी थी। सनी को दस लाख रुपये मिले तो वह अपने साथी लवलेश और अरुण मौर्य के साथ मौज करने लगा। 2021 में दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में जितेंद्र गोगी की हत्या कर दी गई। इसके बाद सनी बेफिक्र हो गया। लवलेश और अरुण के साथ उसकी दारु पार्टी और मौज मस्ती और भी बढ़ गई। 

पैसे थे इसलिए इन तीनों ने छोटे-मोटे अपराध से दूरी बनाए रखी। होटलों में रुकना, शराब पार्टी करना, कई शहरों में घूमने जाना हत्या के पूर्व तीनों की यही गतिविधि रही।जब पैसे खत्म होने लगे तो शराब पीने के दौरान तीनों के बीच चर्चा हुई कि ऐसा कुछ करें जिससे यह ऐशो आराम जारी रहे। इसी बीच टीवी चैनलों पर उमेश पाल हत्याकांड की खबरें गूंजने लगीं। लवलेश और अरुण ने सनी से कहा कि माफिया इस तरह का होना चाहिए। नशे के दौरान इन तीनों के दिमाग में आई यह बात घर कर गई। इसके बाद लखनऊ के एक होटल में तीनों ने अतीक-अशरफ की हत्या की योजना बनानी शुरू कर दी और 15 अप्रैल को काल्विन अस्पताल में दोनों को मार गिराया।

कभी एक दर्जन वकील खड़े होते थे
वक्त बदल गया है। माफिया अतीक-अशरफ से जुड़े दर्जनों केसों में ऐसा रहा कि एक दर्जन वकील पेशी के दौरान अदालत में मौजूद रहते थे। यहां तक की हाईकोर्ट के सीनियर वकील भी आ जाते थे। अब माफिया की हत्या के बाद उसके आरोप पत्र का संज्ञान अदालत में लिया गया तो अतीक, अशरफ की तरफ से एक भी वकील मौजूद नहीं था।

यह मामला चर्चा का विषय बना है। ऐसा ही अतीक-अशरफ हत्याकांड के आरोपितों के मामले में रहा। शुक्रवार को आरोप पत्र के मद़्देनजर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां पेशी थी लेकिन तीनों आरोपितों की तरफ से कोई भी वकील मौजूद नहीं था।

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