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Hindi News उत्तर प्रदेशबागपत लोकसभा सीट समीकरण: जाट लैंड में RLD-BJP संग पर लगेगी मुहर या सपा की गणित होगी कामयाब? बसपा ने त्रिकोणीय बनाया संघर्ष

बागपत लोकसभा सीट समीकरण: जाट लैंड में RLD-BJP संग पर लगेगी मुहर या सपा की गणित होगी कामयाब? बसपा ने त्रिकोणीय बनाया संघर्ष

यूपी लोकसभा की 80 सीटों में से एक बागपत सीट को जाटों का गढ़ कहा जाता है। ये सीट पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार के परिवार से भी ताल्लुक रखती है।

बागपत लोकसभा सीट समीकरण: जाट लैंड में RLD-BJP संग पर लगेगी मुहर या सपा की गणित होगी कामयाब? बसपा ने त्रिकोणीय बनाया संघर्ष
Dinesh Rathourलाइव हिंदुस्तान,बागपतWed, 24 Apr 2024 11:29 AM
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Lok Sabha Seat Equation : यूपी लोकसभा की 80 सीटों में से एक बागपत सीट को जाटों का गढ़ कहा जाता है। ये सीट पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार के परिवार से भी ताल्लुक रखती है। इस सीट पर ज्यादातर चौधरी परिवार का बसेरा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो बागपत में प्रत्याशियों के बीच मुकाबला इस बार दिलचस्प होने वाला है। 2019 के चुनाव तक सपा के साथ गठबंधन में रही जयंत की रालोद इस बार भाजपा की सहयोगी पार्टी बन गई है। भाजपा ने ये सीट रालोद के खाते में दी है। रालोद ने यहां से डॉ. राजुमार सांगवान को उम्मीदवार बनाया है जबकि सपा ने इस सीट पर कद्दावर नेता मनोज चौधरी को प्रत्याशी बनाया है जबकि बसपा ने प्रवीण बसंत पर दांव लगाया है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार बागपत में जातिगत समीकरणों में ये चुनाव पूरी तरह से उलझ गया है।

दरअसल तीनों ही पार्टियों ने जिन प्रत्याशियों को उतारा है वह सभी अपनी-अपनी बिरादरी के वोटरों को लुभाने में कामयाब हो सकते हैं। ऐसे में जीत किसकी होगी ये कहना फिलहाल मुश्किल है। जानकार बताते हैं कि भाजपा के साथ रालोद के गठबंधन के बाद यहां का मुस्लिम वोटर छिटक गया है। मुस्लिमों का पूरा रुख सपा-कांग्रेस गठबंधन की तरफ दिखने लगा है। रालोद-भाजपा प्रत्याशी डॉ. राजकुमार सांगवान को जाटों में बिखरा नहीं होने की उम्मीद है लेकिन सपा का कोर वोटर कहे जाने वाले यादव में ज्यादा बिखरा नहीं नजर आ रहा है। लेकिन बसपा उम्मीदवार दोनों की पार्टियों के समीकरणों पर पानी फेर सकती हैं, वह समीकरण बिगाड़ते नजर आ रहे हैं। किसका कितना समीकरण साथ देगा या किसी गणित सटीक बैठेगी ये तो चार जून को आने वाले परिणाम के बाद ही पता चलेगा।

बागपत में किसने कब लड़ा चुनाव

1967 से अस्तिव में आई बागपत लोकसभा सीट का अपना एक अनोखा इतिहास रहा है। इस सीट से जीतने वाले 90 फीसदी सांसदों के सिर केंद्र सरकार में मंत्री का ताज सजा है। 1977 में बागपत लोकसभा सीट से चुनाव जीतने के बाद चौधरी चरणसिंह गृह और वित्त मंत्री बने। इसके बाद उनके सिर प्रधानमंत्री का ताज भी सजा। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने यहां से तीन बार 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर, 1980 और 1984 में लोकदल के टिकट पर चुनाव जीता था। उनके बाद 1989 और 1991 में उनके बेटे चौधरी अजित सिंह ने जनता दल के टिकट पर जीतकर इस राजनीतिक विरासत को संभाला। 1996 में अजित सिंह ने कांग्रेस से बागपत सीट जीती लेकिन 1998 के चुनावों में वह भाजपा के सोमपाल शास्त्री से चुनाव हार गए।  इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक दल बनाई और 1999 में इस सीट को कब्जाने में कामयाब रहे। उन्होंने 2004 और 2009 में भी इस सीट पर जीत दर्ज की लेकिन 2014 में वह सत्यपाल सिंह से चुनाव हार गए। 2019 में अजित सिंह ने बेटे जयंत चौधरी के लिए छोड़ दी लेकिन जूनियर चौधरी सीट नहीं बचा सके। अब जयंत राज्यसभा के सांसद हैं। 

2019 का चुनाव परिणाम

2019 में इस सीट पर भाजपा ने कमल खिलाया था। भाजपा के डॉ. सत्यपाल सिंह 525789 वोट पाकर चुनाव जीते थे। जबकि दूसरे नंबर पर रहे रालोद के जयंत चौधरी को 502287 वोटों पर संतोष करना पड़ा था।

2014 का चुनाव परिणाम

मोदी लहर के चलते 2014 में भाजपा ने इस सीट पर परचम लहराया था। दूसरे नंबर की पार्टी सपा को करारी शिकस्त मिली थी। भाजपा के डॉ. सत्यपाल सिंह को उस समय 423475 वोट मिले थे जबकि सपा के गुलाम मोहम्मद को 213609 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। 

बागपत लोकसभा की विधानसभाएं

बागपत लोकसभा सीट के अंतर्गत पांच विधानसभा आती हैं, इनमें एक मेरठ और एक गाजियाबाद की विधानसभा भी शामिल है। बागपत जिले की बात करें तो इसमें तीन विधानसभा हैं। बागपत लोकसभा में सिवालखास, छपरौली, बड़ौत, बागपत, मोदीनगर विधानसभा में शामिल है। 

बागपत जिले का इतिहास

दिल्ली से मात्र 53 किलोमीटर पर स्थित पश्चिमी यूपी की बागपत सीट यमुना नदी के तट पर मौजूद है। यहां महादेव मंदिर, पारश्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, गुफा वाले बाबा का मंदिर, वाल्मीकि आश्रम, काली सिंह बाबा मंदिर और त्रीलोग तीरथ धाम यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। 

जातिगत समीकरण

चौधरी परिवार का गढ़ कही जाने वाली बागपत लोकसभा सीट पर मुस्लिम वोटरों की संख्या अच्छी-खासी है। इनकी संख्या करीब साढ़े तीन लाख के आसपास की है, जबकि दूसरी सबसे बड़ी आबादी चार लाख वोटरों के साथ जाट निवास करते हैं। इनके अलावा इस सीट पर डेढ़ लाख दलित मतदाता भी हैं। यादवों की संख्या करीब 50 हजार है। गुर्जर और राजपूत दोनों वोटरों को मिलाएं तो इनकी संख्या करीब एक लाख से ऊपर की है। इसके अलावा ब्राह्मण, त्यागी की जनसंख्या भी कम नहीं है। ये वोटर करीब 70 हजार हैं। पिछड़े और अन्य पिछड़े वोटरों की भी तादाद इस सीट पर काफी अच्छी है।