ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News उत्तर प्रदेशआजमगढ़: बिंदास काटिए, अब नहीं रुलाएगा प्याज, वैज्ञानिकों ने दिखाया जेनेटिक इंजीनियरिंग का कमाल 

आजमगढ़: बिंदास काटिए, अब नहीं रुलाएगा प्याज, वैज्ञानिकों ने दिखाया जेनेटिक इंजीनियरिंग का कमाल 

प्याज काटते समय अगर आंखों से आंसू न निकलें और जलन भी न हो तो कितनी राहत मिलेगी। जी, यह बिल्‍कुल सच होने जा रहा है। यह कमाल कर दिखाया है आजमगढ़ के कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के वैज्ञानिकों ने।

आजमगढ़: बिंदास काटिए, अब नहीं रुलाएगा प्याज, वैज्ञानिकों ने दिखाया जेनेटिक इंजीनियरिंग का कमाल 
Ajay Singhचंद्रप्रकाश उपाध्‍याय ,आजमगढ़Sun, 26 Nov 2023 06:31 AM
ऐप पर पढ़ें

Tears will not come out while cutting onion: सोचिए, प्याज काटते समय अगर आंखों से आंसू न निकलें और जलन भी न हो तो कितनी राहत मिलेगी। जी हां, यह सच होने जा रहा है। यह कमाल कर दिखाया है आजमगढ़ के कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के वैज्ञानिकों ने। जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिए उन्होंने नई प्रजाति एग्रीफाउंड लाइट रेड-3 में प्याज के इस गुण को बदल दिया है। जिससे काटते समय आंखों में जलन नहीं होगी और न ही आंसू निकलेंगे। उपज भी सामान्य प्याज के मुकाबले तीन गुना अधिक होगा। 

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने प्याज पर शोध करने वाली संस्था एनएचआरडीएफ (नेशनल हार्टीकल्चर रिसर्च डेवलपमेंट फाउंडेशन) के साथ मिलकर दो साल तक चले शोध के बाद प्याज की इस नई वेरायटी को तैयार किया है। इसका रंग हल्का लाल और स्वाद में हल्का तीखापन होता है। खास यह है इसका लंबे समय तक भंडारण किया जा सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, सामान्य प्याज को काटते समय उसके अंदर के सेल्स टूट जाते हैं, जिससे गैस निकलती है, जो सल्फेनिक एसिड बनाती है। 

फिर यह एसिड एंजाइम के साथ मिलकर प्रोपैनथियॉल एस-ऑक्साइड नामक गैस बनाता है। जब यह गैस हमारी आंखों तक पहुंचती है तो पानी के साथ मिलकर सल्फ्यूरिक एसिड बनाती है। इसी वजह से आंखों में जलन होती है और आंसू निकलने लगते हैं। प्याज की नई प्रजाति एग्रीफाउंड लाइट रेड-3 में जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिए इस गुण को बदल दिया गया है। ऐसे में प्याज काटते समय उसके अंदर के सेल्स नहीं टूटेंगे। सल्फेनिक एसिड नहीं बनेगा और आंखों में जलन नहीं होगी। प्रयोग सफल होने के बाद कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने पहली बार इसकी नर्सरी तैयार की है। दिसंबर के महीने में चयनित किसानों को पौधे वितरित कर इसकी खेती कराई जाएगी। 

सामान्य प्याज से तीन गुना अधिक होगा उत्पादन

एग्रीफाउंड लाइट रेड-3 की खेती से किसान भी मालामाल होंगे। सामान्य प्याज की फसल तैयार होने में आमतौर 190 दिन लग जाते हैं। नई वेरायटी एग्रीफाउंड लाइट रेड-3 150 से 170 दिनों में तैयार हो जाएगी। एक हेक्टेयर में सामान्य प्याज की औसत उपज 12 टन के आसपास है। नई प्रजाति की खेती कर किसान प्रति हेक्टेयर तीस टन से अधिक उत्पादन ले सकेंगे। 

किसानों को वितरित करेंगे बीज, बड़े पैमाने पर होगी खेती

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक रबी के सीजन में चयनित किसानों से खेती कराने के बाद नई वेरायटी के प्याज का बीज तैयार कराएंगे। अगले सीजन से इसकी बड़े पैमाने पर खेती कराने की तैयारी है। नई प्रजाति की खेती में सामान्य प्याज के मुकाबले लागत कम होगी और सिंचाई की भी कम आवश्यकता पड़ेगी। इसमें रासायनिक खादों का बहुत कम इस्तेमाल होगा। रोपाई से तीस दिन पहले 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद डालकर खेत की जुताई कराई जाएगी। फसल में कीट और बीमारियों का खतरा न के बराबर होगा।

कई औषधीय गुण भी मिलेंगे प्याज की इस नई वेरायटी में 
कई औषधीय गुण भी मिलेंगे। जिससे लोगों को बीमारियों से बचाव में मदद मिलेगी। एग्रीफाउंड लाइट रेड-3 में एलिसिन, क्वेरसेटिन, फिसेटिन जैसे रासायनिक यौगिक प्रचूर मात्रा में मिलेंगे। इसके अलावा डायलिल डाईसल्फाइड और डायलिल ट्राईसल्फाइड जैसे सल्फरस यौगिक भी मिलेंगे। 

क्‍या बोले वैज्ञानिक 
कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के वरिष्‍ठ वैज्ञानिक एवं अध्‍यक्ष डॉ.एलसी वर्मा ने कहा कि दो साल तक चले शोध के बाद प्याज की नई प्रजाति एग्रीफाउंड लाइट रेड-3 तैयार की गई है। इसे काटने पर आंखों में जलन नहीं होगी। आंसू भी नहीं निकलेंगे। आनुवंशिक इंजीनियरिंग के जरिए प्याज के इस गुण को बदल दिया गया है।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें