Ayodhya verdict all school colleges will remain closed from 9 November to 11 November - अयोध्या केसः चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर, स्कूल-कॉलेज सोमवार तक बंद, विवादित कमेंट पर होगी जेल DA Image
23 नवंबर, 2019|1:31|IST

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अयोध्या केसः चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर, स्कूल-कॉलेज सोमवार तक बंद, विवादित कमेंट पर होगी जेल

अयोध्या मामले पर प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच न्यायधीशों की पीठ ने फैसला सुना दिया है। फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के लिए अयोध्या में उपयुक्त स्थान पर पांच एकड़ का प्लॉट देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकार तीन महीने के भीतर ट्रस्ट बनाएगा और यह ट्रस्ट मंदिर का निर्माण करेगा।

अयोध्या केस के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अयोध्या में जबरदस्त नाकेबंदी की गई है। अयोध्या में इस समय 20 हजार से ज्यादा जवान मोर्चा संभाले हुए हैं। एडीजी अभियोजन आशुतोष पांडेय अयोध्या में ही कैंप किए हुए हैं। अयोध्या में पूर्व में तैनात रहे कई अफसरों को भी वहां भेजा गया है। प्रदेश के सभी स्कूल, कालेज और विश्वविद्यालय सोमवार तक के लिए बंद कर दिए गए हैं। अयोध्या में लखनऊ जोन के जिलों से भेजे गए अतिरिक्त पुलिस फोर्स के साथ ही पीएसी, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल (सीपीएमएफ) के जवान तैनात किए गए हैं।

इसमें पीएसी, सीएपीएफ व सीपीएमएफ को मिलाकर जवानों की 55 कंपनियां तैनात हैं। अयोध्या नगर में अधिग्रहीत परिसर की ओर से जाने वाले सभी रास्तों पर बैरीकेडिंग करके फोर्स तैनात कर दी गई है। अयोध्या के आसपास के जिलों में विद्यालयों को चिह्नित करके अस्थाई जेलें बनाई गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को ही वीडियो कांफ्रेंसिंग कर के कड़े सुरक्षा प्रबंध करने के निर्देश दे दिए थे। उनके निर्देश पर आपात स्थितियों के लिए लखनऊ व अयोध्या में हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराया गया है। शैक्षिक संस्थानों में सोमवार तक अवकाश घोषित किए जाने की जानकारी शासन ने दी है। 

इससे पहले दोपहर में प्रदेश के एडीजी कानून-व्यवस्था पीवी रामाशास्त्री ने जोन, रेंज व जिलों के सोशल मीडिया सेल को हर समय अलर्ट रहने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से सामाजिक सद्भाव भंग करने वाले तत्वों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने ग्रुप एडमिन के खिलाफ भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। आईजी कानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार के साथ यूपी 112 मुख्यालय से जोन, रेंज व जिलों के सोशल मीडिया सेल में नियुक्त अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग करते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर उनके सोशल मीडिया एकाउंट को तत्काल ब्लॉक किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर किए गए आपत्तिजनक पोस्ट को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी ताकि पोस्ट डिलीट होने पर भी साक्ष्य उपलब्ध रहे। 

चिह्नित लोगों पर डिजिटल वालंटियर भी रखेंगे नजर 

एडीजी कानून-व्यवस्था ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक व भ्रामक पोस्ट करने वाले व्यक्तियों के बारे में डिजिटल वालंटियर ग्रुप के माध्यम से जानकारी साझा की जाए, जिससे इस प्रकार के व्यक्तियों द्वारा की जाने वाली भ्रामक पोस्ट पर डिजिटल वालंटियर ग्रुप के सदस्यों द्वारा भी सतर्क दृष्टि रखी जा सके। उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुपों में किए जाने वाले आपत्तिजनक पोस्ट के संबंध में पोस्ट करने वाले व्यक्तियों के साथ-साथ ग्रुप एडमिन के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। एडीजी ने जिलों के अफसरों को निर्देशित किया कि वे अपने स्तर से इस बात का प्रचार-प्रसार करें कि कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी, भाषण, तस्वीर, धार्मिक उन्माद, सामाजिक विद्वेष व जातिगत घृणा आदि से संबंधित वीडियो या मैसेज आदि पोस्ट न करे और न ही इसे लाइक व फारवर्ड करे। 

गुप्त सूचनाएं देने को जारी किया व्हाट्सअप नंबर 

आईजी कानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार ने बताया कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, ट्वीटर व व्हाट्सएप आदि के माध्यम से भड़काऊ या आपत्तिजनक पोस्टों के विषय में पुलिस विभाग को सूचित करने के लिए एक नया प्लेटफार्म भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए डीजीपी मुख्यालय स्तर से व्हाट्सएप नंबर 8874327341 उपलब्ध कराया जा रहा है। जनता का कोई भी इस नंबर पर टेक्स्ट मैसेज, वाइसक्लीप व स्क्रीन शॉट आदि के माध्यम से व्हाट्सएप कर सकता है। इसकी जानकारी देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। 

 

सुप्रीम कोर्ट कल यानि शनिवार को दशकों पुराने अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाएगा। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक सुबह 10 बजे तक फैसला आ सकता है। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले से पहले केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से अलर्ट रहने और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। आज ही चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और यूपी के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी और डीजीपी ओपी सिंह अन्य सीनियर अधिकारियों के बीच बैठक हुई। 

भारत के सबसे संवेदनशील, धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों में से एक राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ शनिवार को फैसला सुनाएगी। ये फैसला मुख्य न्यायाधीश गोगोई द्वारा उत्तर प्रदेश के शीर्ष अधिकारियों से राज्य में कानून-व्यवस्था की तैयारियों को पूरा करने के घंटों बाद किया गया। गोगोई के अलावा इस संविधानिक पीठ में एसए बोबडे, डी वाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एसए नाज़ेर जैसे न्यायाधीश शामिल हैं। 

गौरतलब है कि अयोध्या विवाद में पहली बार हिंसा 1853 में हुई और कुछ सालों में ही मामला गहरा गया। 1885 में विवाद पहली बार जिला न्यायालय पहुंचा। निर्मोही अखाड़े के महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में मस्जिद परिसर में मंदिर बनवाने की अपील की पर कोर्ट ने मांग खारिज कर दी। इसके बाद सालों तक यह मामला चलता रहा है। 1934 फिर दंगे हुए और मस्जिद की दीवार और गुंबदों को नुकसान पहुंचा।

ब्रिटिश सरकार ने दीवार और गुंबदों को फिर से बनवाया। कहा जाता है कि 1949 में मस्जिद में श्रीराम की मूर्ति मिली। इस पर विरोध व्यक्त किया गया और मस्जिद में नमाज पढ़ना बंद कर दिया गया। फिर दोनों पक्षों ने लोग कोर्ट पहुंच गए। इसपर सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर ताला लगवाया दिया।

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