ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News उत्तर प्रदेशRam Mandir: प्लेन से आता है रामलला के खास डिजाइन वाला परिधान, हर दिन के ड्रेस में बदल जाती है फैब्रिक

Ram Mandir: प्लेन से आता है रामलला के खास डिजाइन वाला परिधान, हर दिन के ड्रेस में बदल जाती है फैब्रिक

अयोध्या राम मंदिर में रामलला का परिधान डिजाइनर मनीष त्रिपाठी बना रहे हैं। साथ ही हर दिन सीआईएसएफ की मदद से ये परिधान दिल्ली से अयोध्या भेजा जा रहा है।

Ram Mandir: प्लेन से आता है रामलला के खास डिजाइन वाला परिधान, हर दिन के ड्रेस में बदल जाती है फैब्रिक
Pawan Kumar Sharmaकमलाकान्त सुन्दरम,अयोध्याSun, 25 Feb 2024 07:15 AM
ऐप पर पढ़ें

राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से खास डिजाइनर परिधान श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से बनवाए जा रहे हैं। इसके लिए ड्रेस डिजाइनर मनीष त्रिपाठी को अनुबंधित कर लिया गया है। डिजाइनर त्रिपाठी ने प्राण प्रतिष्ठा के समय अपनी पूरी टीम के साथ यहां रहकर मुख्य पर्व के साथ अगले सात दिनों के लिए रामलला का परिधान तैयार किया था। यह परिधान बनारसी सिल्क के साथ सोने व चांदी की जरी से युक्त बनाया गया था। यह परिधान काफी भारी है इसलिए सामान्य दिनों के लिए थोड़ा हल्के परिधान बनाए जा रहे हैं। यह परिधान प्रतिदिन दिल्ली से यहां भेजा जाता है। इस परिधान को दिल्ली से राम मंदिर तक लाने में सीआईएसएफ की बड़ी भूमिका है। उन्हीं की मदद से प्लेन से यह परिधान भेजा जा रहा है।

हर दिन के परिधान में बदल जाती है फैब्रिक व डिजाइन

रामलला के परिधान लेकर अयोध्या पहुंचे डिजाइनर त्रिपाठी ने 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में बताया कि रामलला के परिधान की जिम्मेदारी मिलना हमारे सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि वह चक्रवर्ती नरेश के पुत्र हैं, तो उनके परिधान में विशिष्टता होनी चाहिए। इसके अलावा देश-विदेश के करोड़ों भक्तों की भावनाएं भी उनसे जुड़ी है, इन सभी बातों का ध्यान रखकर बुनाई से लेकर कढ़ाई तक पर विचार करना सबसे कठिन है। फिर भी रामलला की प्रार्थना कर उनके द्वारा सौंपी गयी जिम्मेदारी को निर्वाह करने का प्रयास कर रहा हूं। वह बताते हैं कि रामलला के लिए हर दिन के अनुसार अलग-अलग रंग के परिधान बनाए जा रहे हैं और हर दिन के परिधान की फैब्रिक व डिजाइन भी अलग-अलग रखा जा रहा है।

रामलला के माध्यम से भारतीय वस्त्र उद्योग को विश्व पटल पर मिलेगी पहचान

डिजाइनर त्रिपाठी का मानना है कि रामलला से बड़ा आइडल दुनिया के लिए दूसरा नहीं हो सकता है इसलिए उनके माध्यम से भारतीय वस्त्र उद्योग को विश्व पटल पर पहुंचाने पर भी विचार चल रहा है। उन्होंने बताया कि एक महीने के मध्य भगवान के लिए बने परिधानों में बनारसी सिल्क का प्रयोग हुआ है। इस समय चंदेरी पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि रामलला के सभी परिधान हथकरघा उद्योग के जरिए ही तैयार किया जा रहा है। इस कार्य में कारीगरों की पूरी टीम है जो कि दो से तीन दिनों में पोशाक का निर्माण करती है। इस परिधान के लिए प्रेस मशीन से लेकर सबकुछ अलग है। उनका कहना है रामलला के परिधानों के निर्माण से भारतीय टेक्सटाइल को भी खासा लाभ होगा और दुनिया को भारत के विभिन्न प्रांतों के टेक्सटाइल के वस्त्रों से भी लोग परिचित होंगे। इससे उनकी मांग भी बाजार में बढ़ेगी। 

प्राण-प्रतिष्ठा से पहले खादी ग्रामोद्योग के परिधान लाए जा रहे थे

राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के पहले से डिजाइनर मनीष त्रिपाठी विराजमान रामलला के लिए परिधान तैयार कर रहे थे। श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ने जब रामलला के पांच वर्ष की आयु के बालक के विग्रह के निर्माण का निर्णय लेकर मूर्तिकारों को जिम्मेदारी दी तो फिर श्री त्रिपाठी यहीं अयोध्या आ गये क्योंकि उन्हें रामलला के परिधान के लिए उनकी सटीक नाप लेनी थी। उन्होंने मूर्तिकारों के द्वारा विग्रह निर्माण के बाद पहले तीनों विग्रहों की अलग-अलग नाप ली और फिर विग्रह चयन की प्रतीक्षा की। रामलला के विग्रह के चयन के बाद दोबारा चयनित विग्रह की नाप कराई गयी। उसके बाद परिधान तैयार किए गए।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें