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अयोध्या भूमि विवादः वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति के दावे के कारण अटका था बैनामा

अयोध्या। हिन्दुस्तान टीमPublished By: Yogesh Yadav
Thu, 17 Jun 2021 08:53 PM
अयोध्या भूमि विवादः वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति के दावे के कारण अटका था बैनामा

रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अनुबंधित की गई जिस सम्पत्ति को लेकर विवाद को तूल दिया जा रहा है, उसमें वक्फ बोर्ड का पेच फंसा था। वास्तविकता यह है कि रामजन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से बाग बिजैसी में 180 बिस्वे का सौदा किया गया था। चूंकि जो भूमि विवाद रहित थी, ट्रस्ट ने उसका बैनामा सीधे कुसुम पाठक पत्नी हरीश पाठक उर्फ हरिदास से 18 मार्च 2021 को आठ करोड़ में ले लिया। इसके विपरीत वक्फ के नाम विवादग्रस्त भूमि को अनुबंधित कराया गया। चूंकि विवादग्रस्त भूमि का अनुबंध पहले से दूसरी पार्टियों के नाम था, इसके कारण ट्रस्ट को उपरोक्त भूमि सीधे नहीं बेची गयी। 

उधर विवादग्रस्त भूमि की वक्फ बोर्ड में पैरवी भी पूर्व अनुबंधित पार्टियां कर रही थीं, लिहाजा रामजन्मभूमि ट्रस्ट के बजाय पूर्व अनुबंधित पक्ष को ही पहले बैनामा किया गया। इस बैनामे के बाद ट्रस्ट ने अनुबंधित पार्टियों से दोबारा साढ़े 18 करोड़ में पंजीकृत अनुबंध किया। इस अनुबंध के लिए पक्षकारों को 17 करोड़ की धनराशि आरटीजीएस की गयी। 

यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड उत्तर प्रदेश के समक्ष चल रहे विवाद का निस्तारण तीन जून 2020 को हुआ। इस फैसले में वादी के आवेदन को निरस्त करते हुए प्रश्नगत भूमि को विवाद से मुक्त कर दिया गया। इसके बाद वक्फ बोर्ड के फैसले के ही आधार पर सदर तहसील में वादी कुसुम पाठक का नाम संक्रमणीय भूमिधर के रुप में नामान्तरण का आदेश 19 अप्रैल 2021 को हो सका। यही कारण था कि भूमि को लेकर पहले वर्ष 2011 में तीन वर्षों का अनुबंध हुआ।

फिर उस अनुबंध का नवीनीकरण वर्ष 2014 में तीन वर्ष के लिए किया गया। पुन: वर्ष 2019 में तीसरी बार अनुबंध का नवीनीकरण कराया गया। श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट से जमीन का अनुबंध करने वाले सुलतान अंसारी ने बताया कि उनके पिता मो. इरफान अंसारी पिछले दस सालों से लगातार जमीन हासिल करने के लिए सम्बन्धित पक्षकारों से अदालती लड़ाई लड़ते रहे और अदालती आदेश के बाद जब जमीन पूरी तरह पाकसाफ हो गयी है तब ट्रस्ट ने जमीन लेने की इच्छा जताई।

बताया गया कि कुसुम पाठक आदि ने महफूज आलम आदि से पहले वर्ष 2011 में अनुबंध किया था। फिर उन्हीं से अंसारी आदि ने अनुबंध कराया। बताया गया कि यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के नाम पर सम्पत्ति क्रय में विपक्षी अड़ंगा डाल रहे थे। फिलहाल कुसुम पाठक आदि ने प्रश्नगत भूमि का बैनामा 2017 में करा लिया था लेकिन यहां भी आपत्ति कर नामान्तरण को स्थगित करा दिया गया। पुन: मामला अप्रैल 2018 में मामला वक्फ बोर्ड के समक्ष पहुंचा। इस प्रकरण की सुनवाई करते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी एसएम शुएब ने अपने तीन जून 2020 के आदेश में आवेदन को निरस्त करते हुए स्पष्ट कर दिया कि सम्बन्धित भूमि वक्त की सम्पत्ति नहीं है।

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