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रामलला की मूर्ति से पहले बना चित्र आया सामने, किसने बनाया? ऐसे हुआ था इस चित्रकार का चयन

अयोध्या के राम मंदिर में स्थापित रामलला की मूर्ति मैसूर के शिल्पी योगीराज ने बनाई थी। क्या आपको पता है किसकी चित्रकारी के आधार पर यह मूर्ति बनी थी। अब वह चित्रकार भी सामने आ गए हैं।

रामलला की मूर्ति से पहले बना चित्र आया सामने, किसने बनाया? ऐसे हुआ था इस चित्रकार का चयन
Yogesh Yadavअभिषेक त्रिपाठी,वाराणसीWed, 24 Jan 2024 05:13 PM
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अयोध्या में प्रभु राम मंदिर में स्थापित रामलला की मूर्ति तो मैसूर के शिल्पी योगीराज ने बनाई थी। लेकिन जिस चित्र के आधार पर योगीराज ने यह मूर्ति बनाई उसके बारे में आपको पता है? जिस तरह रामलला की प्राण प्रतिष्ठा काशी के वेदमूर्तियों ने कराई उसी तरह मूर्ति के लिए स्वरूप की कल्पना भी काशी के ही एक चित्रकार ने की है। इस कलाकार के बनाए चित्र को ही मूर्तिकारों ने विग्रह रूप दिया। इसके बाद अरुण योगीराज ने प्रतिमा बनाई थी। यह चित्रकार काशी विद्यापीठ के ललित कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा हैं। विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद डॉ. विश्वकर्मा ने अपने बनाए चित्र और इसकी कहानी साझा की है।

डॉ. विश्वकर्मा ने बताया कि फरवरी-2023 से इसकी तैयारियां शुरू हुई थीं। देशभर के 82 नामीगिरामी चित्रकारों से पांच वर्ष के रामलला का चित्र मांगा गया था। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट की तरफ से इनमें से अंतिम तीन चित्रों का चुनाव किया गया। डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा के बनाए स्केच के अलावा महाराष्ट्र और पुणे के दो अन्य वरिष्ठ कलाकारों के स्केच शामिल थे। डॉ. विश्वकर्मा ने बताया कि 15 से 20 अप्रैल के बीच उन्हें अन्य दोनों कलाकारों के साथ नई दिल्ली बुलाया गया।

डॉ. विश्वकर्मा के चित्र को चुना गया। इसके लिए राममंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, मंदिर के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी और यतींद्र मिश्र सहित पांच लोगों ने उनसे लंबी बातचीत की और चित्र के पीछे उनके भावों के बारे में पूछा।

चित्र का चयन हो जाने के बाद डॉ. सुनील विश्वकर्मा को तीन मूर्तिकारों कर्नाटक के अरुण योगीराज, गणेश भट्ट और जयपुर के सत्यनारायण पांडेय के साथ बिठाया गया। चारों कलाकारों के बीच विग्रह के भाव, परिमाप व अन्य बिंदुओं पर लंबी चर्चा हुई। मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया इसके बाद शुरू की गई।

रामलला के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में सोमवार को मूर्तिकार अरुण योगीराज, गणेश भट्ट और सत्यनारायण पांडेय के साथ चित्रकार डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा (बाएं) भी मौजूद रहे। (ऊपर तस्वीर )

लगा कि तपस्या सार्थक हो गई
चित्र पर बने विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा पर डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि यह तपस्या के सार्थक हो जाने जैसा है। उन्होंने कहा कि देश के 82 चित्रकारों में चुने जाने पर ही वह खुद को धन्य मान रहे थे कि रामलला के काम में उनकी कला आएगी। अंतिम तीन में चुना जाना अलग ही अनुभव था क्योंकि बाकी दोनों कलाकार उनसे काफी वरिष्ठ और गुरुतुल्य हैं। इसके बाद इस चित्र का विग्रह के लिए चुनाव होने पर कई दिनों तक भरोसा ही नहीं हुआ।

चेहरे पर साथ दिखानी थी बालसुलभता और नेतृत्व
वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। भगवान राम जन-जन के आराध्य हैं। रामायण सहित कई पौराणिक ग्रंथों में भगवान राम की देहयष्टि की जानकारी तो है मगर राजीवलोचन प्रभु के चेहरे के बारे में कम ही बातें हैं। ऐसे में चित्र बनाने से पहले मनन और मंथन काफी हुआ। चित्रकार डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा बताते हैं कि पांच वर्ष की अवस्था के प्रभु की तस्वीर बनानी थी। चेहरे पर बालसुलभता के साथ नेतृत्व भी दिखाना था।

मंदिर न्यास के महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी ने चित्र को लेकर कई निर्देश दिए थे। अंतिम चुनाव के बाद भी चित्र में कुछ बदलाव करने पड़े। डॉ. विश्वकर्मा बताते हैं कि चित्र में सबसे अहम था चेहरे के भाव प्रदर्शित करना। मंदिर पदाधिकारियों ने कहा था कि भगवान राम में हमेशा सत्य, करुणा, समरसता और शुचिता का भाव रहा है। एक चित्रकार के रूप में डॉ. विश्वकर्मा ने पांच वर्ष के बालक के बचपन के साथ ही प्रभु राम का देवत्व भी इसी तस्वीर में समेटना था। उन्होंने बताया कि इसके लिए गहन मंथन और ग्रंथों का अध्ययन किया।

इसके बाद यह तस्वीर निकलकर सामने आई। अंतिम तीन में चुने जाने के बाद तस्वीर में कुछ बदलाव किए गए। भगवान राम ‘आजानुबाहु’ यानी घुटनों तक लंबे हाथ वाले हैं। पहली तस्वीर में हाथ कुछ छोटे हो गए थे। यह बदलाव करने के बाद चित्र में रामलला के कंधे से तरकश और जनेऊ भी हटवाए गए। हाथ अभय मुद्रा में होंगे या सीधे, यह निर्णय बाद के लिए छोड़ा गया। अंतत: तैयार हुए विग्रह में हाथ में धनुष और बाण ही रखे गए हैं। डॉ. विश्वकर्मा ने बताया कि चित्र के चेहरे, कंधे, ग्रीवा, पैर और पांव के नीचे बने कमल को अंत तक यथावत रखा गया।

डॉ. विश्वकर्मा बताते हैं कि अप्रैल में चित्र के अंतिम चुनाव के बाद उन्हें खुशी तो थी मगर साथ ही बेचैनी भी रहती थी। बताया कि विग्रह के स्वरूप, सुंदरता और चेहरे के भावों को लेकर मन में हमेशा विचार आते थे। हाल यह था कि 20 जनवरी को विग्रह के चित्र वायरल होने के बाद उन्होंने भी देखा। इसके बाद उन्हें चैन की नींद आई।

गोपनीयता ऐसी कि पत्नी से भी छिपाकर रखा चित्र
अप्रैल-2023 में ही रामलला का चित्र अंतिम रूप से चुन लिए जाने के बाद भी डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा इसे टॉप सीक्रेट बनाए रहे। उन्होंने विद्यापीठ के अपने सहकर्मियों, राज्य ललितकला एकेडमी के साथी कलाकारों और मित्रों को भी इस बारे में कुछ नहीं बताया। यहां तक कि पत्नी से भी इस बात को छिपाकर रखा। वह कहते हैं कि इसके लिए मंदिर की तरफ से स्पष्ट निर्देश मिले थे।

रामलला के चित्र के चुने जाने के बाद मंदिर के पदाधिकारियों ने उन्हें लाइमलाइट से दूर रहने को कहा था। उन्हें कहा गया था कि यह ईश्वर का काम है और इसमें विघ्न न पड़े इसलिए जरूरी है कि इस सूचना को अभी सामने न आने दिया जाए। डॉ. विश्वकर्मा ने बताया कि भगवान राम के इस काम में सचमुच विघ्न न आए इसलिए उन्होंने इस सूचना को परिवार में भी किसी से साझा नहीं किया।

यहां तक कि सेंट्रल हिंदू ब्वॉयज स्कूल में शिक्षण करने वाली पत्नी सोनी कुमारी भी अंत तक इससे अनजान रहीं। बेटी लक्ष्यिता भी चित्रों के आसपास रहती है मगर वह भी नहीं जान पाई। हालांकि सोमवार को प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह जानकारी पाकर वह खुशी से झूम उठीं। डॉ. विश्वकर्मा ने बताया कि परिवार में मां, भाई और अन्य बड़े-बुजुर्गों ने भी इसे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य करार दिया।

चित्र में इन बातों का रखना था ध्यान (मंदिर से मिले निर्देशों के अनुसार)

- प्रतिमा की ऊंचाई पैर से ललाट तक 51 इंच होगी
- भगवान का स्वरूप 5 वर्ष आयु वाले बालक जैसा होगा
- भुजाएं घुटनों तक होंगी अर्थात आजानुबाहु प्रतिमा हो
- प्रतिमा की आंखें, शरीर का अनुपात बालक जैसा हो
- प्रतिमा दोनों पैरों पर समान रूप से खड़ी हो
- पैरों में खड़ाऊ नहीं होनी चाहिए
- हाथ आशीर्वाद मुद्रा में नहीं चाहिए
- हाथ में तीर और धनुष अलग से लगाए जाएंगे, पत्थर के नहीं बनाने हैं
- कंधे पर तरकश नहीं चाहिए
- प्रतिमा का नित्य शृंगार होगा, अतः उसी अनुरूप सिर पर बाल रहें
- मस्तक पर मुकुट भी अलग से लगेगा
- प्रतिमा को स्थायित्व देने के लिए पीछे आधार चाहिए

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