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आंवला लोकसभा सीट समीकरण: साइकिल पकड़ेगी रफ्तार या फिर खिलेगा कमल?

यूपी की 80 सीटों में से एक आंवला लोकसभा सीट भी बहुत खास है। बरेली जिले में आनी वाली इस लोकसभा सीट पर इंदिरा गांधी की बहू मेनका गांधी भी दांव आजमा चुकी हैं। वर्तमान में ये सीट भाजपा के कब्जे में है।

आंवला लोकसभा सीट समीकरण: साइकिल पकड़ेगी रफ्तार या फिर खिलेगा कमल?
Dinesh Rathourलाइव हिंदुस्तान,बरेली। आंवलाSat, 20 Apr 2024 06:14 PM
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Lok Sabha Seat Equation: यूपी की 80 सीटों में से एक आंवला लोकसभा सीट भी बहुत खास है। आंवला में अब तक 15 बार लोकसभा चुनाव हो चुका है। पहली बार इस सीट से हिंदू महासभा जीती थी। इसके बाद कांग्रेस, जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, जदयू और भाजपा ने भी परचम फहराया। कांग्रेस, जनता पार्टी और सपा ने इस सीट से दो-दो बार जीत हासिल की जबकि भाजपा यहां तीन बार कमल खिला चुकी है। एक बार जदयू को भी इस सीट पर जीत हासिल हुई है। बरेली जिले में आनी वाली इस लोकसभा सीट पर इंदिरा गांधी की बहू मेनका गांधी भी दांव आजमा चुकी हैं। वर्तमान में ये सीट भाजपा के कब्जे में है। भाजपा ने एक बार फिर सांसद धर्मेन्द्र कश्यप को उम्मीदवार बनाया है जबकि समाजवादी पार्टी ने नीरज मौर्य को प्रत्याशी घोषित किया है। नीरज आंवला लोकसभा क्षेत्र के प्रभारी हैं।

नीरज मौर्य शाहजहांपुर के जलालाबाद विधानसभा सीट पर बसपा से दो बार विधायक रह चुके हैं। इस सीट पर बसपा ने सत्यवीर पर दांव लगाया है। जातीय समीकरण की बात करें तो इस सीट पर मुस्लिम, यादव, कश्यप, मौर्य और ठाकुर उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करते हैं। यहां मुस्लिम वोटर करीब साढ़े पांच लाख, मौर्य और कश्यप ढाई-ढाई लाख और यादव वोटर करीब दो लाख हैं। क्षेत्रीय जानकारों की मानें तो इस बार भाजपा उम्मीदवार को सपा प्रत्याशी से कड़ी टक्कर मिल सकती है। मौर्य और कश्यप वोटरों पर नजर डालें तो दोनों प्रत्याशियों का पलड़ा भारी नजर आ रहा है, लेकिन इस बार संसद तक कौन पहुंचेगा ये तो मुस्लिम और यादव वोटर ही तय करेंगे। 

पहली बार लड़ेंगे लोकसभा चुनाव

शाहजहांपुर निवासी नीरज मौर्य 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में जलालाबाद सीट पर बसपा से विधायक बने थे। 2007 में उन्होंने सपा के राममूर्ति वर्मा और 2012 के चुनाव में सपा के ही शरदवीर सिंह को हराया था। हालांकि इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के शरदवीर सिंह से पराजित हो गए। 2022 के विधानसभा चुनाव में नीरज मौर्य भाजपा के हरि प्रकाश से करीब चार हजार वोट से मात खा गए। अब सपा ने लोकसभा चुनाव में भी नीरज पर भरोसा जताया है। नीरज मौर्य अक्टूबर 2017 में स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ बसपा को छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। इसके करीब चार साल बाद 14 जनवरी 2022 से नीरज भाजपा को छोड़कर सपा के साथ हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी पास नीरज मौर्य दलित और पिछड़ों की राजनीति को लेकर एक किताब भी लिख चुके हैं।

किसने कब लड़ा इस सीट पर चुनाव

आंवला लोकसभा सीट पर 1962 में पहला चुनाव हुआ था। उस समय हिंदू महासभा के बृजराज सिंह ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1967 और 1971 में कांग्रेस की सावित्री श्याम चुनाव जीतकर संसद पहुंची। 1977 में जनता पार्टी में शामिल हुए बृजराज सिंह ने फिर जीत दर्ज की। 1980 के इलेक्शन में जनता पार्टी (सेक्यूलर) ने जयपाल सिंह कश्यप पर दांव लगाया। 1984 में कांग्रेस कल्याण सिंह सोलंकी चुनाव जीतकर सांसद बने। 1989 और 1991 में हुए चुनाव के दौरान भाजपा के राजवीर सिंह जीत दर्ज कराकर ससंद पहुंचे। 1996 में एक बार फिर चुनाव हुए। इस बार सपा ने अपना खाता खोला। सपा के सर्वराज सिंह चुनाव जीते। 1998 में फिर भाजपा ने जीत दर्ज की और राजवीर सिंह पुन: सांसद चुने गए। 1999 से लेकर 2004 तक इस सीट पर सपा का कब्जा रहा। उस समय सपा और जदयू का गठबंधन था। 2009 में इस सीट से मेनका गांधी ने चुनाव जीता और कमल खिलाया। 2014 से 2019 तक भाजपा के धर्मेंद्र कश्यप लगातार चुनाव जीतते चले आ रहे हैं। 

2019 का चुनाव परिणाम

2019 में आंवला लोकसभा सीट से भाजपा के धर्मेन्द्र कश्यप चुनाव जीते थे। धर्मेंद्र कश्यप को 2019 में 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। धर्मेंद्र कश्यप ने 537675 वोट हासिल करके बसपा की रुचि वीरा को हराया था। रुचि वीरा को उस समय 423932 वोट हासिल हुए थे। 

2014 का चुनाव परिणाम

2009 में सपा की टिकट से चुनाव लड़े धर्मेंद्र कश्यप ने 2014 में भाजपा उम्मीदवार तौर पर चुनाव लड़ा। मोदी लहर में धर्मेंद्र कश्यप भारी मतों से चुनाव जीते गए। धमेंद्र कश्यप को उस समय 409,907 वोट मिले थे जबकि दूसरे नंबर पर रहे सपा के कुंवर सर्वराज सिंह को 271,478 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा था। तीसरे नंबर की पार्टी बसपा थी। बसपा ने सुनीता शाक्य पर दांव लगाया था। इन्हें 190200 वोट हासिल हुए थे। 

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