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दरगाह आला हजरत से ऐलानः शादी में बैंड-बाजा, डीजे या आतिशबाजी हुई तो निकाह न पढ़ाएं मौलवी-काजी

बरेली कार्यालय संवाददाताPublished By: Yogesh Yadav
Thu, 04 Mar 2021 05:16 PM
दरगाह आला हजरत से ऐलानः शादी में बैंड-बाजा, डीजे या आतिशबाजी हुई तो निकाह न पढ़ाएं मौलवी-काजी

सुन्नी बरेलवी मसलक की सबसे बड़ी दरगाह में से एक आला हजरत से मुस्लिम शादियों में बैंड-बाजा, डीजे और आतिशबाजी को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी उर्फ अहसन मियां ने देश के तमाम सुन्नी बरेलवी मसलक से जुड़े मौलवी, काजी से कहा कि जिस शादी में बैंड-बाजा, डीजे व आतिशबाजी हो वहां निकाह न पढ़ाएं। गुजरात की आयशा का जिक्र करते हुए उलेमा से अपील की गई है।

अहसन मियां ने कहा कि मजहब-ए-इस्लाम में सामाजिक बुराईयां बढ़ रही हैं, जैसे शादियों में बैंड-बाजा, ढोल-ताशा, डीजे, आतिशबाजी, नाच- गाना, दहेज की मांग व फिजुलखर्ची जैसी रिवाज आम हो रहा है। देश भर के सभी काजी व मौलवियों से अपील की है कि जिन शादियों में बैंड-बाजा, डीजे व आतिशबाजी हो उनके निकाह हरगिज न पढ़ाएं। देखा जा रहा है कि शादी के नाम पर गैर शरई कामों को अंजाम दिया जा रहा है।

लड़की वालों से दहेज की मांग की जा रही है। जिसको किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता। दहेज की नुमाइश पर भी रोक लगाने को कहा गया है। सज्जादानशीन ने कहा कि दहेज की मांग जैसी बुराई का उदाहरण हाल ही में गुजरात की आयशा के साथ हुआ हादसा है। दहेज की बिना पर गरीब लड़कियां घरों में बैठी है। अल्लाह के रसूल ने निकाह को आसान करने का हुक्म दिया। डीजे, ढोल-बाजे और आतिशबाजी इस्लाम में नाजायज और हराम है।

दरगाह आला हजरत के मीडिया प्रभारी नासिर क़ुरैशी ने बताया कि सज्जादानशीन की अपील को सोशल मीडिया के जरिए देश भर के उलेमा को भेजा जा रहा है। इस मसले पर काजी और मौलवियों की एक बैठक दरगाह पर बुलाई जाएगी, जिसमें अपील की जाएगी। उलेमा, काजी और मौलवी देश भर में सज्जादानशीन का पैगाम उर्स की महफिल, जलसों व जुमे की नमाज में आम लोगों तक पहुंचाएं।

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