ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News उत्तर प्रदेशसमीक्षा में फूट रहा गुस्सा और गुबार, बीजेपी की 40 टीमें खंगाल रहीं यूपी में हार के कारण

समीक्षा में फूट रहा गुस्सा और गुबार, बीजेपी की 40 टीमें खंगाल रहीं यूपी में हार के कारण

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की हार की समीक्षा में गुस्सा और गुबार फूट रहा। पार्टी की एसटीएफ की 40 टीमें 80 लोकसभा क्षेत्रों में जांच में जुटी हैं। ठीकरा एकदूसरे के सिर फोड़ा जा रहा है।

समीक्षा में फूट रहा गुस्सा और गुबार, बीजेपी की 40 टीमें खंगाल रहीं यूपी में हार के कारण
Deep Pandeyराजकुमार शर्मा,लखनऊThu, 20 Jun 2024 06:15 AM
ऐप पर पढ़ें

विपक्ष ने क्या नेरेटिव फैलाया। जातियों के विभाजन का आधार क्या और क्यों रहा। विपक्षी प्रत्याशी को हमारा वोट मिलने का क्या कारण रहा। सरकार के फैसलों से लाभ-हानि। प्रत्याशी के प्रति मतदाताओं और कार्यकर्ताओं की उदासीनता की स्थिति। हमारी रणनीति में कहां चूक रही। आपसी समन्वय एवं टीम की एकजुटता की स्थिति। 2022 की तुलना में हमारा जातियों का आधार पुन: कमजोर होने का कारण, वर्ग समीकरणों में इतना बंटवारा क्यों? यह वो तमाम सवाल हैं जो भाजपा की एसटीएफ के सदस्य प्रदेश के 80 लोकसभा क्षेत्रों में पूछ रहे हैं।

यूपी में मनचाहे नतीजे न मिलने से भाजपा में बेचैनी है। करीब साढ़े आठ फीसदी वोटों की चोरी के कारण तलाशे जा रहे हैं। साथ में घर के भेदियों की भी खोज हो रही है। ताकि हार के लिए जिम्मेदारी तय की जा सके। पार्टी की एसटीएफ की 40 टीमें 80 लोकसभा क्षेत्रों में जांच में जुटी हैं। हार की समीक्षा में कार्यकर्ताओं का गुस्सा और गुबार फूट रहा है। ठीकरा एकदूसरे के सिर फोड़ा जा रहा है। एक ओर प्रत्याशी हार के लिए पार्टी विधायकों या स्थानीय संगठन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। तो दूसरी ओर टास्क फोर्स की टीमों के सामने कार्यकर्ताओं का गुबार फूट रहा है। शायद इस कवायद के पीछे पार्टी की मंशा भी यही है। असल में पार्टी 2027 के बड़े लक्ष्य को साधने के लिए अपनी छोटी इकाइयों को साधने में जुट गई है।

रिपीट सांसदों ने चुनाव में भी की कार्यकर्ताओं की उपेक्षा
दरअसल लोकसभा चुनाव में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिस तरह खामोशी की चादर ओढ़ी, उससे भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ। सीटें 62 से घटकर 33 रह गईं और वोट शेयर 49.98 फीसदी से गिरकर 41.37 प्रतिशत पर आ गया। पार्टी में इससे बेचैनी है। यही कारण है कि समीक्षा खासतौर से पार्टी के संगठनात्मक मंडल स्तरीय इकाई को शामिल किया गया है। टास्क फोर्स की टीमों को निर्देश हैं कि मंडल अध्यक्षों और पदाधिकारियों की बात जरूर सुनी जाए। अब जांच टीम जब मंडल अध्यक्षों से बात कर रही हैं, तो उनके भीतर की नाराजगी बाहर आ रही है। सब अपने-अपने हिसाब से हार के कारण बता रहे हैं। इसमें चुनाव पूर्व सर्वे में खारिज चेहरों को भी फिर से टिकट दिए जाने की बात शामिल है। समीक्षा में सामने आ रहा है कि टिकट पाकर मोदी लहर पर सवार प्रत्याशियों खासकर रिपीट किए गए सांसदों ने चुनाव में भी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की।
मोदी-योगी से नहीं कोई नाराजगी
अधिकांश जगह कार्यकर्ताओं ने कहा कि मोदी या योगी से कोई नाराजगी नहीं है। मगर जनप्रतिनिधियों को लेकर गुस्सा है। इसके अलावा कार्यकर्ताओं की सुनवाई न होने की बात भी कही गई है। थाने-चौकियों, तहसील में सुनी नहीं जाती। सूत्रों की मानें तो कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि सांसद-विधायकों के अपने काम तो नहीं रुकते, मगर कार्यकर्ता का कोई काम नहीं हो पाता। अग्निवीर को लेकर भी कई जगह युवाओं की नाराजगी की बात सामने आई है। जातीय बिखराव पर कहा कि विपक्षी गठबंधन संविधान और आरक्षण खत्म किए जाने का नेरेटिव सेट करने में सफल रहा। जो दलित भाजपा या बसपा को वोट देते थे, वो सपा और कांग्रेस प्रत्याशियों को चले गए।