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आनंद गिरि की जमानत पर फैसला सुरक्षित, नौ सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट सुनाएगी निर्णय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या के मामले में आरोपी आनंद गिरि की जमानत अर्जी पर बुधवार को सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित कर लिया।

आनंद गिरि की जमानत पर फैसला सुरक्षित, नौ सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट सुनाएगी निर्णय
Srishti Kunjहिन्दुस्तान,प्रयागराजThu, 08 Sep 2022 08:21 AM
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या के मामले में आरोपी आनंद गिरि की जमानत अर्जी पर बुधवार को सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित कर लिया। कोर्ट नौ सितंबर को अपना फैसला सुनाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने बुधवार को लगभग दो घंटे तक चली सुनवाई के बाद दिया है। इससे पूर्व गत दो सितंबर को सीबीआई की ओर से पेश हो रहे वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश के हट जाने के कारण अर्जी पर सुनवाई नहीं हो सकी थी।

याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी व इमरान उल्लाह का कहना था कि याची व महंत नरेंद्र गिरि में मनमुटाव हुआ था, जिसे लेकर विवाद हुआ। उसके बाद मार्च 2021 में आनंद गिरि हरिद्वार चले गए थे और बाघंबरी मठ से संबंध तोड़ लिया था। मई 2021 में इंदु मिश्र ने लखनऊ में गुरु व शिष्य के बीच समझौता कराया। उसके बाद याची ने कभी नरेंद्र गिरि से संपर्क नहीं किया और न ही नरेंद्र गिरि ने उन्हें फोन किया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र गिरि की मौत से पहले छह महीने तक याची का किसी प्रकार से कोई संबंध नहीं था। केवल अफवाह के आधार पर याची को आत्महत्या से जोड़ा गया है। नरेंद्र गिरि ने भी सुनी हुई बातों को लेकर मृत्यु पूर्व सुसाइड नोट लिखा है। किसने उन्हें बताया कि याची उन्हें वीडियो वायरल कर बदनाम कर देगा। नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में उसके नाम का जिक्र नहीं किया।

दूसरी तरफ आद्या प्रसाद की नरेंद्र गिरि से काफी कहासुनी हुई थी। कठोर अपशब्द कहे थे। सीबीआई याची के खिलाफ आरोपों की पुष्टि के सबूत जुटाने में नाकामयाब रही है। याची को सुसाइड नोट के आधार पर सहारनपुर से गिरफ्तार कर प्रयागराज लाया गया। नरेंद्र गिरि की आत्महत्या से याची को कोई लाभ की संभावना नहीं थी। क्योंकि नरेंद्र गिरि ने याची को मठ से निकाल दिया था और सतुआ बाबा से बात की तथा हरिद्वार जाने को कहा था और आत्महत्या कर ली। बाघंबरी गद्दी में 16 सीसीटीवी कैमरे लगे थे। नरेंद्र गिरि ने एक सप्ताह पहले डाटा खत्म करा दिया था। वह क्या छिपाना चाहते थे। फार्मेट से डिलीट डाटा क्लाउड में रहता है और सीबीआई ने इसे देखने की जरूरत नहीं समझी।

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शिकायतकर्ता के वकील नीरज तिवारी ने जमानत अर्जी का समर्थन करते हुए कहा उन्होंने केवल पुलिस को सूचना दी थी। शिकायत नहीं की। शासकीय अधिवक्ता शिवकुमार पाल ने कहा कि याची के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। बयानों व सुसाइड नोट से आत्महत्या के लिए विवश करने के आरोप के साक्ष्य हैं। ट्रायल कोर्ट अदालत आरोप तय करने के स्तर पर सुनवाई कर रही है, 19 सितंबर की तारीख लगी है। सीबीआई के अधिवक्ता अनुराग कुमार सिंह ने कहा कि दो लोगों की बातचीत का आडियो बंधवा हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी संदीप तिवारी के कहने पर पुरुषोत्तम मिश्र ने रिकॉर्ड किया। जिसे हरिद्वार में महंत रवींद्र पुरी को याची ने भेजा। 

वह नरेंद्र गिरि तक पहुंचा, जिससे वह तनाव में आ गए। इसीलिए उन्होंने लिखा कि जब तक सच्चाई पता चलेगी, मैं बदनाम हो चुका हूंगा। मैं आत्महत्या कर रहा हूं। सुसाइड नोट की लिखावट महंत की लिखावट से मिलती है। संदीप तिवारी ने रवींद्र पुरी को आडियो भेजा। चरित्र हनन की कोशिश की गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों द्वारा अधूरे दस्तावेज दाखिल करने पर नाराजगी जताई और सीबीआई के विवेचना अधिकारी केएस नेगी से सवाल भी पूछे। सीबीआई का कहना था आडियो से नरेंद्र गिरि को आत्महत्या के लिए उकसाया गया।

मामले के तथ्यों के अनुसार महंत नरेंद्र गिरि ने 20 सितंबर 2021 को बाघम्बरी मठ स्थित अपने कक्ष में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। सुसाइड नोट में आरोप था कि उनके शिष्य आनंद गिरि काफी समय से एक वीडियो सार्वजनिक कर नरेंद्र गिरि को बदनाम करने की धमकी दे रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने प्रकरण की जांच सीबीआई के हवाले कर दी थी। सीबीआई ने 22 सितंबर 2021 को आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही जांच के बाद आनंद गिरि के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। 

गौरतलब है कि एफआईआर कराने वाले अमर गिरि ने पिछले दिनों हलफनामा दाखिल कर अपनी शिकायत वापस लेने की गुहार लगाई थी। अमर गिरि का कहना था कि उन्होंने पुलिस को सिर्फ मौखिक सूचना दी थी, जिसमें किसी का नाम नहीं लिया था। पुलिस ने अपनी तरफ से आनंद गिरि का नाम जोड़ दिया था।

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