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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशअखिलेश-ओमप्रकाश राजभर में गठबंधनः पूर्वांचल की कई सीटों पर बदल सकता है समीकरण

अखिलेश-ओमप्रकाश राजभर में गठबंधनः पूर्वांचल की कई सीटों पर बदल सकता है समीकरण

वाराणसी लाइव हिन्दुस्तानYogesh Yadav
Wed, 20 Oct 2021 04:16 PM
अखिलेश-ओमप्रकाश राजभर में गठबंधनः पूर्वांचल की कई सीटों पर बदल सकता है समीकरण

यूपी में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी का ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा से गठबंधन हो गया है। सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच बुधवार को हुई मुलाकात के बाद दोनों ही पार्टियों की तरफ से इस बात के संकेत दे दिये गए। माना जा रहा है कि सीटों पर बातचीत फाइनल होते ही गठबंधन की औपचारिक घोषणा भी कर दी जाएगी। 

दोनों पार्टियों के मिलकर लड़ने का बड़ा असर पूर्वांचल की सीटों पर देखने को मिल सकता है। यहां दो दर्जन से ज्यादा सीटों का समीकरण बदल सकता है। ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा लगभग दो दशक से चुनावी मैदान में उतर रही है। हमेशा ही राजभर ने छोटे दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। इसके कारण कभी किसी सीट पर जीत नहीं मिली। पिछले चुनाव में ओमप्रकाश ने भाजपा के साथ गठबंधन किया और पूर्वांचल की आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इनमें चार सीटों पर सुभासपा ने जीत भी हासिल की थी। अन्य चार सीटों पर भी कड़ा मुकाबला किया था।  

यूपी के पिछड़े खासकर राजभर समाज में अच्छा खासा प्रभाव रखने वाले ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पार्टी का गठन 27 अक्टूबर 2002 को किया था। 15 साल बाद पहली बार पार्टी ने 2017 के चुनाव में कोई सीट जीती थी। ओमप्रकाश राजभर की मानें तो 100 सीटों पर राजभर समाज के वोट हार जीत तय करने की क्षमता रखते हैं। इनमें वाराणसी की पांच, आजमगढ़ की 10, जौनपुर की 9, बलिया की 7, देवरिया की 7 और मऊ की चार सीटों पर राजभर वोटरों की अच्छी तादाद है। राजभर की मानें तो यूपी की 66 सीटों पर 40 से 80 हजार और 56 सीटों पर 25 से 39 हजार तक राजभर वोट हैं।  

कांशीराम के साथ राजनीति की शुरुआत 

राजभर ने 1981 में कांशीराम के साथ राजनीति शुरू की। 2001 में बहुजन समाज पार्टी में मायावती से विवाद हो गया। इसके बाद ओमप्रकाश ने अपनी पार्टी बनाई। 2004 से चुनाव लड़ रही भासपा ने यूपी और बिहार के चुनाव में अपने प्रत्याशी खड़े करते रहे। कभी एकता मंच तो कभी मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ा। ओमप्रकाश की गिनती जीतने से ज़्यादा खेल बिगाड़ने वालों में होती रही। 2017 में भाजपा के साथ गठबंधन ने इन्हें जीत का स्वाद दिया और योगी कैबिनेट में मंत्री भी बने। बाद में योगी से मतभेदों के कारण मंत्री पद से बर्खास्त कर दिये गए। 

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