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दूसरे धर्म में शादी करने वालों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से झटका, सात दिन में आठ याचिकाएं खारिज, यह है वजह

अंतर धार्मिक विवाह करने वाले आठ जोड़ों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। परिजनों से सुरक्षा की गुहार लगाने वाली याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं। कोर्ट ने नए कानून को इसका कारण बताया है।

दूसरे धर्म में शादी करने वालों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से झटका, सात दिन में आठ याचिकाएं खारिज, यह है वजह
Yogesh Yadavविधि संवाददाता,प्रयागराजMon, 29 Jan 2024 09:57 PM
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतर धार्मिक विवाह के बाद सुरक्षा की मांग में दाखिल याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने कहा कि इन विवाहों में यूपी के धर्मांतरण विरोधी कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है। 2021 का धर्मांतरण विरोधी कानून गलत बयानी, बल, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती और प्रलोभन द्वारा एक से दूसरे धर्म में गैरकानूनी रूपांतरण पर रोक लगाता है। अपने आदेश में न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने कहा कि ये अंतरधार्मिक विवाह के मामले थे लेकिन ये विवाह स्वयं कानून के अनुरूप नहीं थे क्योंकि धर्मांतरण विरोधी कानून का पालन नहीं किया गया था।

याचिकाओं के माध्यम से याचियों ने अपनी सुरक्षा और अपने वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप न करने की मांग की गई थी। कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने 10 से 16 जनवरी 2024 के बीच अलग-अलग तारीखों पर ये याचिकाएं खारिज कर दीं। इन  आठ मामलों में, पांच मुस्लिम युवकों ने हिंदू लड़कियों से शादी की थी और तीन हिंदू युवकों ने मुस्लिम लड़कियों से शादी की थी।

कोर्ट ने याचियों की मांग नामंजूर करते हुए कहा कि तथ्यों को ध्यान में रखते हुए याचियों द्वारा मांगी गई राहत नहीं दी जा सकती। नतीजतन याचिकाएं खारिज की जाती हैं। कोर्ट ने याचियों को इस बात की छूट दी है कि यदि वे कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद विवाह करते हैं तो वे नई याचिकाएं कर सकते हैं।

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