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Hindi News उत्तर प्रदेशअपराध का संज्ञान लेते समय जज नहीं बढ़ा सकते धाराएं, लोवर कोर्ट पर बोला हाईकोर्ट

अपराध का संज्ञान लेते समय जज नहीं बढ़ा सकते धाराएं, लोवर कोर्ट पर बोला हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अपराध का संज्ञान लेते समय जज धाराएं नहीं बढ़ा सकते हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष न्यायालय मथुरा के आदेश को भी रद्द कर दिया।

अपराध का संज्ञान लेते समय जज नहीं बढ़ा सकते धाराएं, लोवर कोर्ट पर बोला हाईकोर्ट
Yogesh Yadavविधि संवाददाता,प्रयागराजFri, 31 May 2024 10:47 PM
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अपराध का संज्ञान लेते समय जज धाराएं नहीं बढ़ा सकते हैं। कोर्ट ने विशेष न्यायालय मथुरा के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उन्होंने अपराध के संज्ञान के दौरान हत्या का प्रयास और गंभीर चोट पहुंचाने की धाराएं बढ़ा दी थीं। न्यायमूर्ति मनोज बजाज की पीठ ने उषा, राजकुमार व लक्खी सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याची के अधिवक्ता आशुतोष शर्मा ने पक्ष रखा।

मामले में मथुरा निवासी उषा, राजकुमार व लक्खी सिंह व अन्य पर एससीएसटी एक्ट, मारपीट सहित अन्य धाराओं में 24 अक्तूबर 2022 को मुकदमा दर्ज कराया गया था। विशेष न्यायालय मथुरा के समक्ष शिकायतकर्ता ने आवेदन देकर धारा 325 और 307 बढ़ाने के लिए प्रार्थना की। इस पर विशेष न्यायालय ने 17 अगस्त 2023 के आदेश से अनुमति दे दी। इसके विरोध में याची ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अपराध का संज्ञान लेते समय जज धाराएं नहीं बढ़ा सकता। इसी के साथ आंशिक रूप से याचिका स्वीकार करते हुए विशेष न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने के दौरान अभियोजन पक्ष के साथ-साथ अभियुक्त को भी विशेष न्यायालय के समक्ष अपने-अपने दावे रखने की स्वतंत्रता होगी।