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समझौते के आधार पर खत्म हो सकता है रेप का मुकदमा, हाईकोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि रेप के अपराध में यदि अभियुक्त के विरुद्ध रिकॉर्ड पर कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है तो इसे समझौते के आधार पर समाप्त किया जा सकता है।

समझौते के आधार पर खत्म हो सकता है रेप का मुकदमा, हाईकोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण आदेश
Dinesh Rathourविधि संवाददाता,प्रयागराज।Tue, 13 Jun 2023 10:51 PM
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि रेप के अपराध में यदि अभियुक्त के विरुद्ध रिकॉर्ड पर कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है और पीड़िता ने भी अपने बयान में किसी प्रकार का आरोप नहीं लगाया है तो आईपीसी की धारा 376 के तहत दर्ज मुकदमा समझौते के आधार पर समाप्त किया जा सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने बरेली के फखरे आलम की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि सामान्यतया हाईकोर्ट को यौन अपराधों के मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए लेकिन विशेष परिस्थिति में सीआरपीसी की धारा 482 के तहत प्राप्त शक्तियों के तहत अपराध की गंभीरता, यौन हमले के प्रभाव, समाज पर पड़ने वाले उसके प्रभाव, अभियुक्त के विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य आदि पर सदभावनापूर्वक तरीके से विचार किया जा सकता है।

याची के खिलाफ बरेली के बारादरी थाने में रेप और पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है, जिसमें पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और उसके बाद सक्षम अदालत ने उस पर संज्ञान लेकर अभियुक्त को वारंट जारी कर दिया। याची ने याचिका दाखिल कर चार्जशीट और सेशन कोर्ट से जारी वारंट को चुनौती दी। याची की ओर से कहा गया कि अभियुक्त के विरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं है। पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने बयान में कहा है कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी और अपनी इच्छा से उसके साथ शादी की है। दोनों पति-पत्नी के रूप में रह रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है। पीड़िता की आयु 18 वर्ष से अधिक है। स्पेशल जज पोक्सो एक्ट ने समझौते की पुष्टि की। 

कोर्ट के समक्ष प्रश्न था कि पोस्को एक्ट और आईपीसी की धारा 376 के तहत दर्ज मुकदमा समझौते के आधार पर समाप्त किया जा सकता है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि पोक्सो एक्ट में यह स्पष्ट है कि पीड़िता की आयु 18 वर्ष से कम होनी चाहिए। इस मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड से पता चलता है कि पीड़िता 18 वर्ष से अधिक की है इसलिए पॉक्सो एक्ट का कोई मामला नहीं बनता है। इसके अलावा पीड़िता ने अपने बयान में यह भी कहा है कि आरोपी ने कोई यौन अपराध नहीं किया है और शादी के बाद दोनों पति पत्नी के रूप में रह रहे हैं। उसकी मां ने पांच लाख रुपये लेने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। मेडिकल परीक्षण में पीड़िता के शरीर पर कोई चोट नहीं पाई गई है और रिकॉर्ड में याची के विरुद्ध कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। पुलिस ने इस तथ्य पर गौर किए बिना रूटीन तरीके से चार्जशीट दाखिल कर दी। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए याची के विरुद्ध दर्ज मामले को रद्द कर दिया।
 

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