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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशखतौली का प्रयोग अखिलेश योगी के खिलाफ करेंगे उपयोग! पश्चिमी यूपी में BJP को काटने का जयंत फॉर्मूला सफल रहा?

खतौली का प्रयोग अखिलेश योगी के खिलाफ करेंगे उपयोग! पश्चिमी यूपी में BJP को काटने का जयंत फॉर्मूला सफल रहा?

खतौली उपचुनाव में रालोद प्रत्याशी की जीत ने भाजपा के समीकरण को बुरी तरह से ध्वस्त कर दिया है, लेकिन जयंत चौधरी का फॉर्मूला कामयाब हो गया।

खतौली का प्रयोग अखिलेश योगी के खिलाफ करेंगे उपयोग! पश्चिमी यूपी में BJP को काटने का जयंत फॉर्मूला सफल रहा?
Dinesh Rathourलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊThu, 08 Dec 2022 07:58 PM
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खतौली उपचुनाव में रालोद प्रत्याशी की जीत ने भाजपा के समीकरण को बुरी तरह से ध्वस्त कर दिया है, लेकिन जयंत चौधरी का फॉर्मूला कामयाब हो गया। सियासी सूत्रों की मानें तो मैनपुरी की जीत से गदगद अखिलेश 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में योगी के खिलाफ खतौली वाला प्रयोग कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए अखिलेश को जयंत चौधरी की रणनीति पर काम करना पड़ सकता है।

आठ महीने पहले जिस सीट को सपा जीतने में असफल रही थी, आठ महीने बाद रालोद ने कब्जा जमा लिया है। गुरुवार को हुई मतगणना की शुरुआत में तो भाजपा को कुछ राहत मिली लेकिन 25 राउंड के बाद से ही भाजपा की धड़कने बढ़ने लगीं। 27 राउंड की गिनती के बाद निकले नतीजों ने अखिलेश और जयंत को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी के दबदबे की काट का फॉर्मूला थमा दिया। जाट और यादव वोटरों की ऑन ग्राउंड एकजुटता से ये साफ हो रहा है कि लखनऊ में होने वाले गठबंधन को पोलिंग बूथ पर कार्यकर्ता और वोटर भी स्वीकार करने लगे हैं।

अखिलेश-जयंत को कार्यकर्ताओं ने भी किया स्वीकार

खतौली में सीएम योगी आदित्यनाथ समेत बीजेपी के कई नेताओं और मंत्रियों ने प्रचार किया जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव प्रचार करने नहीं गए। इसके बावजूद खतौली सीट पर बीजेपी की 22 हजार से अधिक वोटों से हार ने बीजेपी कैंप में खलबली मचा दी है। पश्चिमी यूपी में बीजेपी काफी मजबूत है और लोकसभा से विधानसभा तक उसने यहां से काफी सीटें जीती हैं। खतौली में आरएलडी के मदन भैया की जीत से एक संदेश निकला है कि अखिलेश और जयंत के गठबंधन को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं ने स्वीकार कर लिया है। नहीं तो कई बार ऊपर से नेता गठबंधन कर लेते हैं लेकिन जमीन पर कार्यकर्ता और वोटर ट्रांसफर नहीं होते।

जयंत का फार्मूले ने दिलाई गठबंधन को जीत

आठ महीने पहले हुए विधानसभा के आमचुनाव में जयंत चौधरी की रणनीति काम नहीं आई थी। मार्च में हुए विधानसभा आम चुनाव में इस सीट को भाजपा के विक्रम सैनी ने जीती थी। विक्रम सैनी ने सपा-रालोद प्रत्याशी राजपाल सिंह सैनी को 16345 मतों से हरा दिया था। उस समय विक्रम सैनी को 100144 वोट मिले थे तो राजपाल सैनी को 83975 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा था। गुरुवार को आए चुनाव परिणामों ने भाजपा और उम्मीदवार के अरमानों पर बुरी तरह से पानी फेर दिया। जयंत चौधरी उस समय जयंत जाट-मुस्लिम वोट तक ही सीमित थे, लेकिन इस बाद जयंत ने रणनीति बदली और नए फार्मूले के उपचुनाव के मैदान में उतरे।

राजनीति जानकारों की मानें तो जयंत चौधरी इस बार जाट-मुस्लिम तक ही सीमित नहीं रहे। पश्चिमी यूपी के समीकरण को देखते हुए जयंत ने खतौली सीट पर इस बार एक नया प्रयोग किया। जयंत ने आरएलडी सीट पर सैनी समुदाय के कैंडिडेट को उतारने के बजाए गुर्जर समुदाय के मजबूत नेता मदन भैया पर दांव लगा दिया। उपचुनाव में जयंत ने चंद्रशेखर आजाद का भी साथ लिया। जयंत चौधरी ने जाट-मुस्लिम वोटरों पर फोकस किया तो वहीं चंद्रशेखर आजाद ने दलित समुदाय के वोटों को साधने में लग गए। 

योगी समेत बड़े नेताओं का दौरा भी राजकुमारी को दिला पाया जीत 

खतौली विधानसभा सीट से भाजपा ने विक्रम सैनी की पत्नी राजकुमारी सैनी और रालोद ने मदन भैया को चुनाव मैदान में उतारा था। भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी सैनी के लिए प्रचार करने के लिए सीएम योगी समेत बड़े नेताओं ने ताकत झोंकी थी। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक तक ने विपक्ष की नाकामियां और सरकार की खूबियां गिनाईं, लेकिन ये सब धरी की धरी रह गईं। उधर रालोद में केवल जयंत चौधरी ने पूरी ताकत के साथ मदन भैया को जिताने में जुटे रहे। मैनपुरी में डिंपल की जीत के लिए प्रचार के चलते अखिलेश खतौली नहीं जा पाए इसके बावजूद रालोद खतौली को जीतने में कामयाब रही। 

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