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Hindi News उत्तर प्रदेशअखिलेश यादव की सियासी चाल हुई कामयाब, सपा को रामपुर में मिल गया आजम खान का विकल्‍प!

अखिलेश यादव की सियासी चाल हुई कामयाब, सपा को रामपुर में मिल गया आजम खान का विकल्‍प!

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कुछ ऐसा ही दांव खेला है। उन्होंने मुस्लिम चेहरे के तौर पर जिस भरोसे से मोहिब्बुल्ला नदवी को प्रत्याशी घोषित किया, मोहिब्बुल्लाह उसे कायम रखने में कामयाब रहे।

अखिलेश यादव की सियासी चाल हुई कामयाब, सपा को रामपुर में मिल गया आजम खान का विकल्‍प!
Ajay Singhवरिष्ठ संवाददाता,रामपुरWed, 05 Jun 2024 02:05 PM
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Rampur Lok Sabha Election  Result 2024: यह सब सियासी दांव-पेंच हैं...। शह-मात के इस खेल में कब कौन किसे पटखनी दे दे कुछ नहीं कहा जा सकता। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कुछ ऐसा ही दांव खेला है। उन्होंने मुस्लिम चेहरे के तौर पर जिस भरोसे से मोहिब्बुल्ला नदवी को प्रत्याशी घोषित किया, मोहिब्बुल्लाह उस भरोसे को कायम रखने में कामयाब रहे। ऐसे में सियासी गलियारों में चर्चा-ए-आम है कि अब आजम का सियासी रसूख दांव पर है। कई लोगों का मानना है कि मोहिब्‍बुल्‍ला के रूप में सपा को रामपुर में आजम खान का विकल्‍प मिल गया है। 

सपा में पश्चिमी यूपी के बड़े चेहरे के तौर पर आजम का सियासी रसूख रहा है, जिसके दम पर वह रामपुर ही नहीं आसपास के जनपदों की तमाम सीटों पर प्रत्याशी का फैसला लेते रहे। रामपुर में कौन प्रत्याशी होगा, इसका तो ऐलान भी लखनऊ के बजाय आजम खां के रामपुर कार्यालय से होता रहा था, लेकिन इस बार उनके जेल में होने के चलते अखिलेश ने ऐसा सियासी दांव चल दिया कि आजम खान की प्रतिष्ठा पर बन आयी है। दरअसल, आजम की मर्जी थी कि अखिलेश उनकी परंपरागत सीट पर चुनाव लड़ें, लेकिन अखिलेश ने ऐसा नहीं किया।

आजम की मर्जी के खिलाफ उन्होंने मोहिब्बुल्लाह नदवी को प्रत्याशी बनाया। इस पर आजम ने जेल से इशारा दिया और यहां उनके कारिंदों ने बहिष्कार का ऐलान कर दिया था। इतना ही नहीं, आजम के खास आसिम राजा ने तो बकायदा सपा से नामांकन भी कर दिया था, लेकिन सिंबल न होने के चलते उनका नामांकन खारिज हो गया। अब जब मोहिब्बुल्ला चुनाव जीत गए तो माना जा रहा है कि रामपुर में अखिलेश ने आजम खान का सियासी चक्रव्यूह तोड़ दिया है।

हर चुनाव में बागी तेवर अपनाते रहे हैं आजम
यह पहला मौका नहीं था जब आजम खान ने बागी तेवर अपनाए। यह आजम का मिजाज रहा है, कमोवेश हर चुनाव में ही वह दबाव बनाने के लिए नाराज हो जाते हैं और उनकी नाराजगी बागी तेवर अख्तियार कर लेती है। मालूम हो कि 2004 में आजम खां ही जयाप्रदा को रामपुर लाए थे, लेकिन वह जीत गईं और 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने जब उन्हें दोबारा प्रत्याशी बना दिया। इस पर आजम खान ने बागी तेवर अपनाए और खुलकर जयाप्रदा का विरोध किया था।

....तब सपा से निकाल दिए गए थे आजम 
2009 के चुनाव में आजम नहीं चाहते थे कि जयाप्रदा का टिकट सपा से हो, लेकिन आजम के सियासी विरोधी रहे अमर सिंह के आगे आजम की नहीं चली और जयाप्रदा का टिकट हो गया। इस पर आजम ने बगावत कर दी तो अमर सिंह ने नेताजी मुलायम सिंह यादव पर दवाब बनाकर आजम को पार्टी से ही बेदखल करा दिया था।

अपने दम पर जीते मोहिब्बुल्लाह
मोहिब्बुल्लाह नदवी का चुनाव प्रचार बड़े साइलेंट मोड पर रहा। यहां चुनाव प्रचार को सपा का कोई बड़ा नेता नहीं आया। आजम समर्थक उनका विरोध करते रहे, लेकिन वह खामोशी से लोगों को साधते रहे और आखिरकार चुनाव जीत गए।

कांग्रेस-आप ने निभाया साथ
बेशक, आजम समर्थित सपाई विरोध में रहे, लेकिन गठबंधन का धर्म निभाते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने पूरा साथ दिया। कांग्रेस ने कई सभाएं भी आयोजित कराईं।

...फिर भी नहीं टूट सका आजम का रिकार्ड
पहले राउंड से बढ़त बनाते-बनाते जब मोहिब्बुल्ला 1.20 लाख वोटों से आगे हुए तो माना जा रहा था कि वह आजम का रिकार्ड तोड़ सकते हैं, लेकिन बाद के चक्रों में उनका वोट परसेंटेज डाउन हुआ, लिहाजा रिकार्ड नहीं तोड़ सके। मालूम हो कि आजम खां ने 2019 में 1.20 लाख से अधिक मतों से जयाप्रदा को शिकस्त दी थी। तब आजम को 4.70 लाख तो जयाप्रदा को मिले 3.48 लाख वोट मिले थे।

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