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एक घंटा सुनता हूं भजन, रामचरितमानस से शिकायत नहीं, लेकिन...; अखिलेश यादव का कहां निशाना

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि रामचरितमानस से किसी को शिकायत नहीं है लेकिन जो गलत है वह गलत है। कहा है कि सपा भगवान विष्णु के सभी अवतारों को मानती है। विपक्ष सवाल करता है तो योगी को जवाब देना चाहिए।

एक घंटा सुनता हूं भजन, रामचरितमानस से शिकायत नहीं, लेकिन...; अखिलेश यादव का कहां निशाना
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,आगराSun, 05 Feb 2023 09:32 PM

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सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के रामचरितमानस पर दिए बयान के बाद से यूपी में चल रहा घमासान तेज होने के साथ ही वार-पलटवार भी आक्रामक होता जा रहा है। आगरा में रविवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि रामचरितमानस से किसी को शिकायत नहीं है लेकिन जो गलत है वह गलत है।

सीएम योगी पर निशाना साधते हुए अखिलेश ने कहा कि मैं आज भी प्रत्येक दिन सुबह एक घंटा भजन सुनता हूं। योगी जी को तो सारे भजन याद होंगे उन्हें सुनने की ज़रुरत नहीं है, उन्हें भजन सुनने का समय भी नहीं मिलता होगा। उन्होंने कहा है कि सपा भगवान विष्णु के सभी अवतारों को मानती है लेकिन विपक्ष अगर सवाल करता है तो योगी को उसका जवाब देना चाहिए। 

अखिलेश ने दानवीर कर्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि शुद्र होने के कारण ही दानवीर को भी अपमान झेलना पड़ा। अखिलेश ने यहां तक कहा कि जिन लोगों ने समाज को जातियों में बांटा वही लोग जातीय जनगणना नहीं कराना चाहते हैं। कहा कि पिछड़ों-दलितों को संविधान में मिले अधिकारी भी भाजपा नहीं देना चाहती है। जब तक जातीय गणना नहीं होगी, तब तक पिछड़ों और दलितों को भागीदारी कैसे मिलेगी। अगर यह लोग जातीय गणना नहीं करा सकते तो सरकार से हट जाएं। हम लोग तीन महीने में जातीय गणना करा देंगे। 

अखिलेश ने कहा कि जातीय व्यवस्था की समस्या आज की नहीं है। यह पांच हजार साल पुरानी समस्या है। यह एक दिन में हल नहीं होगी। कहा कि महाभारत पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि कर्ण को शुद्र होने के कारण क्या-क्या झेलना पड़ा था। योगी जी आ रहे हैं आप लोग उनसे इस पर पूछिए। कहा कि रामधारी सिंह दिनकर जी ने कर्ण के बारे में जो लिखा है उसे पढ़िए। उन्होंने लिखा है कि कर्ण को केवल शुद्र होने के कारण किस तरह से अपमानित होना पड़ा था। 

अखिलेश ने भाजपा का नाम लेकर कहा कि यह वही लोग हैं जिन्होंने जाति व्यवस्था बनाई है। यह लोग जाति खत्म नहीं करना चाहते। यह लोग जातियों को अधिकार नहीं देना चाहते हैं। संविधान में मिला हक भी यह पिछड़े और दलित जातियों को नहीं देना चाहते हैं। भाजपा के लोग जातीय व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहते हैं। इसलिए ही जातीय गणना नहीं कराने को तैयार हैं। जातीय गणना के बाद ही सभी जातियों को उनका हक और भागीदारी मिल सकेगी।

अखिलेश ने कहा कि संविधान में मिले अधिकार को भी नहीं दिया जा रहा है। इस सरकार को बताना चाहिए कि राज्य के विश्वविद्यालयों में कितने कुलपति पिछड़े-दलित और आदिवासी हैं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी में कितने वीसी पिछड़े-दलित और आदिवासी हैं। संविधान में जो अधिकारी पिछड़ों दलितों को मिले हैं। वह भी छीने जा रहे हैं।

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