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अकबरपुर संसदीय सीट में त्रिकोणीय संघर्ष में जीत-हार के दावे कर रहे उम्मीदवार

कानपुर जिले की चार विधानसभाओं से जुड़कर बनी अकबरपुर संसदीय सीट में जातीय समीकरण के सहारे राजनीतिक दल चुनावी वैतरणी पार करने के प्रयास में लगे हैं। मौजूदा स्थिति की बात करें तो यह कहना गलत नहीं होगा कि यहां त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले को कुल पड़े वोटों में से लगभग आधे हासिल हुए थे। अबकी बार बीजेपी ने फिर भोले पर दांव लगाया है। क्षेत्र में पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की सर्वाधिक भागीदारी है, ऐसे में सभी पार्टियों की नजरें इन पर हैं।
अकबरपुर सीट पर सामान्य वर्ग के मतदाता दूसरे नंबर तो तीसरे स्थान पर अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं की है। अल्पसंख्यक वोटरों की संख्या करीब एक लाख है। इन्हें भी सभी प्रत्याशी रिझाने में लगे हैं। वर्ष 2009 में इस सीट पर कांग्रेस ने कब्जा किया था। तब राजाराम पाल ने बसपा प्रत्याशी को मात दी थी। वर्ष 2014 के चुनाव में भी बसपा दूसरे नंबर पर रही थी। इसकी एक ही वजह है कि अनुसूचित वर्ग का लगभग सवा चार लाख वोटर है। इस बार सपा-बसपा गठबंधन के सामने परंपरागत वोटरों का बिखराव रोकना बड़ी चुनौती है। गठबंधन से निशा सचान भाग्य आजमा रहीं तो कांग्रेस ने फिर से राजाराम पाल को मैदान में उतारा है। ऊंट किस ओर करवट बैठेगा, यह कहना काफी मुश्किल है। तीनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी जातीय समीकरण के आधार पर अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।
वर्ष 2014 का परिणाम
देवेंद्र सिंह भोले (भाजपा) 481584
अनिल शुक्ला वारसी (बसपा) 202587
लाल सिंह तोमर (सपा) 147002
मतदाताओं की संख्या
कुल मतदाता -------  17,59010
पुरुष वोटर------ 9,58,634
महिला वोटर--  8,00,376

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  • Web Title:Akbarpur: Candidates claiming victory and defeat in triangular struggle