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मायावती की पॉलिटिक्‍स में मिसफिट आकाश आनंद, फायर ब्रांड बयान या कुछ और...,जानें क्‍यों छिना उत्‍तराधिकार

मायावती ने आकाश आनंद को अपरिपक्व बताकर पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर ओर अपने उत्‍तराधिकारी के पद से हटा दिया है। लोकसभा चुनाव के बीच इस फैसले से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अचानक से इसकी जरूरत क्‍यों पड़ी? 

मायावती की पॉलिटिक्‍स में मिसफिट आकाश आनंद, फायर ब्रांड बयान या कुछ और...,जानें क्‍यों छिना उत्‍तराधिकार
Ajay Singhविशेष संवाददाता,लखनऊWed, 08 May 2024 07:59 AM
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Mayawati News:  बसपा सुप्रीमो मायावती अपने कड़े फैसले के लिए जानी जाती हैं। वह जब भी फैसला लेती हैं हमेशा चौंकाने वाला ही लेती हैं। बसपा सुप्रीमो ने करीब पांच महीने पहले ही 10 दिसंबर 2023 को भतीजे आकाश आनंद को पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में अपना उत्तराधिकारी घोषित कर यह संदेश दिया था कि वह आकाश के सहारे बसपा को आगे बढ़ाएंगी, लेकिन अब उन्हें अपरिपक्व बताकर पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर ओर अपने उत्‍तराधिकारी के पद से हटा दिया है। लोकसभा चुनाव के बीच इस फैसले से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अचानक से इसकी जरूरत क्‍यों पड़ी? 

उत्‍तराधिकारी बनाए जाने के बाद हाल के दिनों में आकाश आनंद की यूपी में काफी चर्चा हो रही थी। लोग उन्‍हें सुनने के लिए बडी संख्‍या में आ रहे थे। कई जानकारों का कहना था कि आकाश के जरिए बसपा अपने असल मूवमेंट पर वापस लौट रही है। लेकिन उनके फायर ब्रांड बयानों से ऐसी हलचल मची कि मायावती को बसपा का नुकसान नज़र आने लगा। पार्टी पिछले दो दशक से जिस सोशल इंजीनियरिंग पर जोर दे रही है इन बयानों से वो डैमेज होती नज़र आई तो मायावती नाराज हो गईं। दरअसल, उन्‍हें लगने लगा कि आकाश आनंद की भाषा शैली पार्टी की लाइन से मेल नहीं खा रही। जानकारों का कहना है कि पार्टी के अंदर भी आकाश के बयानों को लेकर बहुत सहजता नहीं थी। मायावती ने आकाश से पहले भी समय-समय पर लोगों को मौके दिए थे लेकिन कोई चल नहीं पाया। पिछले दिनों मीडिया चैनलों को दिए इंटरव्‍यू में आकाश खुद कहते नज़र आए थे कि यदि मैं भी नहीं चल सका तो मुझे भी हटाया जा सकता है। आखिरकार हुआ भी वही। यूपी की चुनावी सभाओं में आकाश ने भीड़ के सामने आपा खोया तो मायावती को उन्‍हें उत्‍तराधिकारी और नेशनल कोआर्डिनेटर के पद से हटाने में देर नहीं लगी। 

संदेश देने की कोशिश
आकाश आनंद को हटाकर मायावती ने यह राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है कि वह कीचड़ उछाल की राजनीति नहीं करती हैं। बता दें कि इसी तरह उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में भाई-भतीजावाद का आरोप लगने के बाद भाई आनंद कुमार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से हटा दिया था, लेकिन चुनाव बाद फिर बना दिया। आकाश आनंद को भी हटाकर मायावती ने संदेश देने का काम किया है कि उनके लिए परिवार नहीं पार्टी व मूवमेंट जरूरी है।

नगीना से लांच किया
बसपा सुप्रीमो ने भतीजे आकाश को पहली बार यूपी चुनाव में लांच किया था। उनकी पहली सभा नगीना लोकसभा सीट से इसलिए लगाई गई कि वहां उनकी बिरादरी के सर्वाधिक मतदाता होने के साथ आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद चुनाव लड़ रहे हैं। आकाश ने अपनी पहली सभा में छह अप्रैल को चंद्रशेखर का नाम लिए बिना उन्हें दलित युवाओं का दुश्मन बताया था। कुछ ऐसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया जिसको लेकर उन पर उंगलियां उठी।

आकाश आनंद की यूपी में 21 में से 16 सभाएं हो सकीं
यूपी में आकाश आनंद की पहले चरण में कुल 21 सभाएं लगाई गई थीं, लेकिन वह 16 सभा ही कर सके। आकाश की 28 अप्रैल को सीतापुर के साथ ही लखनऊ में मोहनलालगंज में भी सभा लगी थी, लेकिन सीतापुर की सभा के बाद उनका कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। मायावती ने पहली बार ऐसा नहीं किया है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जब उन पर भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लगा तो उन्होंने भाई आनंद कुमार को भी पद से हटा दिया था।

भविष्‍य के लिए रोकी नहीं है राह 
मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पदों से हटाया तो है लेकिन भविष्‍य की राह रोकी नहीं है। मायावती ने कहा कि उन्होंने यह फैसला बसपा और आंदोलन के हित में लिया है और जब तक आनंद 'पूर्ण परिपक्वता'  हासिल नहीं कर लेते। यानी  भविष्‍य में वह आकाश आनंद को दोबारा जिम्‍मेदारी सौंप सकती हैं। इसके साथ ही मायावती ने कहा है कि उनके भाई और आकाश आनंद के पिता आनंद कुमार पहले की तरह अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। 'एक्स'  पर अपनी  पोस्ट में मायावती ने आकाश आनंद को हटाने के पीछे के सटीक कारण का उल्लेख नहीं किया है। 

आकाश आनंद के बारे में क्या बोलीं मायावती?
'एक्स' पर एक पोस्ट में मायावती ने कहा कि बसपा बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के स्वाभिमान और आत्मसम्मान और सामाजिक परिवर्तन के लिए एक आंदोलन है जिसके लिए श्री कांशी राम जी और मैंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है।” इसे गति देने के लिए नई पीढ़ी को भी तैयार किया जा रहा है।” उन्होंने कहा, 'इसी दिशा में मैंने पार्टी में अन्य लोगों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ श्री आकाश आनंद को राष्ट्रीय समन्वयक और उनका उत्तराधिकारी घोषित किया था, लेकिन पार्टी और आंदोलन के व्यापक हित में उनसे इन दोनों की जिम्मेदारी वापस ली जा रही है,  पूर्ण परिपक्वता प्राप्त करने तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां।'  मायावती ने कहा कि आनंद कुमार पहले की तरह पार्टी और आंदोलन में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। एक अन्‍य पोस्‍ट में मायावती ने कहा, 'बीएसपी का नेतृत्व पार्टी और आंदोलन के हित में और बाबा साहब डॉ. अंबेडकर के कारवां को आगे बढ़ाने में हर तरह का बलिदान देने से पीछे नहीं हटेगा।'

कौन हैं आकाश आनंद?
आकाश आनंद ने लंदन के एक इंस्टीट्यूट से एमबीए की पढ़ाई की। जून 2019 में हुई बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मायावती ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त किया था। 15 जनवरी 2022 को अपने 66वें जन्मदिन कार्यक्रम में मायावती ने कहा था, 'बसपा आकाश आनंद को पार्टी में बड़ी भूमिका के लिए तैयार कर रही है। वह युवा हैं और राजनीतिक परिपक्वता हासिल कर रहे हैं। पार्टी ने उन्हें उन राज्यों में पार्टी का आधार फैलाने का काम सौंपा है जहां बाद में विधानसभा चुनाव होने हैं। उचित समय के दौरान, आकाश को चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान, आकाश आनंद का नाम बसपा के स्टार प्रचारकों की सूची में तीसरे नंबर पर था, लेकिन 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में, वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एससी मिश्रा से ऊपर दूसरे स्थान पर आ गए।

26 मार्च 2023 को आकाश की शादी पूर्व बीएसपी सांसद अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा सिद्धार्थ से गुरुग्राम में एक समारोह में हुई थी। 28 अप्रैल, 2024 को, आकाश आनंद पर चार अन्य लोगों के साथ सीतापुर में एक चुनावी रैली में कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के लिए आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया था। रैली में आकाश के भाषण पर जिला प्रशासन द्वारा स्वत: संज्ञान लेने के बाद यह कार्रवाई की गई थी। आकाश ने भाजपा के नेतृत्व वाले राज्य की आलोचना करते हुए कहा था, 'यह भाजपा सरकार एक बुलडोजर सरकार और गद्दारों की सरकार है। जो पार्टी अपने युवाओं को भूखा छोड़ती है और अपने बुजुर्गों को गुलाम बनाती है। वह एक आतंकवादी सरकार है। तालिबान अफगानिस्तान में ऐसी सरकार चलाता है।' आकाश आनंद के अलावा, बसपा उम्मीदवारों महेंद्र यादव, श्याम अवस्थी और अक्षय कालरा और रैली आयोजक विकास राजवंशी पर भी केस दर्ज किया गया था।

कांग्रेस-सपा का आरोप- दबाव में लिया फैसला 
आकाश आनंद को हटाए जाने पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता सुरेंद्र सिंह राजपूत ने कहा, 'बसपा प्रमुख मायावती ने जिस तरह से अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी समन्वयक पद से हटाया है, वह बेहद चौंकाने वाला है. क्या आपने ये कदम बीजेपी के किसी दबाव में उठाया? हालांकि यह आपकी पार्टी का आंतरिक मामला है, आपको इस बारे में स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए।' वहीं समाजवादी पार्टी के नेता फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि बसपा और भाजपा एक 'अघोषित गठबंधन' में हैं। जिस तरह से आकाश आनंद को उनके पद से हटाया गया, उससे यह साबित हो गया है। लोग इसे देख सकते हैं और वे इसका करारा जवाब देंगे।

भाजपा की प्रतिक्रिया 
वहीं भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने बसपा प्रमुख पर निशाना साधते हुए कहा, 'मायावती पार्टी को एक प्राइवेट लिमिटेड संस्था की तरह चलाती हैं और वह कभी भी कोई भी फैसला ले सकती हैं। आकाश आनंद की गैरजिम्मेदाराना टिप्पणी और बीजेपी के खिलाफ उनके बयानों के कारण लोगों में बसपा के खिलाफ आक्रोश है।