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उत्तर प्रदेशकोरोना से जंग जीतने के बाद तीन बच्चों में ये नई बीमारी, लखनऊ केजीएमयू में भर्ती

रजनीश रस्तोगी,लखनऊPublished By: Deep Pandey
Tue, 01 Jun 2021 03:04 PM
कोरोना से जंग जीतने के बाद तीन बच्चों में ये नई बीमारी, लखनऊ केजीएमयू में भर्ती

कोरोना से जंग जीतने के बाद भी राहत नहीं है। कोरोना को हरा चुके बच्चे छह हफ्ते बाद नई बीमारी से ग्रसित हो गए हैं। डाक्टरों ने इसे मल्टी आर्गन इंफेलेमेटरी सिंड्रोम बताया है। बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमित बच्चों में यह समस्या अधिक देखने को मिल रही है। अब तक इस बीमारी की चपेट में तीन बच्चे आ चुके हैं। केजीएमयू के बाल रोग विभाग में गंभीर अवस्था में बच्चों को भर्ती कराया गया है।

10 से 12 साल के तीनों ही बच्चे इस साल दूसरी लहर में कोरोना संक्रमित हुए। अप्रैल के पहले हफ्ते में इन बच्चों को बिना लक्षण वाला कोरोना हुआ। दो हफ्ते में बच्चे ठीक भी हो गए। करीब 45 दिन बाद बच्चों की आंखें लाल हो गईं। त्वचा पर चकत्ते पड़ने लगे। ये देख घबराए माता-पिता ने पहले सामान्य इलाज कराया। नहीं सुधरने पर चिंता बढ़ गई। बच्चों को लेकर अभिभावकों ने केजीएमयू के चिकित्सकों को दिखाया। यहां डाक्टरों ने बताया कि सभी बच्चों पोस्ट कोविड के प्रभाव से ग्रसित हैं। उन्हें मल्टी आर्गन इंफेलेमेटरी सिंड्रोम हो गया है। इनका इलाज बाल रोग विभाग के पीडियाट्रिक इंटेसिंव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में चल रहा है। डाक्टरों ने बताया कि सभी बच्चे पहले से काफी बेहतर हैं।

पोस्ट कोविड बच्चों मे बीमारी का खतरा अधिक

बाल रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. शैली अवस्थी के मुताबिक कोरोना को मात दे चुके बच्चों में कई तरह की परेशानी देखने को मिल रही है। कोरोना से ठीक होने के पांच से छह सप्ताह में एमआईएस-सी की समस्या उभर रही है। एमआईएस-सी पीड़ित बच्चों में अंग फेल होने की आशंका रहती है। सबसे ज्यादा दिमाग, गुर्दा, फेफडे को भी प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि एक बच्चे में निमोनिया जैसे लक्षण भी महसूस हुए थे। समय पर पहचान कर बच्चों को गंभीर होने से बचाया जा सकता है। 

कोरोना से ठीक होने के बाद बुखार आने पर हल्के में न लें

विभाग की डॉ. शालिनी त्रिपाठी के मुताबिक कोरोना को ठीक होने के बाद यदि बच्चे को बुखार आ रहा है तो उसे सामान्य न मानें। डॉक्टर की सलाह पर डेंगू, मलेरिया, टायफाइड समेत दूसरी जरूरी जांच कराएं। इनमें किसी बीमारी की पुष्टि न हो तो एमआईएस-सी से संबंधित जांच कराएं। दिल को खून पहुंचाने वाली धमनियों में एन्युरिज्म (गुब्बारे की तरह फूलने) बन जाता है। इससे दिल के फेल होने का खतरा पैदा होता है।

बच्चों में इन लक्षणों को देख तुरंत डाक्टर से संपर्क करें

आंखें लाल होना
त्वचा पर चकत्ते पड़ना
बुखार, सांस लेने में दिक्कत
पेट दर्द, त्वचा और नाखूनों का नीला पड़ना
4 से 15 वर्ष के बच्चे ज्यादा प्रभावित होते हैं
 

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