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सोनिया गांधी के पत्र में छिपा है स्वार्थ, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भी रायबरेली को लिखा खत

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली वालों को पत्र लिखने के बाद योगी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भी खत लिखा है। उन्होंने खत में सोनिया के साथ इंदिरा गांधी पर हमला किया।

सोनिया गांधी के पत्र में छिपा है स्वार्थ, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भी रायबरेली को लिखा खत
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊFri, 16 Feb 2024 12:02 AM
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सोनिया गांधी द्वारा रायबरेली के लोगों को भावुक चिट्ठी लिखने के बाद प्रदेश के कृषि विपणन एवं उद्यान राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश प्रताप सिंह ने भी रायबरेली को संबोधित कर पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने सोनिया गांधी पर रायबरेली की अनदेखी का आरोप लगाया है। दिनेश ने लिखा है कि अब चुनाव करीब आ रहे हैं तो रायबरेली के लोगों से जल्द मिलने का वादा किया जा रहा है जो जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद सर्टिफिकेट तक लेने नहीं आया, उसके जल्द मिलने के वादे के पीछे स्वार्थ छिपा है। एक बार फिर रायबरेली के लोगों को धोखा दिया गया है। दस वर्षों में रायबरेली के लोगों से कभी न मिलने वाली सोनिया गांधी को आज रायबरेली के लोगों की याद आ रही है।

दिनेश ने लिखा कि एक बाए फिर गांधी परिवाए ने रायबरेली वालों को धोखा दिया है। कहा कि धोखा इस परिवार की प्रवृति रही है। राहुल गांधी, उनकी मां माता जी और चाचा जी को अमेठी ने कई बार सांसद बनाया। लेकिन अमेठी को धोखा ही दिया है। उसी तरह इंदिरा गांधी और उनके पति फिरोज खान और अन्य परिजनों को रायबरेली ने सांसद बनाया। लेकिन इंदिरा गांधी ने भी रायबरेली को धोखा दिया है।

सोनिया गांधी ने रायबरेली के नाम अपने पत्र में क्या लिखा

अब सोनिया गांधी ने इस काम को आगे बढ़ाते हुए रायबरेली को छोड़ दिया है। रायबरेली को छोड़कर राजस्थान चली गई हैं। रायबरेली छोड़कर राजस्थान जाने का कारण देशहित या जनहित नहीं है, यह स्वहित है। उन्हें पता है कि रायबरेली में चुनाव लड़ीं तो हार जाएंगी। अगर चुनाव हारती हैं तो उनका दस जनपथ वाला घर चला जाएगा। इतनी बड़ी पार्टी की इतनी बड़ी नेता की इतनी छोटी सोच है।

कहा कि सोनिया गांधी देश की जानी मानी धनवान व्यक्तियों की श्रेणी में आती हैं। आज फिर रायबरेली को पीढ़ियों के नाम पर भावनात्मक ब्लैकमेल करने के लिए पत्र लिखा है। कहा कि उन्होंने जल्द रायबरेली आने की बात लिखी है। जब चुनाव जीतने पर सर्टिफिकेट लेने नहीं आईं। कोरोना जैसी महामारी में दर्द बांटने नहीं आईं तो अब चुनाव आया तो आने की बात कर रही हैं। 

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