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Hindustan Special: पर्ची व्यवस्था से डरती है गोरखपुर पुलिस, जेल जाने तक की नौबत

गोरखपुर पुलिस एक पर्ची से डरने लगी है। दरअसल पर्ची पुलिस के झूठ को पकड़ ले रही है। जनशिकायतों के निस्तारण के सवाल पर पुलिसकर्मी कह देते थे कि फरियादी थाने या चौकी तक आया ही नहीं।

Hindustan Special: पर्ची व्यवस्था से डरती है गोरखपुर पुलिस, जेल जाने तक की नौबत
Pawan Kumar Sharmaवरिष्ठ संवाददाता,गोरखपुरThu, 13 Jun 2024 07:24 PM
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गोरखपुर पुलिस एक पर्ची से डरने लगी है। वजह साफ है कि ये पर्ची पुलिस के झूठ को पकड़ ले रही है। जनशिकायतों के निस्तारण के सवाल पर पुलिसकर्मी कह देते थे कि फरियादी थाने या चौकी तक आया ही नहीं। एसएसपी स्तर से शुरू की गई पर्ची की व्यवस्था से पुलिसकर्मी यदि झूठ बोलते हैं तो उनकी कलई खुल जाती है। पिछले छह महीने में पर्ची से जांच के दायरे में आए 43 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है।

दरअसल, एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने करीब नौ महीने पहले गोरखपुर पुलिस ऑफिस और थाने में पर्ची सिस्टम की शुरुआत की। इसके तहत थाने या पुलिस ऑफिस में आने वाले फरियादी को पर्ची दी जाती है, जिसमें उसकी शिकायत का दिन-तारीख दर्ज होती है। अगली बार यदि शिकायती आता है तो उसी पर्ची को देखकर पता चल जाता है कि अभी तक क्या कार्रवाई हुई है। अगर कोई पुलिसकर्मी यह कहता है कि फरियादी उनके पास आया ही नहीं था तो उसका झूठ पकड़ में आ जाता है। अफसर भी जान जाते है कि पुलिस टालमटोल कर रही है। शिकायती पर्ची के कारण पुलिसकर्मी खुद ही डरे रहते हैं कि कहीं नप न जाएं।

तुरंत दर्ज हो जाती है एफआईआर

थाने पर केस नहीं दर्ज होने पर भी शिकायती अधिकारियों के पास पर्ची लेकर आते हैं। ऐसी स्थिति में एसएसपी का पहला सवाल होता है कि थाने से पर्ची मिली? शिकायती के पास यदि पर्ची होती है तो थाने पर फोन करके कार्रवाई के बारे में पूछा जाता है। यदि उधर से यह रटा-रटाया जवाब मिला कि कोई नहीं आया था तो फिर जांच का आदेश और कार्रवाई तय की जाती है। साथ ही शिकायती का मुकदमा दर्ज करने का आदेश हो जाता है।

पुलिस पर रंगदारी तक का मुकदमा हुआ

शिकायती पर्ची के दम पर ही हाल के दिनों में पुलिस वालों पर रंगदारी, धमकी और मारपीट जैसे केस दर्ज किए गए। जांच में इन पुलिसकर्मियों ने शिकायती के न आने की बात कही और फरियादी ने पर्ची दिखा दी।

एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि फरियादी कितनी बार आया और थाने पर गया तो क्या कार्रवाई हुई है, यह जानने की कोई व्यवस्था नहीं थी। पर्ची सिस्टम से लोगों को एक विश्वास भी होता है कि उनकी फरियाद अब सुनी जाएगी, क्योंकि उनके हाथ में रिसीविंग होती है। दूसरे, इससे मॉनिटरिंग आसान हो गई है। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई भी की जा रही है।