DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

यूपी: पूर्व कर्नल को अस्पताल पहुंचाने के लिए नहीं मिली रेलवे की एंबुलेंस, मौत

mathura junction

सेना की मेडिकल कोर में कर्नल रहकर देश की सेवा करने वाले 82 वर्षीय ओमकार नाथ गुप्ता रविवार की रात मथुरा जंक्शन पर ट्रेन की चपेट में आकर घायल हो गए तो उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल सकी। बाद में जैसे तैसे उन्हें टेंपो में लादकर अस्पताल पहुंचाया गया। इलाज के दौरान सैनिक अस्पताल में पूर्व कर्नल ने दम तोड़ दिया।

मध्य प्रदेश के सागर निवासी ओमकार नाथ गुप्ता सेना की मेडिकल कोर में कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। रविवार को वह अपनी पत्नी सरस गुप्ता के साथ निजामुद्दीन जबलपुर एक्सप्रेस से दिल्ली से सागर जा रहे थे। दोनों ट्रेन के ए-वन कोच की सीट संख्या सात व आठ पर सफर कर रहे थे। ट्रेन जंक्शन रेलवे स्टेशन पर रात करीब आठ बजे रुकी, तो ओमकार नाथ गुप्ता खाने का कुछ सामान लेने के लिए प्लेटफार्म पर उतर गए। वह जब ट्रेन में सवार हो रहे थे, तभी उनका पैर फिसल गया। तब तक ट्रेन चल चुकी थी। वह प्लेटफार्म और ट्रेन के बीच फंस गए। यात्रियों ने चेन खींच कर जब तक ट्रेन को रोका तब तक वह गंभीर रूप से घायल हो चुके थे।

सूचना मिलने के बाद आरपीएफ और जीआरपी के जवान मौके पर पहुंच गए। जीआरपी ने रेलवे की एंबुलेंस को बुलाने के लिए कॉल किया। रेलवे चिकित्सक तो मौके पहुंच गए, लेकिन करीब एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई। अंत में जीआरपी के सिपाही उन्हें टेंपो द्वारा जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे। जिला चिकित्सालय से उन्हें तत्काल रेफर कर दिया गया। जीआरपी ने पूर्व कर्नल को सैनिक अस्पताल में भर्ती कराया। सैनिक अस्पताल में पूर्व कर्नल ने सोमवार की सुबह दम तोड़ दिया। जीआरपी प्रभारी निरीक्षक शिव कुमार पौनियां ने बताया कि रेलवे की एंबुलेंस को बुलाने के लिए कई बार फोन किया गया, एंबुलेंस चालक का फोन रिसीव नहीं हुआ। पूर्व कर्नल को टेम्पो से अस्पताल पहुंचाया गया था।

पुत्र भी मेडिकल कोर में है लेफ्टिनेंट
पूर्व कर्नल ओमकार नाथ गुप्ता के बेटे आनंद गुप्ता भी सेना की मेडिकल कोर में लेफ्टिनेंट हैं और वह दिल्ली के बेस अस्पताल में तैनात हैं। पिता की मौत का पता लगने के बाद वह सैनिक अस्पताल पहुंच गए। बेटे ने पिता की मौत को हादसा मानते हुए शव का पोस्टमार्टम कराए जाने से मना कर दिया। जीआरपी प्रभारी निरीक्षक शिवकुमार सिंह पौनियां ने बताया कि पंचायतनामे की कार्रवाई करने के बाद शव बिना पोस्टमार्टम के बेटे को सौंप दिया गया।

जंक्शन पर नहीं रहती रेलवे की एंबुलेंस
ऐसा पहली बार नहीं कि घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए रेलवे की एंबुलेंस नहीं मिली हो। इससे पूर्व भी कई मरीजों को टेंपो या 108 सेवा से अस्पताल पहुंचाया गया है। जंक्शन स्टेशन पर रेलवे की एंबुलेंस खड़ी नहीं होती है। एंबुलेंस रेलवे अस्पताल में ही खड़ी रहती है। जंक्शन से रेलवे अस्पताल की दूरी तकरीबन एक किलोमीटर है।

अनुबंध पर है एंबुलेंस
रेलवे चिकित्सालय में अनुबंध के तहत एंबुलेंस लगाई हुई है। अनुबंधित ठेकेदार अपनी मर्जी के मुताबिक काम करता है। पूर्व में रेलवे के चिकित्साधिक्षक की शिकायत पर ठेकेदार का अनुबंध रद कर दिया गया था। ठेकेदार ने जुगाड़ से फिर अपने अनुबंध को बहाल करा लिया। रेलवे अस्पताल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एंबुलेंस चालक और ठेकेदार मनमानी करते हैं। 

एंबुलेंस के ड्राइवर ने फोन नहीं उठाया था। 108 सेवा की एंबुलेंस दूर थी। इस हालत में घायल को टेंपो से अस्पताल पहुंचाया गया था। रेलवे चिकित्साधिक्षक ने ठेकेदार और एंबुलेंस चालक को चेतावनी पत्र दिया है। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -एसके श्रीवास्तव, पीआरओ मंडल रेल प्रबंधक

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:A retired colonel died after not getting an ambulance from railway to reach hospital in Mathura