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सीएम सिटी में चर्चा में है एक जालसाज, ऐसे लगाता है बैंकों को चपत

सीएम योगी गोरखपुर में इन दिनों एक जालसाज चर्चा में है। उसके कारनामे बता रहे कि वह नटवरलाल से कम नहीं है। फर्जी खाते और स्टेटमेंट तैयार करना उसके बाएं हाथ का खेल है।

सीएम सिटी में चर्चा में है एक जालसाज, ऐसे लगाता है बैंकों को चपत
Deep Pandeyहिन्दुस्तान,गोरखपुरWed, 31 Jan 2024 11:04 AM
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सीएम सिटी में इन दिनों एक जालसाज चर्चा में है। उसके कारनामे बता रहे कि वह नटवरलाल से कम नहीं है। फर्जी खाते और स्टेटमेंट तैयार करना उसके बाएं हाथ का खेल है। जमीन का फर्जी दस्तावेज बनाने में भी उसका कोई सानी नहीं है। पैन और आधार से लेकर आयकर रिटर्न तक दाखिल करने में भी वह तनिक नहीं हिचकता। यही वजह है कि वह अब तक 100 करोड़ से ज्यादा का फ्रॉड कर चुका है। उसने 200 करोड़ की जालसाजी की पृष्ठभूमि तैयार कर डाली थी। इस बीच 4.45 करोड़ के लोन फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज हो गया और कड़ियां जोड़ते-जोड़ते पुलिस उस तक पहुंच गई और चार दिन पहले उसे गिरफ्तार कर लिया। उसने जब राज उगलने शुरू किए तो पुलिस अफसरों के भी होश फाख्ता हो गए। आईसीआईसीआई बैंक की एक शाखा में दो लोन केस की जांच शुरू हुई तो फर्जीवाड़ा पांच बैंकों तक पहुंच गया। फिलहाल अभी पुलिस पूरे फर्जीवाड़े में ओर-छोर नहीं पा सकी है।

नाम भी असली है या फर्जी

इस नटवरलाल का नाम है रुद्रांश। हालांकि उसका यह नाम असली है या यह भी अन्य दस्तावेजों की तरह फर्जी है, इसको लेकर अभी पुलिस भी मुतमइन नहीं है। जांच में अब तक जो पता चला है कि उसके मुताबिक, उसने अब तक कई फ्रॉड किए हैं। जब भी पकड़े जाने का डर होता,  वह अपना नाम और ठिकाना बदल लेता। उसके पास अलग-अलग नामों के आधार कार्ड भी मौजूद हैं। उसने अरबों की ठगी करने के लिए फर्जी दस्तावेज पर एक फर्म का पंजीकरण भी करा लिया था। जिस पर अब काम भी शुरू करने वाला था। लेकिन इसके पहले ही  पकड़ा गया। पूछताछ के आधार पर मिली जानकारी को पुलिस ने तस्दीक करनी शुरू की तो कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आती जा रही हैं।

ईडी कर चुकी जांच, तीन बार मां का बदला नाम

पुलिस अभी उसके असली नाम और पते को लेकर भी तस्दीक करने में जुटी है। बताया जा रहा है कि उसका असली नाम राजेश पाण्डेय है और उसके पिता का नाम अष्टभुजा पाण्डेय है। गोरखपुर के बांसगांव इलाके में उसका मूल पता है। उसने अपने पिता के साथ मिलकर ग्रामीण फाइनेंस कंपनी खोली थी और 100 करोड़ रुपये से अधिक की जालसाजी की थी। मामला पकड़े जाने के बाद ईडी ने जांच शुरू की तो उसने अपना नाम बदल कर राजेश पांडेय से रुद्रांश पांडेय कर लिया और पिता का नाम भी बदल दिया था। जिस फर्जीवाडे में वह पकड़ा गया है उसमें उसने अपना नाम रुद्रांश और पिता का नाम राजेश पाण्डेय बताया है। जबकि मां का नाम अर्चना। हालांकि वह अपनी मां का नाम भी तीन बार बदल चुका है। पुलिस मान रही है कि चार करोड़ की जालसाजी इसके लिए बहुत छोटी रकम है, वह 200 करोड़ से अधिक की जालसाजी की पृष्टभूमि तैयार कर चुका था।

नौ हजार वेतन पर रखा ड्राइवर, उसके नाम लिया 2.45 करोड़ का लोन

 बैंक से रियाज के नाम से 2.45 करोड़ का लोन लिया गया था। रियाज उसका चालक है। अभी तक की जांच में रियाज की भूमिका साफ नहीं हो पाई है कि वह इस गिरोह का सदस्य था या नहीं, पूछताछ में पता चला है कि उसे नौ हजार रुपये महीने की नौकरी पर रुद्रांश ने रखा था। पुलिस उसके खाते का डिटेल खंगाल रही है, ताकि इसकी पुष्टि हो सके।

दो और बैंकों से भी की है जालसाजी

मास्टरमाइंड रुद्रांश पांडेय से पूछताछ में पता चला है कि उसने एक्सिस बैंक सहित दो अन्य बैंकों से भी जालसाजी की है, लेकिन ये जालसाजी की रकम एक करोड़ से कम होने की वजह से बैंक की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। यही नहीं एक अन्य बैंक लोन फाइनल कर पेमेंट करने वाला था तभी वह पकड़ा गया। इसी वजह से पुलिस सिर्फ अभी सामने आए प्रकरण की ही जांच कर रही है। हालांकि अन्य बैंकों से भी कहा जा रहा है कि उनके यहां से भी जालसाजी हुई है तो वे सामने आएं।

बैंक से सीए तक, किसी को नहीं छोड़ा

रूद्रांश से पूछताछ के साथ ही पुलिस बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। वे सभी अधिकारी जांच की जद में हैं जिनके टेबल से होकर चार करोड़ से अधिक रुपये के लोन की फाइल गुजरी थी। जिसने बिना किसी सत्यापन के ही रुद्रांश पांडेय की फर्जी कंपनी को ऋण दे दिया है पुलिस ने उसकी भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। जांच के दायरे में आए चार्टर्ड अकाउंटेंट ने किसी भी प्रोजेक्ट को तैयार करने से इनकार कर दिया है। अब सीए के नाम और मुहर का गलत इस्तेमाल हुआ है या वह झूठ बोल रहा है, इसकी भी जांच पुलिस कर रही है।

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