28 साल से पैसे जमा कर रही थी 82 साल की बुजुर्ग महिला, राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट को सौंपे एक लाख एक सौ रुपये

हिन्दुस्तान टीम,अयोध्या Last Modified: Tue, Sep 22 2020. 19:04 IST
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रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला के मंदिर निर्माण को लेकर तकनीकी पहलुओं के परीक्षण का कार्य चल रहा है। इस बीच मंदिर की नींव का आधार तैयार करने के लिए 12 सौ स्तम्भों के साथ अंडर ग्राउंड फाउंडेशन बनाने की प्रक्रिया पर काम हो रहा है। इसी सिलसिले में टेस्ट पाइलिंग हो रही है। इसके तहत अब तक सौ फिट गहराई में एक मीटर व्यास के छह स्तम्भ तैयार कर लिए गये हैं। अभी 12 स्तम्भ और बनेंगे, फिर उनकी भार वहन क्षमता का परीक्षण होगा।

उधर मंदिर निर्माण के लिए दानदाताओं की लिस्ट में भूदान करने वाले भी श्रद्धालु शामिल हो गये हैं। ऑनलाइन चंदे के अलावा अलग-अलग कई तरीकों से रामभक्त श्रद्धालु मंदिर निर्माण में योगदान दे रहे हैं। यहां आने वाले दर्शनार्थी रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय में जाकर भी नकद राशि दान दे रहे हैं तो मनीआर्डर भी प्रतिदिन आ रहा है। इस बीच जहां विदेशों से भी श्रद्धालु गण दान देने के लिए लालायित हैं लेकिन अभी विदेशी मुद्रा के दान प्राप्त करने की विधिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसके कारण विदेशी श्रद्धालुओं के दान को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। 

उधर आंध्र प्रदेश के दो अलग-अलग श्रद्धालुओं ने रामलला को भूदान की पेशकश की है। इस बारे में ट्रस्ट के व्यवस्थापक आशीष अग्निहोत्री ने बताया कि उन श्रद्धालुओं को कुछ दिन प्रतीक्षारत रहने के लिए कहा गया. है। बताया गया कि एक महिला श्रद्धालु जिनके नाम तीन सौ एकड़ भूमि है, वह रामलला के नाम करना चाहती हैं। इसी तरह से एक अन्य श्रद्धालु 50 एकड़ भूमि रामलला को दान देना चाहते हैं। ट्रस्ट ने उनका आभार जताते हुए कहा कि अभी मंदिर निर्माण पर पूरा फोकस है। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद पुन: बातचीत कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

82 वर्षीय महिला ने पूरा किया 28 साल का संकल्प

रामलला के दर्शन के लिए मंगलवार को दूसरी पाली में मसकिनवा, गोण्डा से आई एक 82 वर्षीय महिला श्रद्धालु ने अपने 28 वर्ष के संकल्प को पूरा किया। उन्होंने दर्शन के उपरांत तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय में आकर एक लाख एक सौ एक रुपये की नकद राशि मंदिर निर्माण के लिए दान में दी। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 1992 से राम मंदिर निर्माण के लिए घर के खर्च से कुछ राशि बचाकर गुल्लक में रखती थीं। यह संयोग है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मंदिर की प्रक्रिया शुरू हो गयी तो एकत्र की गयी राशि ट्रस्ट के सुपुर्द करने यहां आई हूं।
   
  

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