ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News उत्तर प्रदेशबच्चियों के खिलाफ अपराध में छूट गए 65% आरोपी,  सजा दिलाने में नाकाम रही पुलिस

बच्चियों के खिलाफ अपराध में छूट गए 65% आरोपी,  सजा दिलाने में नाकाम रही पुलिस

बच्चियों के साथ अपराध के मामलों में भले ही बड़ी संख्या में FIR दर्ज की जा रही है पर आरोपितों को सजा दिलाने में पुलिस नाकाम नजर आ रही है। 65 प्रतिशत आरोपी सबूतों और गवाहों के अभाव में छूट गए।

बच्चियों के खिलाफ अपराध में छूट गए 65% आरोपी,  सजा दिलाने में नाकाम रही पुलिस
Ajay Singhविवेक पाण्डेय,गोरखपुरTue, 18 Jun 2024 08:57 AM
ऐप पर पढ़ें

Crimes against children:  बच्चियों के साथ अपराध के मामलों में भले ही बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज की जा रही है पर आरोपितों को सजा दिलाने में पुलिस नाकाम नजर आ रही है। पांच महीने में बच्चियों से अपराध में नामजद हुए 65 प्रतिशत आरोपी सबूतों और गवाहों के अभाव में छूट गए। पुलिस सिर्फ 35 प्रतिशत अभियुक्तों को ही सजा दिला पाई है।

नाबालिग बच्चों/ बच्चियों के साथ बढ़ते अपराध के मामलों को देखते हुए वर्ष 2012 कनून में बदलाव किया गया। इसी बदलाव का नतीजा है कि नाबालिग से जुड़े अपराध के लिए पाक्सो एक्ट के कानून ने जन्म लिया और इसकी सुनवाई के लिए विशेष अदालतें बनाई गईं।

कोर्ट में मुकर गए गवाह 
गोरखपुर रेंज में चार जिलों गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज में बीते पांच महीने में पाक्सो एक्ट से जुड़े 117 केस पर कोर्ट ने फैसला सुनाया जिसमें महज 48 केस के आरोपित ही दोषी पाए गए जबकि 69 केस से जुड़े आरोपितों को सबूतों और गवाहों के अभाव में कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया। हालांकि इन सभी केस में पुलिस ने अपनी विवेचना में आरोपितों को दोषी मानते हुए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया था पर जब सजा दिलाने की बारी आई तब पुलिस सबूत-गवाह या तो पेश नहीं करा पाई या फिर वे लोग कोर्ट में जाकर अपने बयान से मुकर गए।

देवरिया में 100 सजा
गोरखपुर में 38 केस में फैसला। यहां सिर्फ 15 केस में सजा मिली। देवरिया में 5 केस में फैसला हुआ सभी में आरोपित को सजा मिली। कुशीनगर में 29 केस में फैसला। यहां 21 केस आरोपित बरी हो गए। महराजगंज में 45 केस में फैसला। 25 में आरोपित बरी, 20 में सजा।

यह है पाक्सो एक्ट
2012 में बने इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है. पॉक्सो कानून के तहत सभी अपराधों की सुनवाई, एक विशेष न्यायालय द्वारा कैमरे के सामने बच्चे के माता पिता या जिन लोगों पर बच्चा भरोसा करता है, उनकी मौजूदगी में करने का प्रावधान है।

गवाह हो रहे हैं होस्टाइल
दीवानी कहचरी के वरिष्ठ अधिवक्ता गिरिजेश शुक्ल कहते हैं पाक्सो एक्ट के मामले में 60-65 प्रतिशत आरोपितों के छूटने की दर यह बता रही है कि केस दर्ज होने के बाद पुलिस की विवेचना में कहीं न कहीं कमी रह जा रही है। जिसका आरोपितों को ट्रायल में फायदा मिल रहा है।

उनका कहना है कि 354 और 363,366 जैसी धारा के साथ जुड़े पाक्सो एक्ट में ज्यादातर केस में गवाह भी आगे चलकर होस्टाइल हो जा रहा है। इसका फायदा आरोपित को मिल रहा है। 376 की धारा में भी आरोपित छूट रहे हैं, हालांकि इसकी संख्या कम है।