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उत्तर प्रदेश

रामायण पर इंसाइक्लोपीडिया तैयार करने में जुटेंगे 50 हजार शोधकर्ता 

विशेष संवाददाता,लखनऊPublished By: Deep
Tue, 12 May 2020 09:08 AM
रामायण पर इंसाइक्लोपीडिया तैयार करने में जुटेंगे 50 हजार शोधकर्ता 

प्रदेश के संस्कृति विभाग की पहल पर अयोध्या शोध संस्थान की अगुवाई में रामायण पर विश्वकोश (इन्साइक्लोपीडिया) बनाने की रूपरेखा अब विस्तार लेने लगी है। इस इंसाइक्लोपीडिया को तैयार करने में देश-विदेश के करीब 50 हजार विद्वान, रामायण मर्मज्ञ, संस्कृति कर्मी और साहित्यकारों का बतौर शोधकर्ता योगदान लिया जाएगा।

अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डा.वाई.पी.सिंह ने 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में बताया कि रामायण पर इंसाइक्लोपीडिया का प्रत्येक खण्ड 1100 पृष्ठों का होगा। अंग्रेजी भाषा के अलावा विदेशी भाषाओं रूसी, जर्मन, फ्रेंच आदि में भी इसके संस्करण प्रकाशित होंगे। इनके अलावा अन्य भारतीय भाषाओं में भी यह इंसाइक्लोपीडिया उपलब्ध होगा। इसका डिजिटल संस्करण भी प्रकाशित किया जाएगा। उनका दावा है कि भारतीय संस्कृति से जुड़े किसी महाकाव्य पर अपनी तरह का यह पहला विश्वकोश होगा। 

उन्होंने बताया कि यूरोप व अमेरिका के अलावा अफ्रीका खाड़ी के देशों में भी भारतीय वैदिक परम्परा के तमाम ऐतिहासिक साक्ष्य मिलते हैं, जिनमें बोत्सनिया-हर्जेगोविना के बीच रामे नदी, बुल्गारिया में चट्टानों पर उकेरे गए स्वस्तिक व अन्य चिन्ह हाल ही में चर्चा में आए हैं।

रविवार को संस्थान की ओर से करवाए गए अन्तर्राष्ट्रीय वेबिनार की अगली कड़ी में अब मंगलवार 12 मई को रामायण केन्द्र भोपाल से 'रामायण की लोक संस्कृति का आधुनिक परिदृश्य' विषय पर वेबिनार होगा। इस परिचर्चा में आयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डा.वाईपी सिंह, रूसी-भारतीय मैत्री संघ दिशा मास्को से डा.रामेश्वर सिंह, भोपाल के वैदिक संस्कृत विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष डा. निलिम्प त्रिपाठी, न्यूयार्क से लोक संस्कृति के विशेषज्ञ डा. गजेन्द्र पाटीदार, विदेश मंत्रालय की पत्रिका गगनांचल के सह सम्पादक डा.आशीष कथवे आदि मुख्य वक्ता होंगे। 

भारतीय समय के अनुसार दोपहर एक बजे इस वेबिनार की शुरुआत होगी। परिचर्चा के बाद अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डा.वाईपी.सिंह प्रश्नों के उत्तर भी देंगे। इस परिचर्चा में शामिल होने के लिए इण्टरनेट के जरिए आई.डी.-844-309-5553 पर  पासवर्ड 300000 से जुड़ा जा सकता है। 

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