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 गोरखपुर टीबी हॉस्पिटल के 45 कर्मचारी एक साथ बर्खास्‍त, CMS बोले-फैसला नहीं स्‍वीकार 

गोरखपुर टीबी अस्पताल के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बायोमेट्रिक हाजिरी के नाम पर वेतन कटौती का विरोध करना भारी पड़ गया। सेवा प्रदाता फर्म ने एक साथ सभी 45 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है।

 गोरखपुर टीबी हॉस्पिटल के 45 कर्मचारी एक साथ बर्खास्‍त, CMS बोले-फैसला नहीं स्‍वीकार 
Ajay Singhवरिष्ठ संवाददाता ,गोरखपुरMon, 12 Feb 2024 09:20 AM
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TB Hospital: गोरखपुर एयरपोर्ट के पास स्थित 100 बेड टीबी अस्पताल के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बायोमेट्रिक हाजिरी के नाम पर अनाप-शनाप वेतन कटौती का विरोध करना भारी पड़ गया। सेवा प्रदाता फर्म ने एक साथ सभी 45 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। यही नहीं, फर्म ने स्वास्थ्य विभाग से अनुबंध भी एकतरफा खत्म कर दिया। हालांकि अस्‍पताल के सीएमएस ने आश्‍वासन दिया है कि किसी कर्मचारी को बाहर नहीं होने दिया जाएगा। उन्‍होंने कहा है कि फर्म का यह फैसला स्‍वीकार नहीं किया जा सकता। 

सेवा प्रदाता फर्म ने ईमेल कर कर्मचारियों को बर्खास्तगी की सूचना दी। फर्म के इस कदम से हड़कंप मचा हुआ है। हलकान कर्मचारी वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। रविवार को आउटसोर्सिंग कर्मियों ने ड्यूटी की। हालांकि, उन्होंने हाजिरी नहीं लगाई। बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट स्थित 100 बेड टीबी सह सामान्य अस्पताल में आउटसोर्सिंग पर 45 कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से ज्यादातर नर्स और वार्ड ब्वॉय हैं। ये कर्मचारी फरवरी वर्ष 2016 से आउटसोर्सिंग पर तैनात हैं। जुलाई 2021 से उनकी सेवा प्रदाता फर्म बदलकर दिल्ली की चींटी इंटरप्राइजेज कर दी गई।

बायोमेट्रिक हाजिरी से शुरू हुईं मुश्किलें
फर्म ने छह महीने पहले से बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू कर दी। इसके लिए अस्पताल के अंदर एक बायोमेट्रिक मशीन लगी है। सिर्फ आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की ही बायोमेट्रिक हाजिरी ली जा रही हैं। जब से बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू हुई, कर्मचारियों का मानदेय नहीं मिला था। आठ फरवरी को खाते में चार महीने का मानदेय आया। उसमें भी बायोमेट्रिक हाजिरी के नाम पर मनमानी कटौती हो गई। चार हजार से लेकर 30 हजार रुपये तक कम मानदेय मिला है। फर्म ने इस कटौती की वजह बायोमेट्रिक हाजिरी का रिकॉर्ड माना है।

क्‍या बोले सीएमएस 
टीबी अस्‍पताल के सीएमएस डॉ.एके वर्मा ने कहा कि किसी कर्मचारी को बाहर नहीं होने दिया जाएगा। अस्पताल में चिकित्सकों के बाद यही कर्मचारी हैं। इन्हीं के भरोसे अस्पताल में मरीज भर्ती हैं। फर्म का फैसला स्वीकार नहीं है।

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