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22 नवंबर, 2020|10:09|IST

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कुशीनगर में आठ विकास परियोजनाओं को मंजूरी, भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली पर खर्च होंगे 37 करोड़

37 million will be spent on the maha parivartan site of lord buddha in kushinagar in the cabinet mee

उत्तर प्रदेश सरकार ने भगवान गौतमबुद्ध की महापरिनिवार्ण स्थली कुशीनगर में 37 करोड़ की लागत की आठ विकास परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को बताया कि इस प्रोजेक्ट में भगवान बुद्ध से जुड़ी नदी कुकुत्था (घाघी) के किनारे रिवर फ्रंट बनाने के अलावा कुशीनगर में विपश्यना (ध्यान) केंद्र का भी निमार्ण होगा। इसके अलावा पथिक निवासी होटल के सुंदरीकरण समेत अन्य अन्य कार्य होने हैं।

उन्होने बताया कि भगवान बुद्ध की महापरिनिवार्ण स्थली कुशीनगर को संवारने की कवायद हो रही है। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट चालू होने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि की संभावना है। इसको देखते हुए सरकार ने कुशीनगर में पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में बौद्ध सर्किट में सारनाथ व कुशीनगर में 26 परियोजनाओं के विकास को लेकर 167 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

पर्यटन विभाग के अनुसार इन 26 बड़ी परियोजनाओं में आठ परियोजनाएं कुशीनगर की हैं, शेष सारनाथ की हैं। कुशीनगर की परियोजनाओं में कुकुत्था रिवर फ्रंट है, जो चार करोड़ रुपये से विकसित की जाएगी। इसमें नदी के किनारे पक्का घाट, एप्रोच, पाथवे, भगवान बुद्ध की विभिन्न मुद्रा में बैठी प्रतिमाएं, पार्किंग स्थल, बैठने का पक्का स्थान, पेयजल के लिए आरओ प्लांट आदि की व्यवस्था होगी। इसके अलावा कुशीनगर में दो करोड़ की लागत से फूड प्लाजा, शौचालय उच्चीकरण व पार्किंग का निमार्ण होगा। छह करोड़ की लागत से विपश्यना (ध्यान) केंद्र का विकास होगा। वन विभाग के पार्क को इसके लिए विकसित किया जाएगा। इसके उच्चीकरण, सृदृढ़ीकरण, मेडिटेशन प्वाइंट, चारदीवारी, पाथवे, प्रवेश द्वार, दो तालाब, वाटर एटीएम आदि का निमार्ण कराया जाएगा। 

राजकीय बौद्ध संग्रहालय का उच्चीकरण व सुदृढ़ीकरण कार्य भी कराए जाएंगे। इसके लिए 15 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कुशीनगर के होटल पथिक निवास उच्चीकरण होगा। होटल के 28 कमरों का उच्चीकरण, लॉबी से जाने वाली छत की मरम्मत, प्रबंधक व स्टाफ क्वार्टर आदि की मरम्मत होगी। कुशीनगर आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को रात्रि विश्राम के लिए बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी। क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी गोरखपुर रविंद्र कुमार का कहना है कि इस बजट से होने वाले सभी कायोर्ं के लिए डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी गोरखपुर विकास प्राधिकरण को मिली है। प्रस्तावित कार्ययोजना के मंडलायुक्त के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उनकी अनुमति के बाद निमार्ण कार्य शुरू कराया जाएगा।

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