DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   उत्तर प्रदेश  ›  कानपुर में रेलवे की कार्रवाई : सात दिन से सेंट्रल स्टेशन पर नौकरी कर रहे 13 फर्जी रेल कर्मी और 3 एजेंट गिरफ्तार

उत्तर प्रदेशकानपुर में रेलवे की कार्रवाई : सात दिन से सेंट्रल स्टेशन पर नौकरी कर रहे 13 फर्जी रेल कर्मी और 3 एजेंट गिरफ्तार

कानपुर। प्रमुख संवाददाताPublished By: Dinesh Rathour
Thu, 10 Jun 2021 09:07 PM
कानपुर में रेलवे की कार्रवाई : सात दिन से सेंट्रल स्टेशन पर नौकरी कर रहे 13 फर्जी रेल कर्मी और 3 एजेंट गिरफ्तार

जीआरपी ने सेंट्रल स्टेशन पर फर्जी तरीके से नौकरी दिलाने के बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। स्टेशन पर दो जून से नौकरी कर रहे 13 फर्जी रेल कर्मचारियों तथा तीन एजेंटों को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों एजेंट ने फर्जी नियुक्ति पत्र देकर सेंट्रल स्टेशन पर ज्वाइन भी करा दिया था। जीआरपी ने मुकदमा दर्ज कर फरार एजेंटों की तलाश में टीमें रवाना कर दी हैं। फर्जी परिचय पत्र और नियुक्ति पत्र के साथ पकड़े गए 13 लोगों से पूछताछ की जा रही है। 

बुधवार देर रात टिकट निरीक्षक सुनील पासवान प्लेटफॉर्म नंबर दो- तीन पर चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान एक युवक गले में रेलवे का परिचय पत्र टांगे दिखा। परिचय पत्र पर दिनेश कुमार गौतम लिखा हुआ था। टीटीई सुनील से युवक ने कहा कि स्टाफ हैं। पूछताछ में दिनेश ने बताया कि वह ट्रेनिंग कर रहा है। उसकी तरह कई और लोग भी सेंट्रल स्टेशन पर प्रशिक्षण ले रहे हैं। ट्रेनिंग लेने वाले दूसरे साथियों को बुलाने के लिए कहा तो दिनेश ने फोन किया लेकिन एक घंटे तक कोई नहीं आया। इसके बाद टीटीई सुनील ने दिनेश को जीआरपी के हवाले कर दिया। पूछताछ हुई तो गिरोह का खुलासा हो गया। फर्जी नियुक्ति के बड़े गिरोह की आशंका में जीआरपी और आरपीएफ की चार टीमें तत्काल सक्रिय हुईं। एक-एक कर 16 लोगों को पकड़ा गया। इनके पास से फर्जी आई कार्ड और नियुक्ति पत्र बरामद हुए हैं। 

जीआरपी के डिप्टी एसपी कमरुल हसन बताया कि गिरोह के तीन एजेंट दिनेश, पवन और शिवनारायण को जालसाजी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। पैसा देकर फर्जी नौकरी करने वाले 13 युवकों के मामले में अभी अफसरों से मंत्रणा चल रही है। गिरोह के सरगना रुद्र प्रताप का एड्रेस नहीं मिल पाया है। पूछताछ में सभी ने अलग-अग पते बताए हैं। पनकी, कानपुर, इटावा, देहरादून, हरिद्वार के पते की जानकारी मिली है। इसकी तस्दीक कराई जा रही है। 

नोट कर रहे थे कोच नंबर 
सुरागरशी में जुटी जीआरपी और आरपीएफ टीम ने जब खोजबीन शुरू की तो कुछ फर्जी कर्मचारी डायरी में ट्रेनों के कोच नंबर नोट करते दिखे। पूछताछ में उन लोगों ने बताया कि हर दिन बदल बदलकर प्लेटफॉर्म दिए जाते हैं। उन पर आने वाली ट्रेनों के कोच नंबर नोट करने का काम दिया गया था।   

पांच से पंद्रह लाख तक वूसली
डिप्टी एसपी कमरूल हसन ने बताया कि पांच से 15 लाख रुपये लेकर फर्जी नियुक्ति देने की जानकारी मिली है। बेरोजगारी का फायदा उठाकर गिरोह ठगी करता हैं। टीसी के लिए पांच से पंद्रह लाख रुपये तक वूसल किए जाते थे जबकि पार्सल पोर्टर (सामान उठाने रखने वाला) के लिए एक से डेढ़ लाख रुपये वसूलने की बात आरोपितों ने कबूली है।  

फरार हो गया सरगना 
जीआरपी ने गैंग के सरगना रुद्र प्रताप ठाकुर की तलाश में पनकी में छापेमारी की लेकिन वह निकल गया। जीआरपी ने उसकी गाड़ी जब्त कर ली है। रुड़की का प्रॉपर्टी डीलर राकेश भट्ट बेरोजगारों को फंसाने का काम करता है। झांसे में आने वाले युवकों को रुद्र प्रताप के पास भेजता था। इनके साथी अनुज अवस्थी और रोहित की भी तलाश की जा रही है।

गैंग के तार कहीं न कहीं रेलवे से जुड़े
सेंट्रल स्टेशन पर फर्जी तरीके से नौकरी दिलाने वाले गैंग के तार कहीं न कहीं रेलवे से तो नहीं जुड़े हैं? फर्रुखाबाद निवासी अभिषेक ने पुलिस को बताया कि मेरी लास्ट नाइट ड्यूटी थी। अभिषेक को टिकट चेकिंग और फेयर टिकट रसीद बुक भरने की जानकारी थी। इससे लगता है कि बिना ट्रेनिंग टीसी काम करने की जानकारी किसी न किसी रेलवे स्टाफ ने ही दी होगी। पुलिस इस बिंदु पर भी काम कर रही है। इसी तरह सीसामऊ निवासी पवन गुप्त की मां सिलाई का काम करती है और इनके पति प्राइवेट नौकरी करते हैं। इन्होंने पचास हजार रुपये एडवांस देकर बेटे को नौकरी दिलवाई थी पर बाद में बेटे ने छोड़ दी।   

पुलिस की कहानी पर उठ रहे कई सवाल
पुलिस ने गुरुवार देरशाम रेलवे में फर्जी तरह से नौकरी दिलाने और फर्जी नियुक्तिपत्र के साथ आईकार्ड देकर उनसे सप्ताह भर से नौकरी कराने वाले गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस खुलासे पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। पहला यह कि दो जून से सेंट्रल स्टेशन पर 13 फर्जी टीसी, पार्सल पोर्टर काम कर रहे थे और किसी को भनक तक नहीं लगी। न तो चेकिंग स्टाफ पता लगा पाया और न ही पार्सल के कर्मचारी-अधिकारी ही। डिप्टी एसपी कमरूल हसन ने बताया कि फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले सभी युवक बीते 2 जून से नौकरी कर रहे थे। फर्जी स्टाफ को तो रेलवे अधिकारियों को ही पकड़ना चाहिए था। यह तब है जब बिना टिकट किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक है। दूसरा सवाल यह है कि हाजिरी इनकी लग रही थी तो भी किसी को भनक न लगी। इसके अलावा टीटीई ने एक को पकड़ा तो बाकी सभी कैसे पकड़ में आ गए क्योंकि ड्यूटी तो सुबह खत्म हो गई थी। इस पर रेलवे के अफसर सीधे तौर पर जवाब देने से कतरा रहे हैं।   

पहले भी पकड़े जा चुके फर्जी टीसी, गार्ड
सेंट्रल स्टेशन पर पिछले साल पुरुषोत्तम एक्सप्रेस में फर्जी टीसी कानपुर सेंट्रल पर पकड़ा गया था। इसी तरह वर्ष 2009 में एक फर्जी गार्ड को जीआरपी अनवरगंज को पकड़ा था। इसकी जांच में टूंडला के एक रेल कर्मचारी का नाम सामने आया था। फर्जी गार्ड को गिरोह ने फर्रुखाबाद स्टेशन पर वर्दी पहना और झंडी देकर ट्रेन में चढ़ा दिया था। 

लास्ट नाइट ड्यूटी ही कराता था गैंग
सेंट्रल पर फर्जी तरीके से नौकरी करने वाले सभी युवकों को स्टेशन पर लास्ट नाइट में ड्यूटी की थी। लास्ट नाइट का मतलब रात 10 से सुबह 6 बजे की ड्यूटी। इसकी वजह से किसी को इन पर आशंका तक नहीं होती थी।

माफिया चला रहे थे समानांतर रेलवे
रेलवे पुलिस की गिरफ्त में आए गिरोह के एजेंट दिनेश कुमार ने बताया कि साथी पवन गुप्त और शिवनारायण स्टेशन पर रात 9 बजे पहुंच जाते थे और सभी युवकों की ड्यूटी लगाने के लिए परिसर में ही रजिस्टर में दस्तखत कराते थे। इसके बाद सभी को अलग- अलग जगहों पर भेज देते थे। 

अलर्ट जारी किया, जांच में पता चलेगी सच्चाई
एनसीआर सीपीआरओ डॉ. शिवम शर्मा का कहना है कि कानपुर सेंट्रल पर फर्जी तरीके से टिकट चेकिंग से लेकर ट्रेन क्लर्क के पद पर फर्जी तरीके से नौकरी दिलवाने का मामला गंभीर है। टिकट कलक्टर सुनील पासवान ने चेकिंग के दौरान आशंका पर पकड़ा है। इसकी वजह से सभी विभागों  में अलर्ट जारी कर दिया है कि वे लोग भी एसे लोगों पर निगाह रखें, कहीं वहां पर भी तो कुछ इस तरह  से तो काम नहीं कर रहे हैं। जीआरपी ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज करके विवेचना शुरू कर दी है। जल्द ही हकीकत सामने आ जाएगी।

संबंधित खबरें