20 thousand people are living for 13 years for the protection of the Taj Mahal - ताजमहल की हिफाजत की खातिर 13 साल से 'कैद' में बीस हजार लोग DA Image
16 नबम्बर, 2019|12:03|IST

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ताजमहल की हिफाजत की खातिर 13 साल से 'कैद' में बीस हजार लोग

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हर महकमे को ताजमहल की चिंता है। इसके लिए आम लोगों की सुविधाओं को भी दरकिनार किया जा रहा है। ताज की पांच सौ मीटर परिधि में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। इसके चलते ताज से सटे आधा दर्जन गांव और मोहल्लों के लोग परेशान हैं। इन इलाकों में वर्षों से शहनाई तक नहीं बजी हैं। गर्भवती महिलाएं अस्पताल तक नहीं पहुंच पाती हैं। स्कूली बच्चे ऑटो में बैठकर नहीं जा पाते हैं। बावजूद इसके इन इलाकों में रहने वाले 20 हजार से ज्यादा लोग जैसे-तैसे गुजर बसर करने को मजबूर हैं। 

वर्ष 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल से पांच सौ मीटर की परिधि में डीजल और पेट्रोल वाले वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया था। कुछ समय तो इस कानून का पालन कराने में लग गया, लेकिन वर्ष 2006 से इसका कड़ाई से पालन होने लगा। उसके बाद तो ताजमहल से सटे नगला पैमा, नगला तल्फी, गढ़ी बंगस, दशहरा घाट, फॉरेस्ट कालोनी, राजीव नगर और अहमद बुखारी क्षेत्र के लोगों का बुरा हाल हो गया।

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यहां तक वाहनों के न जाने के कारण शादियां होना बंद हो गईं। यहां रहने वाले लोगों के यहां रिश्तेदारों ने आना-जाना छोड़ दिया। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्कूली वाहन भी प्रतिबंध के कारण बच्चों को लेने नहीं जाते हैं। 

नगला पैमा के निवासी डालचंद, थान सिंह बताते हैं कि ताज के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही है। वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया तो वैकल्पिक मार्ग तो देना ही चाहिए था। पहले यहां के लोगों के रहने वालों को राहत देनी चाहिए थी। नगला तल्फी निवासी दीवान सिंह मुखिया का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक ले जाने में काफी परेशानी होती है। कई महिलाओं के केस तक बिगड़ चुके हैं। आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। 

कुछ लोगों ने हंगामा किया तो ताजमहल पश्चिमी गेट से मंदिर तक वैकल्पिक मार्ग बना दिया गया। जबकि वहां कुछ लोग ही जाते हैं। इन इलाकों में 20 हजार की आबादी रहती है। उसके बाद भी यहां वैकल्पिक मार्ग तक नहीं बना है। 
इब्राहीम जैदी
संयोजक, वैकल्पिक मार्ग संघर्ष समिति 

मामला गंभीर है। वैकल्पिक मार्ग के बारे में दिखवाया जाएगा। क्षेत्रीय लोगों के साथ बैठकर इस समस्या का हल निकालने का प्रयास होगा। 
एनजी रवि कुमार
जिलाधिकारी

पांच करोड़ नहीं दिए थे एडीए ने 
वर्ष 2008 में जिला प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग बनाने के प्रयास किए थे। इसके लिए वन विभाग की जमीन ली जानी थी। वन विभाग ने जमीन देने के लिए एडीए से पांच करोड़ रुपये मांगे थे। इसे एडीए ने देने से मना कर दिया।

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ये हो सकता है वैकल्पिक मार्ग
ताजमहल पूर्वी गेट पर पाठक प्रेस के सामने से केवी स्कूल होते हुए ताज खेमा की ओर निकलने वाले रास्ते को इस हिस्से में शामिल किया जा सकता है। यदि वन विभाग अपनी भूमि नहीं भी देता है तो नाले को पाटकर ताजखेमा की चारदीवारी के बराबर से रास्ता बनाया जा सकता है। 

ये होगा फायदा
ताजमहल के सामने से लोगों का आना-जाना बंद हो जाएगा
पर्यटक स्वच्छंद रूप से इस क्षेत्र में घूम फिर सकेगा
सुरक्षा की दृष्टि से भी फायदा होगा
रात्रि में ताज खुलने पर आम लोग भी आसानी से वैकल्पिक मार्ग से निकल सकेंगे

महीने में पांच दिन लग जाता है कर्फ्यू 
प्रत्येक माह की पूर्णिमा के दो दिन पहले और दो दिन बाद तो खासी दिक्कत आती है। इन दिनों ताजमहल रात्रि में साढ़े आठ से 12.30 बजे तक खुलता है। इस अवधि में सैलानियों को छोड़कर अन्य लोगों को पांच सौ मीटर में प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित हो जाता है। ऐसे में किसी के बीमार होने पर भी नहीं निकलने दिया जाता है।

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