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29 मई, 2020|6:18|IST

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1984 सिख दंगा: पैरवी के लिए कोआर्डिनेशन कमेटी का गठन

File photo of a protest on the anniversary of 1984 anti-Sikh riots, in New Delhi. (HT Photo)

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार के स्तर से गठित विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) की मदद के लिए सिख समाज ने स्थानीय स्तर पर एक कोआर्डिनेशन कमेटी का गठन किया गया है। यह पहल ऑल इंडिया सिख दंगा पीड़ित एसोसिएशन के प्रदेश प्रभारी सरदार मोहकम सिंह ने की है। सुप्रीम कोर्ट में सिख दंगों को न्याय दिलाने के लिए रिट दाखिल करने में उनकी अहम भूमिका रही है।

गुरुद्वारा भाई बन्नो साहिब के वाइस चेयरमैन और दंगा पीडि़त एसोसिएशन के प्रभारी सरदार मोहकम सिंह और सरदार गुरुदेव सिंह ने बताया कि शहर के विभिन्न थानों में आरटीआई लगाकर कुछ जानकारियां मांगी गई थीं। इसमें पूछा गया था कि उनके थाना क्षेत्रों में कितने सिखों की मौत हुई। कितना नुकसान हुआ। कितने नामजद हुए। कितनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई, जिन पर आरोप थे उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई।

आरटीआई में मिले गलत जवाब
कई थानों से जो जवाब मिले उसमें जानकारियां गलत मिलीं। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य सरदार कुलदीप सिंह भोगल ने कानपुर के दंगों में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में रिट कराई। उसका आधार यही आरटीआई बनीं। जिनके पास प्राथमिकी की कॉपी थी लेकिन थानों ने इनकार कर दिया उसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट में रिट हुई। कोर्ट ने इसे आधार बनाकर एसआईटी गठन के लिए प्रदेश सरकार को निर्देश दिए थे। 

थाना बजरिया, नजीराबाद पर नजर 
थाना बजरिया के पांच और नजीराबाद की एक प्राथमिकी की दोबारा जांच समेत अन्य सभी मामलों में जांच के अब आदेश हुए हैं। जांच में सुबूत आदि के लिए कोआर्डिनेशन कमेटी अब काम करेगी।

मेरे सामने बड़े और छोटे भाई को मार दिया
अशोक नगर निवासी 1984 के दंगा पीड़ित गुरविंदर जीत सिंह इस बात से खुश हैं कि नजीराबाद थाने में दर्ज प्राथमिकी 351-ए की विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) नए सिरे से जांच करेगी। हमारे बड़े और छोटे भाई दोनों शांति मार्च में शामिल थे। भीड़ ने दोनों को पत्थराव कर मार डाया। एक भाई के गोली भी लगी थी। 

गुरविंदर जीत सिंह ने बताया कि उन्होंने हत्या की रिपोर्ट थाना नजीराबाद में दर्ज कराई। कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंतिम रिपोर्ट लगा दी। 2014 में जब सरदार मोहकम सिंह ने आरटीआई से इस प्राथमिकी के बारे में पूछा तो जवाब मिला कि कोई हत्या ही नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट में दर्ज वाद में हमारी प्राथमिकी लगाई गई तो अदालत ने इसका विशेष संज्ञान लिया। 

गुरविंदर बताते हैं कि क्षेत्र के कुछ लोगों ने शांति मार्च निकाला था। इसमें हमारे बड़े भाई अमोलक सिंह और छोटे भाई गुरचरन सिंह भी शामिल थे। गुरचरण के किसी ने पैर में गोली मार दी। इसके बाद उन्होंने भागने की कोशिश की तो पत्थर चला दिए। उन्हें बचाने के लिए छोटा भाई गया तो उस पर पथराव कर दिया। वह पत्थरों की गंभीर चोट से मौत के शिकार हो गए। हमने भी कोशिश की तो पत्थराव के शिकार हुए तो कुछ लोगों ने और आगे जाने से रोक दिया। इसलिए बच सका। गुरविंदर ने बताया कि बड़े भाई का मुआवजा आज तक नहीं मिला। छोटे भाई का मुआवजा जरूर मिल गया। अब एसआईटी गठन से उम्मीद जागी है।

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  • Web Title:1984 Sikh riots case formation of coordination committee for lobbying