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Hindi News उत्तर प्रदेश2.40 मिनट शंखनाद; कौन हैं रामजनम योगी जिसने गंगा आरती के दौरान पीएम मोदी को किया मंत्रमुग्ध, देखिए VIDEO

2.40 मिनट शंखनाद; कौन हैं रामजनम योगी जिसने गंगा आरती के दौरान पीएम मोदी को किया मंत्रमुग्ध, देखिए VIDEO

गंगा आरती के दौरान दो मिनट 40 सेकेंड तक हुए अनवरत शंखनाद से पीएम मोदी भी मंत्र मुग्ध नजर आए। बगल में बैठे सीएम योगी से भी इस पर चर्चा करते दिखे। इस शंख वादन का वीडियो वायरल हो रहा है।

2.40 मिनट शंखनाद; कौन हैं रामजनम योगी जिसने गंगा आरती के दौरान पीएम मोदी को किया मंत्रमुग्ध, देखिए VIDEO
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,वाराणसीWed, 19 Jun 2024 05:45 PM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार वाराणसी से सांसद चुने जाने के बाद लोगों का आभार जताने मंगलवार को काशी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गंगा पूजन और गंगा आरती में भी हिस्सा लिया। गंगा आरती के दौरान दो मिनट 40 सेकेंड तक हुई अनवरत शंखनाद से पीएम मोदी भी मंत्र मुग्ध नजर आए। बगल में बैठे सीएम योगी से भी इस पर चर्चा करते दिखे। इस शंख वादन का वीडियो वायरल हो रहा है। अपने शंख से पीएम मोदी को भी मोहित करने वाले शख्स का नाम रामजनम योगी है। योगी वाराणसी के ही चौबेपुर के रहने वाले हैं। वह गंगा आरती ही नहीं यहां होने वाले भव्य धार्मिक आयोजनों के दौरान इसी तरह से शंखनाद करते हैं। सबसे खास बात तो यह है कि कल पीएम मोदी के सामने उन्होंने केवल 2.40 मिनट ही अनवरत शंख बजाता है। वह आठ से दस मिनट तक इसी तरह शंख बजाते है। 

अपनी इस प्रतिभा के बारे में रामजनम ने बताया कि साधना के बल पर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। बताया कि आठ साल की उम्र से ही वह शंख बजा रहे हैं। अपने घर के बाहर बने हनुमान मंदिर में शंख बजाने की शुरुआत उन्होंने की थी। कहा कि योग के जरिए उन्होंने अपनी सांस पर नियंत्रण हासिल करने की कला सीखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कल या अन्य दिनों में भी वह जिस तरह से शंख बजाते हैं, लोग इसे एक सांस में बजाना मान लेते हैं। जबकि यह एक सांस में नहीं बजाता जाता है। इसे अनवरत बजाना कहते हैं। यह एक योग की क्रिया के जरिए संभव होता है। 

रामजनम के अनुसार बचपन से ही कुछ अलग करना चाहते थे। जब उन्होंने शंख बजाना शुरू किया तो पहले काफी देर तक अपनी सांस को रोक लेते थे। इसके बाद प्राणायम और तमाम योग क्रियाओं के जरिए अपनी सांत पर नियंत्रण पाना शुरू कर दिया था। योग के जरिए ही उन्होंने एक साथ सांस खींचना, सांस छोड़ना और सांस रोकने की क्रियाओं पर नियंत्रण पर लिया। कहा कि योग में वर्णित कुंभक, रेचक और पूरक क्रियाओं के जरिए शंखनाद करना शुरू कर दिया। इसके बाद वह बिना शंख ध्वनि के टूटे श्वसन प्रणाली को मजबूत रखते हुए भी सांस ले सकते हैं और सांस को रोककर भी रख सकते हैं। यहीं वजह है कि कई मिनटों तक शंखनाद कर सकते हैं।