Hindi NewsUP NewsSpeaking the truth, opposing injustice... What is the message behind PN Pathak, who called the meeting of Brahmin MLAs
सत्य बोलना, अन्याय का प्रतिकार..., ब्राह्मण MLA की बैठक बुलाने वाले पीएन पाठक का क्या इशारा

सत्य बोलना, अन्याय का प्रतिकार..., ब्राह्मण MLA की बैठक बुलाने वाले पीएन पाठक का क्या इशारा

संक्षेप:

गोरखपुर से सटी कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक ने के नए ट्वीट से लखनऊ से दिल्ली तक की सियासी धड़कनें तेज हो गई हैं। पीएन पाठक ने केवल श्लोक नहीं पढ़ा, बल्कि 'अन्याय के प्रतिकार' की बात कहकर यह साफ कर दिया है कि ब्राह्मण समाज अब 'दबकर' नहीं, बल्कि 'निर्भीक' होकर हक की लड़ाई लड़ेगा।

Jan 13, 2026 02:30 pm ISTYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
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ब्राह्मण विधायकों की बैठक बुलाकर यूपी की राजनीति में हलचल मचा देने वाले भाजपा विधायक पीएन पाठक डिजिटल वार कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर उनके नए ट्वीट ने नई चर्चा छेड़ दी है। संस्कृत के एक श्लोक के साथ लिखे गए कुछ शब्दों के इशारों को समझने की कोशिश हो रही है। अपने ट्वीट में पीएन पाठक ने अन्याय के खिलाफ लड़ने, सत्य पर चलने, समाज में ब्राह्मण समाज की भूमिका को लेकर जो बातें लिखी हैं उसके निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। अपनी-अपनी तरह से इसका विश्लेषण किया जा रहा है। पिछले महीने ब्राह्मण विधायकों की बैठक के बाद उन्हें प्रदेश हाईकमान से नसीहत और जाति के आधार पर इस तरह की चीजें नहीं करने की सीधी चेतावनी भी मिली थी।

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पीएन पाठक ने क्या लिखा

पीएन पाठक ने अपने ट्वीट की शुरुआत संस्कृत श्लोक से की है। "नाऽहं कामये राज्यं, न स्वर्गं, न च पुनर्भवम्। कामये दुःखतप्तानां, प्राणिनाम् आर्तिनाशनम्।।" अर्थात्: मुझे न राज्य की कामना है, न स्वर्ग की और न ही मोक्ष की। मैं केवल दुखी और पीड़ित प्राणियों के कष्टों का नाश करना चाहता हूं। इस श्लोक के माध्यम से पाठक ने यह जताने की कोशिश की है कि उनका उद्देश्य सत्ता प्राप्ति या व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं, बल्कि जनसेवा है।

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'अन्याय का प्रतिकार' और 'निर्भीक' रुख

ट्वीट के अगले हिस्से में पीएन पाठक ने जो लिखा, वह अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने लिखा कि “ब्राह्मण का कर्तव्य सत्ता या स्वार्थ नहीं, बल्कि समाज को दिशा देना है। सत्य बोलना, अन्याय का प्रतिकार करना और लोककल्याण के लिए निर्भीक खड़ा होना ही ब्राह्मणत्व है। "यही सनातन परंपरा का मूल संदेश है।

सियासी गलियारों में क्या है इसके मायने?

पीएन पाठक के इन शब्दों, विशेषकर 'अन्याय का प्रतिकार' और 'निर्भीक खड़ा होना', को लेकर लखनऊ के सियासी हलकों में कई तरह की चर्चाएं हैं। पिछले दिनों ब्राह्मण विधायकों की बैठक बुलाने की खबरों के बाद इस ट्वीट को उस एकजुटता को 'वैचारिक आधार' देने की कोशिश माना जा रहा है।

कुछ लोग इसे पार्टी के भीतर दबाव की राजनीति भी मान रहे हैं। यह ट्वीट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को यह बताने का प्रयास माना जा रहा है कि ब्राह्मण समाज और उनके प्रतिनिधि अब अपनी उपेक्षा पर शांत नहीं बैठेंगे?

गोरखपुर से सटी कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक ने के नए ट्वीट से लखनऊ से दिल्ली तक की सियासी धड़कनें तेज हो गई हैं। पीएन पाठक ने केवल श्लोक नहीं पढ़ा, बल्कि 'अन्याय के प्रतिकार' की बात कहकर यह साफ कर दिया है कि ब्राह्मण समाज अब 'दबकर' नहीं, बल्कि 'निर्भीक' होकर हक की लड़ाई लड़ेगा। ब्राह्मण विधायकों की बैठक बुलाने के बाद पाठक का यह 'डिजिटल वार' सीधे तौर पर असंतोष को आग को हवा देने वाला माना जा रहा है।

बैठक की चर्चाओं ने पहले ही बढ़ा दी है तपिश

गौरतलब है कि पीएन पाठक ने पिछले महीने करीब एक दर्जन ब्राह्मण विधायकों के साथ बैठक की थी। इसे एक सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया गया था, लेकिन सत्ता के गलियारों में इसे 'ब्राह्मण लॉबी' की सक्रियता के रूप में देखा गया। भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बैठक पर नाराजगी भी जताई थी। इसके बाद दबा आक्रोश भी देखने को मिला था। अब इस ट्वीट ने उस दबे आक्रोश की अग्नि में घी डालने का काम किया है।

पीएन पाठक के इस निर्भीक संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश भाजपा के भीतर ब्राह्मणों की हिस्सेदारी और उनके मान-सम्मान का मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।