जो खुद जांच के घेरे में, वो क्या जांच करेंगे; राम मंदिर SIT पर सपा ने उठाए सवाल, SC से भी एक अपील
Ram Mandir News: समाजवादी पार्टी ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस की SIT जांच को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट से जांच की अपील की है। सपा नेता पवन पांडेय ने कहा कि जो अफसर खुद जांच के घेरे में हैं, वो क्या जांच करेंगे।

Ram Mandir News: समाजवादी पार्टी (एसपी) ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच को खारिज कर दिया है। राम मंदिर से दान चोरी के मामले को उठाकर सुर्खियों में लाने वाले सपा नेता और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय ने कहा है कि बिना प्राथमिकी (FIR) के एसआईटी जांच का कोई औचित्य नहीं है। पवन पांडेय ने एसआईटी में शामिल अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो अफसर खुद सरकार के जांच के घेरे में हैं, वो क्या राम मंदिर में चढ़ावे की डकैती की जांच करेंगे। सपा नेता ने दान चोरी मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की है और कहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट बनवाने वाले सुप्रीम कोर्ट को इसकी जांच करनी चाहिए।
राज्य सरकार ने लखनऊ मंडल के कमिश्नर विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में लखनऊ रेंज आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव वित्त नील रतन को लेकर तीन सदस्यीय जांच टीम बनाई है। एसआईटी सोमवार से मंदिर में चढ़ावा के रुपयों और आभूषणों में चोरी के आरोपों की जांच कर रही है। एसआईटी ने ट्रस्ट से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की है। जांच के दायरे में दान का रुपया गिनने वाले कर्मचारियों को फोकस में रखकर एसआईटी जांच हो रही है। जांच टीम ने ट्रस्ट से ऐसे कर्मचारियों की पूरी लिस्ट मांगी है, जिसके आधार पर उनकी और उनके रिश्तेदारों की संपत्ति की जांच भी हो सकती है।
पवन पांडे ने प्रेस वार्ता में कहा कि एसआईटी के कुछ सदस्य स्वयं विभिन्न मामलों में सरकारी जांच के घेरे में हैं, उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद गठित ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगे हैं, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेकर मामले की जांच करानी चाहिए। सपा नेता ने मांग की कि जांच पूरी होने तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग किया जाए और ट्रस्ट के वर्तमान पदाधिकारियों एवं ट्रस्टियों के मंदिर परिसर में प्रवेश पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि यदि चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है तो यह केवल श्रद्धालुओं के विश्वास ही नहीं बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के भरोसे के साथ भी विश्वासघात है।
पवन पांडेय ने पूर्व लेखा प्रभारी होने का दावा करने वाले महिपाल सिंह के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि लेखा प्रभारी ने कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई के बदले उन्हें ही निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों को पूरे मामले पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि भविष्य में मंदिर प्रबंधन में अयोध्या के संत-महंतों और शंकराचार्यों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाए तथा कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।


