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बायो डायवर्सिटी पार्क में बांस और तंबू के कैंटीन का लुत्फ उठाएंगे पर्यटक

जगत नारायण विश्वकर्मा/ दीपक जायसवाल म्योरपुर। वन प्रभाग रेणुकूट के दुद्धी रेंज में वर्ष...

बायो डायवर्सिटी पार्क में बांस और तंबू के कैंटीन का लुत्फ उठाएंगे पर्यटक
हिन्दुस्तान टीम,सोनभद्रMon, 12 Feb 2024 10:15 PM
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जगत नारायण विश्वकर्मा/ दीपक जायसवाल
म्योरपुर। वन प्रभाग रेणुकूट के दुद्धी रेंज में वर्ष 1926 में अंग्रेजों के गेस्ट हाउस के रूप में स्थापित हाथीनाला बायो डायवर्सिटी हॉट स्पॉट अब नए लुक और सुंदरता के लिए जाना जाएगा। यहां पर आने वाले पर्यटक बांस और तंबू के बने कैंटीन का आनंद उठाएंगे। शासन की तरफ से जारी किए गए एक करोड़ 64 लाख रुपये से 16 तरह के कार्य कराए जाएंगे।

हाथीनाला बायो डायवर्सिटी पार्क को पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए विकसित किया जा रहा है। यहां पर जैव विविधा के सरंक्षण के साथ दर्जनों दुर्लभ और आम तौर पर दिखे जाने वाले पक्षियों का नजारा भी आकर्षण का केंद्र होगा। शासन से अभी तक प्रथम चरण में अवमुक्त किए गए एक करोड़ 64 लाख रुपये से कुल 16 तरह के कार्य में से दस कार्यों की शुरुआत हो गई है। प्रथम चरण में महाराष्ट्र के कारीगरों की तरफ से निर्मित बंबू वाला कैंटीन लोगों को व्यंजन से ज्यादा निर्माण की सुंदरता भाने लगी है। साथ ही चार आरओ वाटर कूलर, पथ वेरिटर्निंग वाल, 32 सीमेंट के ब्रेंच, दो वाच टावर और दो तंबू के वाच टावर का निर्माण होना है। दूसरे चरण में 12 सौ मीटर नेचर ट्रेल का निर्माण होगा। जिससे जंगल का नजारा और प्राकृतिक सुंदरता देखी जा सकेगी। साथ ही एसी वाले रूम में बैठ कर पांच मिनट का फिल्म भी यहां के बारे में दिखाया जायेगा। जबकि तीसरे चरण में बंबू के चार खूबसूरत हट का निर्माण कराया जाएगा। जिसमें पर्यटक एक निश्चित शुल्क देकर रात गुजार सकेंगे। बांस का बना यह जिले का पहला सरकारी अतिथि गृह होगा, जिसमे सारी सुविधाएं प्रकृति से जुड़ी हुई आधुनिक रूप से शामिल होंगी। वन विभाग की टीम और कारीगर लगातार इस पर काम कर रहे हैं।

हाथीनाला में जल सरंक्षण के लिए नाले को रोका गया है। उसके किनारे दर्जनों प्रकार और प्रजाति के औषधीय पौधे जड़ी बूटी प्राकृतिक रूप से पनप रहे हैं। साथ ही वन्य जीवों के लिए पानी भी उपलब्ध है। वाच टावरों के पास जंगलों में विजय साल, पीयार तेंदू, अर्जुन के पेड़ देखने लायक है। साथ ही दर्जनों चिड़ियों की बोली और मोर, लंगूर की आवाज भी सुनने को मिलेगा। आदिवासियों का छाता बनाने वाला महुलायन शोर के पौधे भी नाले किनारे पनप रहे हैं।

शासन से पहले चरण के लिए धनराशि मिल गई है। कैंटीन बनकर तैयार है। इसका संचालन वन समिति करेगी। अतिथि गृह का निर्माण तीसरे चरण में होगा। यहां सुविधाओं की कमी नहीं होगी और पर्यटकों के लिए सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

- डा भानेंद्र सिंह, उप प्रभागीय वनाधिकारी रेणुकूट।

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