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शबेबरात : मजारों और कब्रिस्तानों पर की दुआख्वानी

शबेबरात : मजारों और कब्रिस्तानों पर की दुआख्वानी

संक्षेप:

Sonbhadra News - सोनभद्र में शबेबरात का पर्व अकीदत के साथ मनाया गया। मुस्लिम समुदाय ने मजारों और कब्रिस्तानों में दुआख्वानी की और कुरान की तिलावते की। दुद्धी जामा मस्जिद में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। मौलाना ने गुनाहों की माफी की रात के महत्व पर प्रकाश डाला। समुदाय ने तौबा करके अल्लाह से माफी मांगी।

Feb 04, 2026 09:25 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सोनभद्र
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सोनभद्र, संवाददाता। जिले में मंगलवार को शबेबरात का पर्व अकीदत के साथ मनाया गया। शबेबरात पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मजारों और कब्रिस्तानों में दुआख्वानी की। वहीं पूरी रात कुरान की तिलावते की और नफिल नमाजें पढ़ी। राबर्ट्सगंज नगर सहित आसपास के इलाकों में मुस्लिम समुदाय ने मंगलवार को शबेबरात का पर्व पूरी अकीदत और पाकीजगी के साथ मनाया। समुदाय के लोगों ने शबेबरात पर अपने-अपने इलाके में स्थित मजारों और कब्रिस्तानों में फातेहा पढ़ी और अपने महरूमों के जन्नत अता करने की दुआ की। वहीं रात में घरों में और मस्जिदों में कुरात की तिलावते और नफिल नमाजे पढ़ी गई।

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शबेबरात के दिन गुनाहों की माफी के लिए नफिल नमाजे पढ़ी और तिलावत कर अल्लाहताला दुआ की। दुद्धी प्रतिनिधि के अनुसार शबेबरात पर दुद्धी जामा मस्जिद में मंगलवार रात को मौलाना हजरत मसूद रजा साहब के सदारत में बाद नमाज ईशा मिलाद शरीफ का प्रोग्राम कुरान शरीफ के तिलावत मौलाना हाफिज सईद अनवर ने शुरू किया। शहर के कई नातखा हजरात ने नातो व मनक़बद पेश की। मौलाना मसूद रजा साहब ने बताया कि आज की रात माफी की रात है और अल्लाह ताला अपने बंदों के साल भर होने वाले कामों के बारे में फरिश्तों के जिम्में लगा देता है। जैसे जिंदगी मौत रोजी-रोटी बीमारी शिफा सब आज रात को ही लिख दिए जाते हैं। मौलाना मौलाना नजीर साहब ने बताया कि बंदा गुनाहों का मुजसमा है। गुनाह तो हो ही जाता है बंदे को अपने गुनाह से सच्ची तौबा करना चाहिए। इस पर रोशनी डालते हुए पूरे मजलिस को अपने-अपने गुनाहों से तौबा कराई। मौलाना गुलाम सरवर ने बताया कि शबे बरात में अल्लाह ताला के हिसाब गुनहगारों को माफ करके जहन्नम से आजादी करता है। इस मौके पर हाफिज रिजाउल्ल मुस्तफा, हाफिज सईद अनवर, मोहम्मद कासिम साहब, मौलाना जैनुल साहब, जामा मस्जिद के सदर रहीम बक्स, मकतब जब्बरिया कमेटी के सदर मोहम्मद आसिफ खान, अखाड़ा कमेटी से फतेह मोहम्मद, सिराज खान, कलमुल्ला खान, राजा बाबू, जहीर खान, सरफराज शाह, कौसर खान, टुन्नू खान आदि मौजूद रहे।