सोनभद्र में मिला औषधीय गुणों वाला अनंत मूल का पौधा

Jan 03, 2026 09:46 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सोनभद्र
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Sonbhadra News - सोनभद्र के जौराही जंगल में भारतीय वन सर्वेक्षण की टीम ने पहली बार अनंत मूल का औषधीय पौधा खोजा है। यह पौधा कर्नाटक, उड़ीसा और उत्तराखंड में पाया जाता है। इसे संरक्षित करने की आवश्यकता है, क्योंकि यह पाचन, किडनी और इम्यूनिटी को सुधारता है। इससे स्थानीय रोजगार सृजन में भी मदद मिल सकती है।

सोनभद्र में मिला औषधीय गुणों वाला अनंत मूल का पौधा

सोनभद्र/म्योरपुर, हिन्दुस्तान टीम। जिले के वन प्रभाग रेणुकूट के बभनी रेंज के जौराही जंगल में पहली बार अनंत मूल का औषधीय पौधा भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून की टीम को मिला है। टीम का मानना है कि इससे पहले जिले के किसी भी क्षेत्र में यह पौधा नहीं देखा गया था। टीम ने इसे बढ़ावा देने और संरक्षित करने की जरूरत पर बल दिया गया है। टीम के नेतृत्व कर रहे संजय कटारिया की माने तो यह पौधा कर्नाटक, उड़ीसा और उत्तराखंड के गंगा किनारे के तराई क्षेत्रों में ही मिलता है। बताया कि भारत सरकार वन एवं पर्यावरण, मंत्रालय प्रत्येक दो साल में चि्ह्तित जंगलों का सर्वेक्षण करती है, जिसमें आरक्षित, संरक्षित, अवर्गीकृत जंगलों में पेड़ पौधे, जड़ी बूटी के साथ मिट्टी के नमूने लेकर उसकी जांच की जाती है।

वन विभाग के पास भी 36 औषधीय पौधे और पेड़ों की सूची है। इसमें अनंत मूल का नाम नहीं है। यह पहली बार होगा कि वन विभाग आने वाले समय में सोनभद्र के सूची में अनंत मूल को शामिल करेगा। यह पौधा, पाचन तंत्र को मजबूत, किडनी को सुचारू रूप से काम करने और सर्दी जुकाम में कारगर होने के साथ इम्यूनिटी बढ़ाता है। जड़ी बूटी के जानकार डा लखन राम जंगली का कहना है कि अनंत मूल को लगातार एक सीमित मात्रा में एक दो माह सेवन करें तो शरीर का गंध तक बदलने लगता है। केंद्र सरकार के निर्देश पर बीएचयू और औरंगाबाद, पश्चिम बंगाल विश्वविद्याल की विशेषज्ञों की टीम विंध्य क्षेत्र में जड़ी बूटी, उसके उपयोग और स्थानीय वैद्यों के कार्य पद्धति को लेकर इस क्षेत्र में पांच साल तक अध्ययन करने में जुटी है। ऐसे में अनंत मूल का सरंक्षण किया गया तो स्थानीय लोगों के पूरक रोजगार सृजन का अवसर भी मिल सकता है। अनंत मूल एक पतली लता के समान झाड़ी है, जिसे हेमिडेसमस इंडिकस भी कहा जाता है। इसकी जड़ लकड़ी जैसा और सुगंधित होता है। आयुर्वेद में इसका उपयोग त्वचा रोगों और रक्त संबंधी रोगों के उपचार में किया जाता है डा. किशोर पटवर्धन, आयुर्वेद विभाग, बीएचयू।

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