घघरा नाले से 163 बोटा खैर बरामद, तस्करी में बाप-बेटा गिरफ्तार
वन विभाग ने बभनी रेंज में कत्था (खैर) तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 163 बोटा खैर बरामद किया है। दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने बताया कि खैर का बोटा छत्तीसगढ़ से लाया गया था। स्थानीय ग्रामीणों ने विभाग के दावों पर सवाल उठाए हैं।

म्योरपुर/बभनी, हिटी। वन प्रभाग रेणुकूट की बभनी रेंज में कत्था (खैर) तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने घघरा क्षेत्र के एक नाले में छिपाकर रखा गया 163 बोटा खैर बरामद किया है। मामले में वन विभाग ने घघरा निवासी बाप-बेटे को गिरफ्तार कर चालान कर दिया। प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) कमल कुमार ने बताया कि जिला मुख्यालय क्षेत्र में मुख्य मार्ग पर वन विभाग ने कुछ दिनों पूर्व एक पिकअप वाहन से खैर का बोटा बरामद किया था। पूछताछ में चालक ने माल घघरा क्षेत्र से लाए जाने की जानकारी दी। इसके बाद डीएफओ स्वयं टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घघरा स्थित एक नाले में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान वहां छिपाकर रखे गए 163 नग खैर के बोटे बरामद किए गए। इस मामले विश्वनाथ व उसके पुत्र दिनेश को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ का एक व्यक्ति उन्हें खैर का बोटा पहुंचाता था, जिसे वे पिकअप वाहन के माध्यम से वाराणसी भेजते थे। बरामद बोटों की कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। वन विभाग पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटा है और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है। हालांकि, मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग के दावे पर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि बरामद खैर केवल छत्तीसगढ़ से नहीं लाया गया, बल्कि चौना और पोखरा क्षेत्र के जंगलों तथा किसानों के खेतों से भी पेड़ों की कटाई कर बोटा तैयार किया गया है। उनका आरोप है कि विभाग अपनी लापरवाही छिपाने के लिए पूरी जिम्मेदारी बाहरी तस्करों पर डाल रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कत्था तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि कई महीनों से यह अवैध कारोबार चल रहा था, ऐसे में वन विभाग को इसकी भनक क्यों नहीं लगी, यह जांच का विषय है।
तस्करी के तरीकों की जांच
प्रथम दृष्टया आरोपियों ने बरामद बोटा छत्तीसगढ़ से लाए जाने की बात स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि अभी तक वन विभाग को अपने क्षेत्र में खैर के पेड़ों की अवैध कटान की पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी लगाए गए आरोपों की जांच के लिए संबंधित वन क्षेत्रों में विशेष कॉम्बिंग और सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है।
- कमल कुमार, डीएफओ।
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