गैस किल्लत से बंद होने लगे छोटे होटल, ढाबों पर भी संकट
Sonbhadra News - सोनभद्र में गैस की किल्लत की वजह से छोटे होटल और ढाबे बंद हो रहे हैं। कई होटल संचालक मैन्यू में कटौती कर रहे हैं और लकड़ी से खाना पकाने पर मजबूर हो गए हैं। अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो व्यवसायियों के लिए संकट बढ़ सकता है। गैस की कमी का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है।
सोनभद्र, संवाददाता। जंग की तपिश का असर धीरे-धीरे जनपद में दिखने लगा है। एलपीजी गैस की किल्लत गहराने लगी है, जिसका सीधा असर होटल-ढाबा व्यवसाय पर पड़ रहा है। गैस न मिलने के कारण कई छोटे होटल बंद हो गए हैं, जबकि कुछ संचालक मैन्यू में कटौती कर किसी तरह कारोबार चला रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि छोटे दुकानदारों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है। अगर जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।राबर्ट्सगंज में नवीन सब्जी मंडी के पास होटल चलाने वाले संतोष ने बताया कि गैस नहीं मिलने के चलते ज्यादा ईधन लगने वाले सामान को बंद कर दिया गया है।
सेवड़ा, समोसा समेत कई सामानों को बनाना कर दिया है। जब तक स्थिति सामान्य नहीं होगी मैन्यू में कटौती जारी रहेगी।वैनी प्रतिनिधि के अनुसार: विकास खंड नगवां के वैनी बाजार में गैस की किल्लत से आधा दर्जन से अधिक होटल और चाट-फुल्की की दुकानें बंद हो चुकी हैं। इंडियन बैंक के पास मान केशरी का होटल पिछले चार दिनों से बंद है। उन्होंने बताया कि पिछले 20-25 दिनों से गैस की समस्या बनी हुई थी, जिसके चलते लकड़ी की भट्टी पर काम चलाया जा रहा था, लेकिन अब पूरी तरह दुकान बंद करनी पड़ी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास ठेला लगाकर समोसा, चाट और मंचूरियन बेचने वाले सुनील ने बताया कि गैस सिलेंडर नहीं मिलने के चलते उनकी दुकान 15 दिनों से अधिक समय से बंद है। वहीं राजेश केशरी की दुकान पर गैस के अभाव में केवल चाय ही बन पा रही है। उन्होंने बताया कि गैस नहीं मिलने के चलते मैन्यू में कटौती करनी पड़ रही है। कमलेश गुप्ता, संजय प्रजापति और दिना गुप्ता सहित कई दुकानदारों की दुकानें भी बंद हो चुकी हैं।बीजपुर प्रतिनिधि के अनुसार: क्षेत्र में भी गैस की कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है। इराक-ईरान, अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के चलते एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायियों को भारी परेशानी हो रही है। बकरीहवा बाजार स्थित रामप्रताप ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से गैस नहीं मिलने के चले होटल बंद करना पड़ा है। वहीं सेवकाडाड़, जरहा, चेतवा, नेमना आदि गांवों में होटलों पर लकड़ी चुल्हे का उपयोग किया जा रहा है। इसी तरह एनटीपीसी परियोजना में कार्यरत श्रमिकों और बाहर से आए परिवारों को भी गैस न मिलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गैस की कमी के कारण अब होटल संचालक लकड़ी और कोयले का सहारा लेने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी और उपलों की मांग बढ़ गई है, जिससे उनके दाम भी बढ़ गए हैं। वहीं सिलेंडर की किल्लत के चलते कालाबाजारी की आशंका भी जताई जा रही है, जहां सिलेंडर दोगुने दाम पर बेचे जा रहे हैं। इसी तरह रामगढ़ बाजार में भी ठेला लगाकर परिवार का गुजारा करने वाले अभिषेक कुमार ने बताया कि गैस नहीं मिलने के चलते व्यवसाय को बंद करना पड़ रहा है। वहीं रामसागर ने बताया कि चार दिनों से सिलेंडर नहीं मिलने के चलते ढेला लगाना बंद कर दिया है, जिसके चलते मंच्यूरियन व मिठा नहीं बनाया जा रहा है। डाला, रामगढ़, घोरावल, बभनी समेत कई क्षेत्रों में भी यही स्थिति बनी हुई है। कई जगहों पर होटल संचालकों को गैस के अभाव में दुकानें बंद करनी पड़ी हैं, जबकि कुछ लोग लकड़ी और कोयले से काम चला रहे हैं, जो पहले की तुलना में महंगा पड़ रहा है।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


