नाट्य कला सामाजिक जागरूकता का सशक्त माध्यम
Sonbhadra News - उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा आयोजित संभागीय नाट्य समारोह में एनटीपीसी सिंगरौली के विकास केंद्र में 'दिल की दुकान' का मंचन किया गया। इस नाट्य प्रस्तुति ने मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ को प्रभावी ढंग से दर्शाया। मुख्य अतिथि संदीप नायक ने इसे आत्मचिंतन का प्रेरक माध्यम बताया।
अनपरा,संवाददाता। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ के सौजन्य से आयोजित संभागीय नाट्य समारोह के अंतर्गत एनटीपीसी सिंगरौली के कर्मचारी विकास केंद्र में प्रसिद्ध नाट्य कृति दिल की दुकान का प्रभावशाली मंचन किया गया। लेखक राजेंद्र शर्मा के इस नाट्य मंचन का निर्देशन रतन राठौर ने किया।अनुभूति नाट्य इकाई, कानपुर द्वारा प्रस्तुत यह हास्य नाट्य प्रस्तुति मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों की जटिलताओं और सामाजिक यथार्थ को अत्यंत प्रभावी ढंग से दर्शाने में सफल रही।मुख्य अतिथि संदीप नायक, कार्यकारी निदेशक, एनटीपीसी सिंगरौली ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि ‘दिल की दुकान’ जैसी प्रस्तुतियाँ समाज को आत्मचिंतन की दिशा में प्रेरित करती हैं।
नाट्य कला केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं और सामाजिक जागरूकता का सशक्त माध्यम भी है। इस अवसर पर प्रज्ञा नायक, अध्यक्षा, वनिता समाज, सी. एच. किशोर कुमार, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण), विभिन्न विभाग प्रमुख, प्रशांत कार्यक्रम प्रभारी, संगीत नाटक अकादमी ,दिनेश श्रीवास्तव, कार्यक्रम ऑब्जर्वर, संगीत नाटक अकादमी, समेत तमाम कर्मचारी-अभियंता मौजूद रहे।

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