
कंस वध और रुक्मिणी विवाह का किया गया वर्णन
Sonbhadra News - घोरावल (सोनभद्र) में श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम के दौरान कंस वध और रुकमणी विवाह की कथा सुनाई गई। भागवत कथाकार ब्रजराज दास ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्तों के प्रेम और कंस के अहंकार का वर्णन किया। कार्यक्रम में प्रसाद वितरण और भोज का आयोजन भी किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।
घोरावल (सोनभद्र), हिन्दुस्तान संवाद। स्थानीय नगर के धर्मशाला परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम में मंगलवार की शाम कंस वध एवं रुकमणी विवाह की कथा का वर्णन किया गया। वृंदावन से आए भागवत कथाकार ब्रजराज दास ने व्यास पीठ से प्रवचन किया। उन्होंने कहा कि जीव किसी भी भाव से यदि ईश्वर को याद करता है तो ईश्वर दोनों हाथ से ग्रहण कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि कंस दिन रात भगवान श्रीकृष्ण के विरोध में लगा रहता था। अंतिम समय भगवान ने अहंकारी कंस का वध किया और मुक्ति प्रदान की। भगवान श्रीकृष्णा को रोकने के लिए कंस द्वारा तमाम चाल चले गए लेकिन ईश्वर के सामने अहंकार के सारे बंधन टूट जाते हैं।

इसके पश्चात भगवान कृष्ण एवं रुक्मणी विवाह की कथा का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण को रुक्मणी द्वारा एक ब्राह्मण के माध्यम से जो पत्र के भेजा गया था। वह श्लोक बहुत ही मार्मिक श्लोक है। भगवान श्रीकृष्णा के पारायण होने पर वह अपने भक्तों की हर हाल में सुरक्षा करते हैं। इसके पश्चात रुक्मणी विवाह की बहुत ही सुंदर झांकी प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात प्रसाद वितरण एवं भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर विधायक डॉ अनिल कुमार मौर्य, सुनील चौबे, विपिन बिहारी, रमेश चंद पांडेय, अशोक अग्रहरि, राजकुमार गुप्ता, काजू अग्रहरि, राजेंद्र कुमार, श्रवण कुमार, विनोद कुमार आदि मौजूद रहे।

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