
लंदन में बेटा, अकेली रह मां ने कई दिन नहीं खोला घर का दरवाजा; बिस्तर पर मृत मिलीं
पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़कर देखा तो सुषमा मृत अवस्था में बिस्तर पर मिली। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। रामादेवी चौकी प्रभारी ने बताया कि बीमारी के चलते मौत होने का अंदेशा है। उनका बेटा लंदन में है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले में कार्रवाई की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के कानपुर के चकेरी क्षेत्र के गांधीग्राम में शनिवार सुबह 65 वर्षीय वृद्धा का शव उनके मकान के बंद कमरे में मिला। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मृतका का बेटा लंदन में नौकरी करता है और वृद्धा यहां पर अकेले रहती थीं। पुलिस ने मृतका के बेटे को सूचित कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
चकेरी के गांधीग्राम निवासी 65 वर्षीय सुषमा बाजपेई रिटायर एयरफोर्स कर्मी थीं। उनके पति संतोष बाजपेई भी एयरफोर्स में थे। वर्ष 1989 में संतोष की मौत के बाद सुषमा को मृतक आश्रित में नौकरी मिली थी। उनकी बेटा वरुण लंदन में नौकरी करता है। पूर्व पार्षद मनोज यादव ने बताया कि सुषमा उनकी वरिष्ठ नागरिक संस्था की सदस्य भी थीं। वह बीमार चल रही थीं। लोगों के अनुसार शनिवार सुबह काफी समय तक मकान का दरवाजा न खुलने पर संदेह हुआ तो लोगों ने उनके ससुर बर्रा निवासी आलोक को सूचना दी। वे भी पहुंचे लेकिन दरवाजा नहीं खुला।
फिर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़कर देखा तो सुषमा मृत अवस्था में बिस्तर पर मिली। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। रामादेवी चौकी प्रभारी कुलदीप ने बताया कि बीमारी के चलते मौत होने का अंदेशा है। उनका बेटा लंदन में है। उसे सूचना दी गई है। फिलहाल शव पोस्टमार्टम के लिए भेज मामले में कार्रवाई की जा रही है।
बुढापे में अकेले रहने की मजबूरी बड़ी समस्या
बुढ़ापे में अकेले रहने की मजबूरी कई शहरों में बड़ी समस्या बनती जा रही है। बेहतर करियर या रोजी-रोटी की तलाश में नई पीढ़ी बड़े शहर या विदेश जाती है तो फिर उनके पीछे माता-पिता और अन्य बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें आती हैं। बुढ़ापे में अकेले रह रहे लोगों की सुरक्षा पुलिस के लिए भी बड़ा कंसर्न है। पुलिस इसके लिए समय-समय पर उचित कदम भी उठाती है। लेकिन स्वास्थ्य के मामलों तब दिक्कत आ जाती है जब बुजुर्ग लोगों को समय पर सहायता नहीं मिल पाती।





