
ताजमहल की भीड़ का ‘गणित’ से समाधान, प्रोफेसर ने समझाया मैथमेटिकल मॉडल
ताजमहल में वीएंड पर भीड़ और धक्का-मुक्की के कारण पर्यटकों को अक्सर परेशानी होती है। उनका अनुभव फीका पड़ जाता है। अब इस समस्या से निजात के लिए गणित मददगार हो सकता है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने एक विशेष गणितीय मॉडल विकसित किया है।
ताजमहल की सुंदरता प्रतिवर्ष दुनिया भर के लाखों पर्यटकों को आगरा आकर्षित करती है, लेकिन अत्यधिक भीड़ कई बार बड़ी अव्यवस्था का कारण बन जाती है। विशेषकर टूरिस्ट सीजन और सप्ताहांत (वीकेंड) पर घंटों लंबी कतारों और धक्का-मुक्की के कारण पर्यटकों का अनुभव फीका पड़ जाता है। अब इस समस्या से निजात दिलाने के लिए गणित मददगार हो सकता है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने एक विशेष गणितीय मॉडल विकसित किया है।
मैथमेटिकल मॉडल ऑफ क्राउड कंट्रोल एट द ताजमहल के माध्यम से पर्यटकों के भ्रमण को सुगम बनाने की राह दिखाई गई है। डीन प्रो. लवकुश मिश्रा के अनुसार, यह शोध ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मल्टी डिसिप्लिनरी एंड साइंटिफिक इमर्जिंग’ में प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने बताया कि ताजमहल में एक दिन में पर्यटकों की संख्या 70 हजार से एक लाख तक पहुंच जाती है।
इतनी भारी भीड़ के कारण टिकट काउंटर से लेकर प्रवेश द्वार और मुख्य गुंबद पर अक्सर अव्यवस्था फैलती है। इसी को ध्यान में रखते हुए डॉ. कौशल राना और डॉ. अजय मिश्रा के साथ मिलकर यह शोध किया गया है। इसमें पर्यटकों के आगमन, उनके भ्रमण के तौर-तरीकों, पीक टाइम और सुरक्षा मानकों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। दुनिया भर के प्रसिद्ध स्मारकों में इस तरह के क्राउड सिमुलेशन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।
ताज के साथ दूसरे स्मारक भी दिखाएं
प्रो. लवकुश मिश्रा ने बताया कि आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि आगरा में सिर्फ ताजमहल ही नहीं है। आंकड़ों को देखा गया तो सामने आया कि अन्य स्मारकों पर पर्यटकों की संख्या तो बेहद कम है या बिल्कुल ही नहीं है। जबकि अन्य स्थानों पर ऐसे ही स्मारकों को देखने के लिए लोग जाते हैं। यह सही है कि आगरा आने वाले हर पर्यटक का मुख्य उद्देश्य ताजमहल को देखना होता है, लेकिन पर्यटकों को विकल्पों के बारे में बताया जा सकता है। इससे बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा।
मक्का से पेरिस तक गणित बना समाधान
दुनिया के कई बड़े धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर मैथमेटिकल मॉडल लागू कर भीड़ प्रबंधन की चुनौतियों को हल किया गया है। सऊदी अरब के मक्का में हज के दौरान 'जमारात' (कंकड़ मारने की रस्म) के वक्त होने वाली भगदड़ को रोकने के लिए शोधकर्ताओं ने सोशल फोर्स मॉडल और द्रव गतिशीलता का उपयोग किया। इसके आधार पर पुलों के डिजाइन, खंभों के आकार और रास्तों की चौड़ाई में बदलाव किए गए, जिससे लाखों लोग बिना एक-दूसरे से टकराए सुचारू रूप से आगे बढ़ पाते हैं।
शोध के प्रमुख सुझाव: जो बदल देंगे ताज का अनुभव
क्यू थ्योरी: कतार सिद्धांत के प्रयोग से पर्यटकों का प्रतीक्षा समय 30-40% तक कम किया जा सकता है।
डेंसिटी प्रेडिक्शन मॉडल: इससे मुख्य परिसर में क्षमता से अधिक लोग जमा नहीं होंगे, जिससे भ्रमण सुरक्षित और तनावमुक्त होगा।
फ्लो कंट्रोल एल्गोरिदम: यह मुख्य गुंबद जैसे संवेदनशील और संकरे हिस्सों में पर्यटकों की आवाजाही को नियंत्रित रखेगा।
प्वासों डिस्ट्रीब्यूशन: इसका उपयोग ऑनलाइन टिकट बुकिंग में किया जा सकता है। रियल-टाइम भीड़ के आधार पर सॉफ्टवेयर अगले स्लॉट की टिकट बिक्री को स्वतः धीमा या नियंत्रित कर देगा, ताकि परिसर के भीतर मौजूद पर्यटकों को पर्याप्त स्थान मिल सके।
डिफरेंशियल इक्वेशन: इस सिद्धांत के माध्यम से उन संकरे रास्तों की पहचान की गई है जहाँ भगदड़ का जोखिम अधिक है। सीसीटीवी फुटेज के हीटमैप विश्लेषण के जरिए यह मॉडल भीड़ को वैकल्पिक रास्तों पर मोड़ने का सुझाव देता है।
इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट के डीन प्रो. लवकुश मिश्रा के अनुसार ताजमहल में भीड़ प्रबंधन केवल सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह शुद्ध विज्ञान है। यदि हम आंकड़ों और गणितीय विश्लेषण को अपनाएं, तो न केवल पर्यटकों का अनुभव बेहतर होगा, बल्कि स्मारक के संरक्षण में भी बड़ी मदद मिलेगी।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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