नैमिषारण्य, को तोरण द्वारों से मिलेगी नई धार्मिक पहचान

Newswrap हिन्दुस्तान, सीतापुर
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Sitapur News - उत्तर प्रदेश सरकार ने नैमिषारण्य में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भव्य वैदिक थीम आधारित तोरण द्वार बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए 3.25 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ये तोरण द्वार भारतीय मंदिर वास्तुकला पर आधारित होंगे और नैमिषारण्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेंगे।

नैमिषारण्य, को तोरण द्वारों से मिलेगी नई धार्मिक पहचान

सीतापुर, संवाददाता। विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल नैमिषारण्य को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। लखनऊ-सीतापुर मार्ग पर वैदिक थीम आधारित भव्य तोरण द्वार बनाए जाएंगे। जिन्हें बनाने में 3.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पर्यटन विभाग द्वारा इस परियोजना के लिए पहली 2.40 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है। इन तोरण द्वारों को केवल प्रवेश द्वार के रूप में नहीं, बल्कि नैमिषारण्य की आध्यात्मिक गरिमा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के तहत नैमिष तीर्थ क्षेत्र तक पहुंचने वाले दो प्रमुख मार्गों का चयन किया गया है।

पहला तोरण द्वार लखनऊ लिंक रोड पर और दूसरा सीतापुर लिंक रोड पर बनाया जाएगा। दोनों द्वार भारतीय मंदिर वास्तुकला की पारंपरिक नागर शैली पर आधारित होंगे। इस शैली की खासियत ऊर्ध्वाधर संरचना, बारीक नक्काशी, पवित्र ज्यामितीय स्वरूप और मंदिरों जैसी स्थापत्य संरचना है। डिजाइन में वैदिक वास्तुकला के तत्वों के साथ स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता दी गई है। तोरण द्वारों को लाल बलुआ पत्थर जैसी फिनिश में तैयार किया जाएगा, जिससे उन्हें पारंपरिक धार्मिक स्वरूप मिलेगा। ऊंचे चौकोर चबूतरों पर बनने वाली इन संरचनाओं में परतदार मोल्डिंग, सजावटी पट्टियां, पतले स्तंभ, धंसे हुए पैनल और मंदिर के गर्भगृह जैसे ताखे बनाए जाएंगे। इसके अलावा द्वारों के ऊपरी हिस्से में सीढ़ीनुमा पिरामिड शैली की छत, रेखा शैली का छोटा शिखर और पारंपरिक कलश स्थापित किया जाएगा, जो धार्मिक पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक परियोजना की रूपरेखा तैयार करते समय शहरी और प्राकृतिक परिवेश दोनों का विशेष ध्यान रखा गया है। तोरण द्वारों को सड़क से पर्याप्त दूरी पर स्थापित किया जाएगा, ताकि उनकी भव्यता दूर से ही दिखाई दे सके। चारों ओर हरियाली और खुले वातावरण के बीच विकसित होने वाले तोरण द्वार नैमिषारण्य की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेंगी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना धार्मिक पर्यटन को नई गति देगी। वर्तमान में नैमिषारण्य के प्रवेश मार्गों पर कोई विशेष पहचान चिन्ह नहीं है, ऐसे में ये तोरण द्वार श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक स्वागत द्वार का कार्य करेंगे। इससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का उद्देश्य नैमिषारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों में और अधिक प्रतिष्ठा दिलाना है।

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