
बोले सीतापुर : यातायात नियमों की अनदेखी जान जोखिम में रहती सभी की
संक्षेप: Sitapur News - जिले में सड़क सुरक्षा की स्थिति गंभीर है। हर साल हजारों लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं। सड़कें मानक के अनुसार सुरक्षित नहीं हैं और यातायात नियमों का पालन नहीं हो रहा है। बिना हेलमेट और ट्रैफिक...
जिले में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की स्थिति बेहद चिंताजनक है। हालात यह हैं कि हर साल हजारों लोग असमय सड़क हादसों में अपनी जान गवां रहे हैं। इन हादसों के पीछे जहां एक तरफ सड़कें मानकों के अनुसार सुरक्षित नहीं हैं। आंकड़ें बताते हैं कि जिले में हर साल सैकड़ों लोग सड़क हादसों की चपेट में आकर असमय मौत के मुंह में समा जाते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन हादसों का बड़ा कारण मामूली सी लापरवाही ही होती है। सबसे बड़ी समस्या फुटपाथ न होना और यातायात सिग्नल का संचालन न होना है। लोगों ने कहा कि यातायात नियमों को सख्त बनाएं।
जिले में हर साल सैकड़ों लोग सड़क हादसों का शिकार होकर अपनी जान गवां रहे हैं। इन हादसों की सबसे बड़ी वजह है सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाही। एक तरफ जहां हमारी सड़कें जहां मानक के अनुसार नहीं है। वहीं दूसरी ओर वाहन चालक भी यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा कर फर्राटा भरते हैं। यही वजह है कि मामूली सी लापरवाही भी अक्सर जानलेवा साबित होती है। हालांकि, शहरी क्षेत्रों में यातायात नियमों को लेकर थोड़ी जागरूकता बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थिति अभी भी चिंताजनक है। नो हेलमेट नो फ्यूल का अभियान भी फेल : शहर में दोपहिया वाहन चालकों में से ज्यादातर लोग बिना हेलमेट के सफर करते हैं। साल 2025 में बिना हेलमेट किए गए चालान की बात करें तो 24718 का चालान यातायात पुलिस की ओर से किया गया है। दोपहिया वाहन चालकों की लापरवाही पूरे जिले में देखी जाती है। अनुमान के मुताबिक शहर की सड़कों पर निकलने वाला हर दूसरा बाइक सवार बिना हेलमेट के नजर आता है। सरकार ने हाल ही में नो हेलमेट, नो फ्यूल का आदेश जारी किया, लेकिन इसका असर जिले में कहीं दिखाई नहीं देता। पेट्रोल पंपों वाले अपने मुनाफे के लिए इस नियम को कारगर नहीं होने दे रहे हैं। जिसके कारण आज भी बिना हेलमेट वालों की लंबी कतार लगी रहती है। ट्रैफिक पुलिस की ओर से नियमित रूप से चेकिंग अभियान चलाया जाता है। बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों पर चालान की कार्रवाई भी होती है, लेकिन इस कार्रवाई का कोई खास असर नहीं दिखता। लोग एक दिन चालान कटने के बाद अगले ही दिन फिर बिना हेलमेट सड़क पर वाहन चलाते दिखते हैं। हाईवे से लेकर गांव की सड़कों तक, एक ही बाइक पर तीन से पांच लोगों का सफर करना आम बात है। तीन सवारी के साथ दोपहिया वाहन चलाने में अभी तक 3206 के चालान किए जा चुके हैं। नियमों को ताक पर रखकर की जाने वाली यह यात्रा अक्सर एक छोटी सी चूक से बड़े हादसों का कारण बन जाती है। हैरानी की बात तो यह है कि ऐसी जानलेवा लापरवाही पर कोई ठोस कार्रवाई भी नहीं होती है। इसके साथ ही पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में है। फुटपाथ व सड़क पटरी पर अवैध कब्जे : शहर में कुछ सड़कों पर फुटपाथ है मगर उन पर भी कब्जे हैं। वहीं तमाम वाहन फुटपाथ पर ही खड़े होते हैं। खराब सड़कों और फुटपाथों के न होने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। जिले में सुरक्षित सफर सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारों का कड़े कदम उठाने होंगे। सबसे पहले, यातायात नियमों का पालन न करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। नो हेलमेट, नो फ्यूल जैसे आदेशों को गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा सड़कों की खराब हालत को सुधारने और खतरनाक मोड़ों पर सही मार्ग संकेतक लगाने की जरूरत है। ट्रैफिक सिग्नल को पूरी तरह से चालू किया जाए और चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती को और प्रभावी बनाया जाए। वहीं लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। हेलमेट और सीट बेल्ट पहनना कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच है। तेज रफ्तार से वाहन चलाने से बचना चाहिए और पैदल यात्रियों का सम्मान करना चाहिए। जब तक हम सब मिलकर इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेंगे, तब तक ये हादसे होते रहेंगे और लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे। नियमों को न मानने के चलते साल 2025 में कुल 665 दुर्घटनाओं में 406 ने जान गंवाई और 541 घायल हुए हैं। खराब सड़कें भी दुर्घटना का कारण ट्रैफिक सिग्नल पड़े हैं निष्क्रिय जिले की कई सड़कें बदहाल स्थिति में हैं। शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल की व्यवस्था तो है मगर वह काम नहीं करतेे हैं। इससे यातायात का दबाव बढ़ता है और दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ जाती है। खराब सड़कें और खतरनाक मोड़ों पर तेज रफ्तार वाहनों से हादसों का खतरा बढ़ जाता है। शहर में बहुगुणा चौराहे से लालकुर्ती जाने वाली सड़क पूरी तरह से जर्जर है। पूरे मार्ग पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं। जिनमें बरसात का पानी भरने के बाद उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। जिसक चलते गड्ढों में फंसक आए दिन वाहन सवार हादसों का शिकार होते हैं। इसके अलावा लहरपुर से तंबौर जाने वाले र्ग पर कई स्थानों पर बड़े कट हैं। खास कर कुटी सुपौली गांव के पास बने कट पर आए दिन हादसे होते हैं। वहीं जिला मुख्यालय से लहरपुर होते हुए तंबौर जाने वाले मुख्य मार्ग पर ऐसे कई खतरनाक मोड़ हैं, जहां संकेतक न होने के कारण हादसे होते रहते हैं। इन सब समस्याओं के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी चले जागरूकता अभियान जिले में सड़क सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है और इसे बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। लेकिन इन अभियानों का दायरा अक्सर सीमित होता है। लोगों का कहना है कि ये अभियान शहरों और कस्बों तक ही सीमित रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक जानकारी नहीं पहुंचती है। जब तक ग्रामीण आबादी को यातायात नियमों के बारे में जागरूक नहीं किया जाएगा, तब तक सड़क हादसों की संख्या को कम करना एक बड़ी चुनौती होगी। आज भी ग्रामीण इलाकों में अधिकतर लोग बिना हेलमेट के मोटरसाइकिल चलाते हैं, क्योंकि उन्हें इसकी गंभीरता का एहसास नहीं होता। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाएं अधिक होती हैं। इन क्षेत्रों में चालकों को जागरूक किया जाए। बयां किया दर्द शहर में सड़क हादसों की वजह तमाम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाही एक गंभीर समस्या है और यह सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जागरूकता अभियान चलते हैं मगर नियमों को सख्ती से पालन नहीं कराया जाता है। - अमित लोग अक्सर गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। ट्रपिलंग करते हैं। चार पहिया वाहन सवार सीट बेल्ट तक नहीं लगाते और दोपहिया वाहन सवार हेलमेट नहीं पहनते। बार बार चालान के बाद भी हालात में सुधार नहीं हो रहा है। नियमों को तोड़ने वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। - सदाकत ग्रामीण इलाकों में दोपहिया वाहनों पर तीन से पांच लोगों का सवार होकर धड़ल्ले से सफर करते हैं। ऐसे में वाहन नियंत्रित नहीं रहते हैं और हादसे होते हैं। शहर में तो चेकिंग के साथ जागरूकता के पाठ पढ़ाए जाते हैं मगर ग्रामीण क्षेत्रों में कोई चेकिंग तक नहीं होती है। इस समस्या पर अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए। - मोनू फोटो 07 इशू लोग अक्सर ट्रैफिक सिग्नल, जेब्रा लाइन और गति सीमा का पालन नहीं करते। नो हेलमेट नो फ्यूल जैसे सरकारी आदेशों के बावजूद, पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट के लोग आसानी से दिख जाते हैं। पालन ना करने वाले पेट्रोल पंपों भी सख्त कार्रवाई हो। - इशू बोले जिम्मेदार ट्रैफिक नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाता है। बिना हेलमेट और सीलबेल्ट के अलावा नियमों का पालन न करने वाले वाहनों का चालान और जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है। समय-समय पर लोगों को जागरुक भी किया जाता है। जिले के हर चौराहे पर हमारी ट्रैफिक पुलिस लगी रहती है। लोगों को नियमों का पालन करने के फायदे बताए जाते हैं। जिसका असर दिख रहा है। -फरीद अहमद, ट्रैफिक इंस्पेक्टर प्रस्तुति: अविनाश दीक्षित, अभिनव त्रिवेदी

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