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सीतापुरजैन धर्म में कहीं भी हिंसा का स्थान नहीं: विमर्श

हिन्दुस्तान टीम,सीतापुरPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 03:00 AM
जैन धर्म में कहीं भी हिंसा का स्थान नहीं: विमर्श

महमूदाबाद। राजस्थान सहित उत्तर भारत के कुछ प्रदेशों में जैन धर्म के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे एक संगठन के खिलाफ जैन समाज लगातार विरोध कर रहा है। स्थानीय दिगम्बर जैन मंदिर में विराजमान जैन मुनि राष्ट्रयोगी श्रमणाचार्य विमर्श सागर महाराज ने इस संगठन के कार्यों की सिरे से निंदा करते हुए कार्रवाई की मांग की है।

आचार्य विमर्श सागर महाराज ने कहा कि जिन शासन की अहिंसक संस्कृति युगों-युगों से इस भारतीय वसुधा पर पूज्यता को प्राप्त है। इस अहिंसक संस्कृति के कारण ही सारी दुनिया में भारत देश को आध्यात्मिक गुरू का दर्जा प्राप्त है। भारतीय संस्कृति एक गुलदस्ते की तरह है जिसमें अनेकों धर्म, जाति एवं सम्प्रदायों के लोग आपस में मिलजुलकर प्रेम, मैत्री और आपसी सौहार्द के साथ निवास करते हैं। यहां की संस्कृति में नफरत के बीज नहीं बोये जाते, यहां तो प्रेम के फूल खिलते हैं किन्तु वर्तमान में देश की सौहार्दपूर्ण संस्कृति के लिये कलंक एक संगठन कुकुरमुत्तों की तरह राजस्थान के कुछ जिलों में नजर आ रहा है। इस संगठन का न तो कोई दर्शन है, न ही कोई धर्म है, कोई महत्व नहीं है। मिथ्या कथन करने वाले इस संगठन का सम्पूर्ण जैन समाज पूर्णतया विरोध करता है। आचार्य ने कहा कि जैन धर्म में, जैन शास्त्रों में जैन जीवन शैली में कहीं भी किसी भी प्रकार की हिंसा को स्थान नहीं है। जैन समाज पूर्ण अहिंसक समाज है। विमर्श सागर महाराज ने राजस्थान सरकार और भारत सरकार से यह मांग की है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

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