बोले सीतापुर : पार्किंग की कमी बड़ी आफत इस पर दें ध्यान तो मिले राहत

Jan 13, 2026 04:11 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सीतापुर
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Sitapur News - छोटे ट्रांसपोर्टरों की भूमिका घरेलू सामान और कारोबार की सामग्री की ढुलाई में महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्हें खड़े होने के लिए स्थान की कमी, चालान और खराब सड़कों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन से मदद न मिलने के कारण उनका कारोबार संकट में है। वे एक व्यवस्थित पार्किंग क्षेत्र की मांग कर रहे हैं।

बोले सीतापुर : पार्किंग की कमी बड़ी आफत इस पर दें ध्यान तो मिले राहत

घरेलू सामान हो या सब्जी इनकी ढुलाई में छोटे ट्रांसर्टरों की भूमिका बेहद अहम है। कम दूरी तक सामान पहुंचाने का काम भी यही करते हैं। आम बोलचाल में छोटे हाथी कहे जाने वाले लोडर वाहन छोटे व बड़े कारोबारियों के लिए जरूरत का एक हिस्सा बन चुके हैं। कारोबार के संचालन में इतनी बड़ी भूमिका निभाने के बावजूद छोटे लोडर वाहन का कारोबार करने वाले लोग खुद अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। छोटे ट्रांसपोर्टरों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि शहर में उनके वाहनों को खड़ा करने के लिए कोई स्थान नियत नहीं है। आम तौर पर रोडवेज बस अड्डे से लेकर ट्रांसपोर्ट चौराहे तक सड़क किनारे खड़े होकर ग्राहकों का इंतजार करना पड़ता है।

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जिले की अर्थव्यवस्था में छोटे ट्रांसपोर्टरों की भूमिका अहम है। ये वे छोटे हाथी संचालक हैं, जो घरेलू सामान की डिलीवरी से लेकर छोटे कारोबारों के लिए आवश्यक सामग्री को शहर के भीतर या कम दूरी तक पहुंचाने की अहम जिम्मेदारी निभाते हैं। यही छोटे ट्रांस्पोर्टर जिले की सप्लाई चेन की आखिरी कड़ी को मजबूती देते हैं। हालांकि मौजूदा दौर में ये छोटे कारोबारी तमाम बड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिसके कारण उनका कारोबार चलाना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है और वे आर्थिक संकट के दलदल में धंसते जा रहे हैं। छोटे ट्रांसपोर्टरों के सामने सबसे बड़ी समस्या उनके खड़े होने के लिए एक नियत स्थान का न होना है। ये लोडर चालक आमतौर पर शहर के रोडवेज बस अड्डे से ट्रांसपोर्ट चौराहे तक सड़क के किनारे अपने वाहन खड़े करते हैं। बिना कारण सड़क किनारे खड़े वाहनों का कर दिया जाता है चालान : छोटे ट्रांसपोर्ट संचालकों का कहना है कि इन वाहनों के खड़े होने से आवागमन में कोई दिक्कत पैदा नहीं होती, इसके बावजूद अक्सर इसी बात का हवाला देकर उन्हें अक्सर प्रशासन की ओर से प्रताड़ित होना पड़ता है। इस कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि आए दिन पुलिस और अन्य प्रवर्तन दल सड़क के किनारे खड़े उनके लोडरों की फोटो खींचकर मनमाने ढंग से चालान कर देते हैं। ये चालान अक्सर बिना किसी ठोस यातायात बाधा के केवल नियम उल्लंघन के नाम पर किए जाते हैं। इसकी वजह से इन छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ता है, जो पहले से ही सीमित मुनाफे पर काम कर रहे हैं। कई बार तो एक ही दिन में कई चालान हो जाते हैं, जिससे उनका दिन भर का मुनाफा जुर्माने में चला जाता है। यह स्थिति न केवल उनकी आर्थिक कमर तोड़ती है, बल्कि उन्हें अनावश्यक तनाव और अपमान भी सहना पड़ता है। शहर के छोटे ट्रांस्पोर्टर लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं कि अगर प्रशासन उन्हें एक निश्चित और सुव्यवस्थित पार्किंग या होल्डिंग क्षेत्र उपलब्ध करा दे, तो यह समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी। उन्हें एक ऐसी जगह चाहिए जहां से वे सुचारू रूप से बुकिंग ले सकें और लोडिंग-अनलोडिंग का काम कर सकें। स्थान की अनिश्चितता के कारण उन्हें सामान की लोडिंग और अनलोडिंग में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उन्हें अक्सर भीड़-भाड़ वाले या तंग इलाकों में ही काम करना पड़ता है। शहर की खराब सड़कों से वाहन स्वामी परेशान : शहर की सड़कों की खराब हालत छोटे ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के लिए एक गंभीर और लगातार बनी रहने वाली समस्या है। शहरों में तमाम सड़कें गड्ढों से भरी हैं और उबड़-खाबड़ सड़कें न केवल यात्रियों के लिए परेशानी का सबब हैं, बल्कि ये छोटे लोडर चालकों के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन चुकी हैं। खराब सड़कों की वजह से सामान की सही सलामत और समय पर डिलीवरी उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं। गड्ढों और झटकों के कारण कई बार नाजुक सामान को नुकसान पहुंचता है, जिसकी भरपाई अंततः ट्रांसपोर्टर को ही करनी पड़ती है। समय पर डिलीवरी न हो पाने के कारण उन्हें ग्राहकों की नाराजगी भी झेलनी पड़ती है, जिसका सीधा असर उनके कारोबार की साख और भविष्य की बुकिंग पर पड़ता है। यही नहीं खराब सड़कों की वजह से वाहन जल्दी खराब हो जाते हैं। लोडर के सस्पेंशन, एक्सल और अन्य यांत्रिक पुर्जे लगातार झटके सहने के कारण जल्दी घिस जाते हैं और टूट-फूट का शिकार होते हैं। वहीं छोटे वाहनों के टायर भी जल्दी ही खराब हो जाते हैं, ऐसे में वाहन की मरम्मत कराने व नए टायर खरीदने में अधिक धन खर्च होता है। सरकारी योजना की प्रक्रिया जटिल, मदद लेना टेढ़ी खीर शहर में घरेलू सामान से लेकर कारोबारी उत्पादों की आवाजाही तक में इन छोटे ट्रांस्पोर्टरों की भूमिका बेहद अहम है। बावजूद इसके इन छोटे ट्रांसपोर्टरों को स्थानीय प्रशासन और सरकार से किसी भी तरह की मदद नहीं मिल पा रही है। इस कारोबार से जुड़े लोगों को कहना है, कि सरकार छोटे कारोबारों के लिए कई योजनाएं चलाती है, लेकिन इन योजनाओं का लाभ इन ट्रांसपोर्टरों तक नहीं पहुंच पाता है। सरकारी या बैंक से सहायता लेने की प्रक्रिया में जटिलता के चलते सरकारी योजनाओं का लाभ इनको नहीं मिल पा रहा है। बैंक से कर्ज लेने के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई, गारंटी की कमी और बैंकों के सख्त मानदंड छोटे व कम पढ़े-लिखे कारोबारियों के लिए एक बड़ी बाधा है। ज्यादातर कारोबारी निजी संस्थाओं से उच्च ब्याज दर पर कर्ज पर ही निर्भर हैं, जो उन्हें कर्ज के दुष्चक्र में धकेल देता है। पार्किंग के लिए स्थान मिले, नियमित संवाद हो शहर के छोटे ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े कारोबारी लंबे समय से शहर के भीतर अपने लिए एक नियत स्थान की मांग कर रहे हैं, जहां से वे अपने कारोबार का सुचारू रूप से संचालन कर सकें। लेकिन उनकी यह मांग आज तक अधूरी है। इन कारोबारियों का कहना है कि अगर प्रशासन शहर के बाहरी या किसी कम भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र में एक व्यवस्थित मिनी ट्रांसपोर्ट नगर या कम से कम एक बड़ा पार्किंग प्लॉट आवंटित करता है, तो चालान की समस्या, लोडिंग-अनलोडिंग की समस्या और यातायात जाम की समस्या, तीनों को एक साथ हल किया जा सकता है। स्थानीय प्रशासन और नगर निगम को यह समझना होगा कि ये छोटे लोडर चालक केवल अपनी जीविका नहीं चला रहे हैं, बल्कि वे शहर की छोटी और मझोली औद्योगिक इकाइयों तथा व्यापारिक गतिविधियों को गति प्रदान करने के साथ-साथ जिले की सप्लाई चेन को मेंटेन करने में अहम भूमिका अदा करते हैं। उन्हें जिले की आर्थिक प्रगति में भागीदार मानते हुए उनकी समस्याओं का संवेदनशील के साथ समाधान निकालना होगा। छोटे ट्रांसपोर्टरों की यूनियन नहीं होने से बात ऊपर तक नहीं पहुंचती छोटे ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं को और गहरा करने वाली सबसे बड़ी वजह है एक मजबूत और संगठित यूनियन का न होना। छोटे ट्रांस्पोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों को कहना है, कि बड़े ट्रांसपोर्टरों की तरह शहर में इस छोटे ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों की कोई मजबूत यूनियन नहीं है। यूनियन के अभाव की वजह से इन्हें अपनी बात पुरजोर ढंग से रखने के लिए कोई मंच भी उपलब्ध नहीं हो पाता है। जब कोई चालक व्यक्तिगत रूप से पुलिस या प्रशासन से शिकायत करता है, तो उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। यूनियन न होने के कारण उनकी मांगों को एकजुट होकर और प्रभावशाली ढंग से सरकार के सामने पेश करने की शक्ति उनके पास नहीं है। मदद मिले तो बढ़े कारोबार छोटे ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि बड़े ट्रक आदि से गोदाम तक तो सामान जाता है। मगर गील-नुक्कड़ या संकरी सड़कों पर स्थित दुकानों, गोदामों तक हमारे छोटे वाहनों का ही लोगों को सहारा रहता है। ऐसे में अगर प्रशासन मदद करे तो हमारा भी कारोबार और बढ़ सकता है। इतना ही नहीं मदद मिलने पर नौजवान इस व्यवसाय की ओर आकर्षित होगा और नए लोग भी इस व्यवसाय में आएंगे। हमारी भी सुनिए अर्थव्यवस्था को गति देने में हम छोटे ट्रांसपोर्टरों की भूमिका अहम है। घरेलू सामान से लेकर सभी सामान हम पहुंचाते है। फिर भी हमारी समस्याएं कोई नहीं सुनता। - रज्जाक सुना है कि सरकार योजनाएं चला रही है। बैंके भी आसानी से कर्ज दे रही हैं। बैंक से मदद लेने में इतनी औपचारिकता है कि पूरी नहीं हुई। - संजय हम लोगों के पास वाहन खड़े करने के लिए को जगह नही है। सड़कों के किनारे वाहन खड़ा करने पर पुलिस चालान कर देती है। - असलम ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की मांग है। जिससे आसानी से लोडिंग-अनलोडिंग कर सकें। सड़क पर वाहन खड़ा करने से जाम लगता है। - रमेश बोले जिम्मेदार ट्रांसपोर्ट नगर को बनाने का कार्य नगर पालिका प्रशासन का है। सड़कों के किनारे खड़े वाहनों पर कार्रवाई नहीं की जाती है। लेकिन अगर कोई वाहन चालक सड़क पर अपने वाहन को खड़ा कर सामान उतारता है तो पहले उसे चेतावनी दी जाती है, लेकिन जब यातायात बाधित होने लगता है तो उसके बाद ही उस पर कार्रवाई की जाती है। वाहन चालकों को अगर कोई समस्या आती है तो वह सम्पर्क कर सकता है। सर्वेश चतुर्वेदी, एआरटीओ (प्रशासन) प्रस्तुति: अविनाश दीक्षित

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