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28 नवंबर, 2020|4:27|IST

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सीतापुर:जज्बात से नहीं समझदारी से करें काम: आब्दी

सीतापुर:जज्बात से नहीं समझदारी से करें काम: आब्दी

महमूदाबाद। मोहर्रम का चांद दिखने के बाद अजादारों के घरों में इमामबाड़े सजाए गए। आलम, ताबूत और ताजिए रखकर इमाम हुसैन की कुर्बानी की याद में मजलिसें शुरू हो गई। सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखते हुए सोगवारे हुसैनी मजलिसों में शामिल हो रहे हैं।असकरी वकील के इमाम बाड़े में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना जुहैर हसन आब्दी ने कहा कि मुहम्मद-ए-मुस्तफा के नवासे ने आज से चौदह सौ साल पहले इंसानियत को बचाने के लिए अपनी व अपने परिवार की जान कुर्बानी दे दी थी। उन्होंने कहा कि हमारी भी जिम्मेदारी है कि इंसानियत को बचाने के लिए इस कोरोना महामारी से खुद भी बचे और दूसरों को भी बचाएं। सभी लोग सरकार के नियमों को मानते हुए अजादारी करें। जज्बात से नहीं बल्कि समझदारी से सभी काम करें। मौलाना ने कहा कि हम सब अल्लाह से दुआ मांगते हैं कि कोरोना की बीमारी दुनिया से जल्द से जल्द खत्म हो जाए। पहली मोहर्रम से ही सुबह मजलिसों की शुरुआत मीर अल्लाह हुसैन के इमामबाड़े से हुई। इसी सिलसिले में इमामबाड़ा हसन राजा, इमामबाड़ा साबिर हुसैन, दिलशाद हुसैन, अलकमी रिजवी, डॉ. अम्मार रिजवी और राजा साहब के बारादरी इमामबाड़े में मजलिस हुई। मजलिस में सफदर हुसैन, मोहम्मद हैदर, पप्पू रिजवी, अखलाक हुसैन, अकील रिजवी, सद्दन, आलिम हुसैन, मसरूर मेहंदी, कलीम हैदर, हैदर अब्बास, खुर्शीद हुसैन सहित तमाम अजादारों ने मजलिस को सुना। इमाम हुसैन पर हुए जुल्म को सुनकर सोगवारों की आंखों से आंसू निकल पड़े।

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  • Web Title:Sitapur Work smarter not with emotion Abdi